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दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल प्रोजेक्ट: विएना की कंपनी बिछाएगी 82 किमी का एलीवेटेड और अंडरग्राउंड ट्रैक

Mon, 27 Jul 2020 02:20 PM IST
कपिल kapil दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 27 Jul 2020 02:20 PM IST
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Amar Ujala Special Report: Vienna's company will build elevated and underground tracks for Delhi-Meerut Rapid Rail
रैपिड रेल के पिलर निर्माण का कार्य चल रहा है। - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली से मेरठ तक 82 किमी रैपिड रेल के बिछाए जाने वाले बैलेस्टलेस ट्रैक का ठेका विएना (ऑस्ट्रिया) की निर्माण कंपनी मैसर्स पॉर बाउ गंब को दिया गया है। ट्रैक बिछाने का कार्य शुरू होने के दिन से 312 सप्ताह में पूरा करना होगा। यह टेंडर 76 लाख छह हजार 80 यूरो (भारतीय मुद्रा में 66 करोड़ 24 लाख 85 हजार 84 रुपये) में दिया गया है। बताया गया कि ट्रैक बिछाने का काम शुरू होने में एक साल का समय लग सकता है।

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हाल ही में रैपिड रेल के अंडरग्राउंड टनल को लेकर काफी चर्चाएं चली थीं। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने टेंडर प्रक्रिया में चीन की शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी को शामिल किया था। सूत्रों के अनुसार इस कंपनी को टनल का कार्य देने की तैयारी की जा रही थी। लेकिन भारत-चीन के बीच चल रहे वर्तमान हालात को देखते हुए इसे अभी होल्ड पर रखा गया है। हालांकि, एनसीआरटीसी ग्लोबल टेंडर जारी करता है, जिसमें विदेशी कंपनियां भी टेंडर में आमंत्रित होती हैं। इस ट्रैक स्ट्रक्चर में भी विएना की कंपनी ने बाजी मार ली है। 
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यह होता है बैलेस्टलेस ट्रैक
जर्मनी सहित अन्य देशों में बैलेस्टलेस ट्रैक का उपयोग किया जाता है। रैपिड रेल की रफ्तार 180 किमी प्रतिघंटे की है। इसी को देखते हुए बैलेस्टलेस ट्रैक लगाए जाते हैं। इनकी मेंटेनेंस की जरूरत नहीं होती है। सिटी के बीचों बीच ओवरब्रिज में खासतौर पर बैलेस्टलेस ट्रैक लगाए जाते हैं। क्योंकि ये अलग-अलग कंक्रीट से जुड़े होते हैं। इन पर ट्रेन चलने से अधिक सुरक्षित होती है। हालांकि ये महंगे बहुत होते हैं।
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स्विट्जरलैंड की कंपनी ने भी लिया भाग
रैपिड रेल के एलीवेटेड और अंडरग्राउंड ट्रैक के लिए विएना और स्विट्जरलैंड की कंपनी अंतिम दौर में पहुंची थी। स्विट्जरलैंड की सोनविल्ले कंपनी ने भी टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था। लेकिन टेक्निकल बिड में वह बाहर हो गई। इससे विएना की कंपनी को एनसीआरटीसी ने ट्रैक स्ट्रक्चर का टेंडर अवार्ड कर दिया है। इस टेंडर को 13 दिसंबर को फाइनल कर दिया गया था। लेकिन अब एनसीआरटीसी अपनी वेबसाइट पर अवार्ड टेंडर की सूची भी अपलोड कर रहा है, जिससे आगे किए जाने वाले कार्यों की कंपनियों के बारे में पता चल सके। 85 किमी का रैपिड रेल का यह ट्रैक सराय काले खां दिल्ली से मोदीपुरम मेरठ तक का है।

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रैपिड एलाइनमेंट से बढ़ेगी जाम की समस्या
मेरठ शहर को जाम मुक्त करने के लिए प्लान तैयार किए जाते हैं। इन प्लान पर कार्य करने के लिए विभागवार जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। हालात तब खराब हो जाते हैं जब शहर की जनता को रोजाना जाम झेलना पड़ता है। शहर के भीतर रैपिड रेल एलाइनमेंट का कार्य शुरू होने पर जनता की परेशानी और बढ़ने वाली है। लगभग आठ महीने पहले लोक निर्माण विभाग गाजियाबाद और मेरठ ने हापुड़ रोड, गढ़ रोड, दिल्ली रोड पर दोनों तरफ सड़क की नपाई कर निशान लगाए थे। जिसके बाद दुकानदारों में हड़कंप मच गया था। इसके बावजूद आज तक कोई कार्य शुरू नहीं किया गया। ऐसे में अगले पांच-छह महीने में दिल्ली रोड से मोदीपुरम तक अतिक्रमण हटाकर रैपिड रेल के एलीवेटेड ट्रैक का कार्य शुरू किया जाएगा तो जाम की सबसे ज्यादा दिक्कतें सामने आएंगी।

चारों तरफ हाल बेहाल
शहर के चारों कोनों में अतिक्रमण का यही हाल है। बिना अतिक्रमण किए कोई भी सड़क बची नहीं है। कई मीटर आगे तक अतिक्रमण होने से सड़क आधी रह गई है। जिससे वाहनों के बढ़ते दबाव से जाम की समस्या से शहरवासियों को जूझना पड़ रहा है लेकिन विभागों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है। यही हाल रहा तो आने वाले समय में दिक्कतें और ज्यादा बढ़ेंगी।

जब लगेगी रैपिड की बेरिकेडिंग
शहर में रैपिड रेल के एलीवेटेड ट्रैक के निर्माण के लिए बनाए जाने वाले पिलर से पहले सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जाएगा। जिसमें सबसे पहला कार्य अतिक्रमण हटाने का होगा। इसके बाद ही ट्रैफिक समस्या से निजात मिल सकेगी। रैपिड रेल का शहर में निर्माण शुरू होते ही जाम की समस्या बढ़ने वाली है। इससे पहले सड़क चौड़ीकरण का कार्य करना जरूरी होगा।

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