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विधानसभा चुनाव की तैयारी में रालोद, लोकतंत्र बचाओ रैली से संजीवनी की तलाश, पढ़िए खास रिपोर्ट

Thu, 08 Oct 2020 01:40 PM IST
कपिल kapil रणवीर सैनी, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
रणवीर सैनी, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 08 Oct 2020 01:40 PM IST
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Amar Ujala Special Report: Rashtriya Lok Dal has rally with Jat society For UP assembly elections in muzaffarnagar
प्रदर्शन करते किसान - फोटो : अमर उजाला

राजनीति की बिसात पर रालोद को लोकतंत्र बचाओ रैली से संजीवनी की तलाश है। पार्टी नेता जयंत चौधरी के साथ हाथरस में हुई घटना को रालोद सीधे जाट समाज के स्वाभिमान से जोड़ रही है। खाप चौधरियों के साथ अन्य राजनीतिक दलों, भाकियू और अन्य संगठनों का भी साथ मिल गया है। पार्टी का लक्ष्य 2022 का विधानसभा चुनाव है। 

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रालोद लोकतंत्र बचाओ रैली से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने जा रही है। हाथरस में रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पर हमले के विरोध में हो रही यह रैली 2022 के चुनावी समीकरण भी लिखेगी। इस रैली से प्रदेश में नए समीकरण भी बनते हुए दिखाई देंगे। सपा और रालोद के साथ कांग्रेस के नेता भी एक मंच पर दिखाई देंगे। रालोद पश्चिम में अपनी खोई ताकत को तलाश रही है। रालोद ने जयंत पर हमले को सम्मान और स्वाभिमान से जोड़कर जाटों को एक मंच पर लाने का काम शुरू किया है। इस कड़ी में जाट समाज की सभी खापों के चौधरियों ने भी रैली को समर्थन दे दिया है। रालोद समाज को संदेश भी दे रही है कि पार्टी में ताकत डालने के लिए एकजुटता दिखानी होगी। 
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मामला चौधरी चरणसिंह के पौत्र का होने के कारण भाजपा को छोड़ दूसरे दलों के जाट नेता भी रैली में नजर आएंगे। रैली में यदि अच्छी भीड़ रहती है तो यह रालोद के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। भीड़ का सीधा संदेश कांग्रेस और सपा पर भी जाएगा। गठबंधन में रालोद को इसका लाभ होगा।
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यह भी पढ़ें: मुजफ्फरनगर में रालोद की लोकतंत्र बचाओ रैली में भीड़ जुटना शुरू, ड्रोन कैमरे से निगरानी कर रहे अधिकारी

विधानसभा में नहीं है रालोद का प्रतिनिधित्व
पिछले लोकसभा और विधान सभा चुनाव में रालोद का ग्राफ नीचे चला गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी खाता तक नहीं खोल पाई, 2017 के विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट छपरौली जीत पाई थी। यहां से जीते विधायक सहेंद्र रमाला भी बाद में भाजपा में शामिल हो गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी शून्य पर थी, जबकि 2009 में पार्टी के पास पांच सांसद थे। 2004 में तीन और 1999 में दो सांसद थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में आठ विधायक जीते थे। 2007 में दस और 2002 में रालोद के पास 14 विधायक थे।

जयंत के बहाने एक मंच पर होंगे जाट
हाथरस में जयंत पर लाठीचार्ज को लेकर देशभर के जाट नेता एक मंच पर आ रहे हैं। भाजपा को छोड़ दूसरे दलों के नेता लोकतंत्र बचाओ रैली में शिरकत करने आ रहे हैं। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के जाट नेता शामिल हैं। जाट समाज की विभिन्न खाप भी इस मामले में जयंत चौधरी के साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं।

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