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यूपी: मेरठ में रात होते ही शुरू हो जाता है अवैध खनन का बड़ा खेल... ऐसे खुल रही अधिकारियों की पोल

Tue, 11 Aug 2020 04:21 PM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 11 Aug 2020 04:21 PM IST
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Amar Ujala Special Report: illegal soil have mining with help of Police setting in Meerut
भावनपुर क्षेत्र के एक खेत में होता अवैध खनन। - फोटो : अमर उजाला

मिट्टी का अवैध खनन मेरठ जिले में रोके नहीं रुक रहा है। अवैध खनन के इस खुले खेल में माफिया के साथ ही पुलिस और प्रशासन की सांठगांठ पूरी तरह उजागर हो चुकी है। हालात ये हैं कि अंधेरा होते ही देहात क्षेत्र में खनन शुरू हो जाता है और पूरी रात मिट्टी से भरे डंफर मार्गों पर दौड़ते हैं। जिन लोगों ने खनन की स्वीकृति ले रखी है, वो भी मानकों के विपरीत ज्यादा खनन कर अपनी जेब भरने में लगे हैं। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने के साथ ही भू और खनन माफिया पर नकेल कसने की प्राथमिकता को अपने एजेंडे में शामिल किया था। लेकिन मेरठ में मुख्यमंत्री के ये दोनों ही मिशन पूरी तरह फेल होते नजर आते हैं। अवैध खनन की बात करें तो बालू खनन तो फिर भी काबू में है। लेकिन मिट्टी का अवैध खनन लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी नियमों के विपरीत सांठगांठ के खेल से खनन माफिया पूरी रात मिट्टी का खनन करते हैं और इसमें थाना पुलिस की मिलीभगत जहां प्रमुख रूप से होती है तो अब प्रशासनिक सांठगांठ भी उजागर हो रही है। 
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ये होता है सांठगांठ का खेल
खनन माफिया निर्धारित मानक से अधिक का खनन करते हैं, ये किसी से छिपा नहीं है। इसके पीछे पूरी तरह खनन विभाग के साथ ही राजस्व विभाग की सांठगांठ होती है। क्योंकि खनन कार्य के बीच में और पूरा होने के बाद मौके की जांच करने का दायित्व इन दोनों विभागों का होता है। लेकिन कोई भी विभाग मौके पर जाकर जांच नहीं करता है। जिसके चलते खनन माफिया एक से डेढ़ मीटर के बजाय तीन से छह मीटर गहराई तक का खनन कर लेते हैं। लेकिन अब जो मामले सामने आए हैं वो बहुत ही चौंकाने वाले हैं। एनएच-58 पर मोदीपुरम से लेकर दौराला तक तमाम विकास कार्य हो रहे हैं। इनके लिए अक्तूबर 2019 में दो माह के लिए मिट्टी भराव के लिए खनन को अनुमति दी गई थी। लेकिन इस अनुमति के आधार पर ही खनन माफिया खेल कर रहे हैं। उन्होंने अब कोरोना काल में काम पूरा न होने का बहाना बनाते हुए समय सीमा बढ़वाकर खनन दोबारा शुरू कर दिया। 
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प्रतिबंधों के साथ स्वीकृति
जनपद में जितने भी विकास कार्य चल रहे हैं, उन सभी में मिट्टी भराव की जरूरत पड़ रही है। इसके ठेके निर्माण कंपनी छोड़ रही है और उसी के आधार पर जिला प्रशासन इन्हें नियमों के प्रतिबंधों के तहत खनन की स्वीकृति भी प्रदान कर रहा है। लेकिन इसके बाद इस पूरे मामले में खेल शुरू हो जाता है। खनन की स्वीकृति अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के यहां से जारी होती है। सभी खनन स्वीकृति में खनन का क्षेत्रफल जिसमें गहराई एक से डेढ़ मीटर तक ही तय होती है और इसके साथ ही खनन कार्य की समय सीमा भी तय होती है। 

बिना स्वीकृति के भी चल रहा खनन 
जनपद के इंचौली, दौराला, भावनपुर, मुंडाली, कंकरखेड़ा, जानी, रोहटा थाना क्षेत्र ऐसे हें जहां लगातार खनन हो रहा है। इस समय जिले में करीब 37 स्थानों पर अवैध खनन हो रहा है। लेकिन स्वीकृति एक दर्जन की भी नहीं है। इस पूरे खेल में पुलिस तो शामिल है ही, साथ ही राजस्व विभाग के लेखपाल से लेकर ऊपर तक के अधिकारी भी शामिल हैं। जबकि स्वीकृति जारी करने और अवैध खनन को वैध बताने में खनन विभाग पूरी तरह शामिल है। 

दोषियों पर होगी कार्रवाई
यह बहुत ही गंभीर मामला है। पहले जहां भी खनन की स्वीकृति हुई है, उसकी जांच दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों से कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होंगे, उन पर सख्त कार्रवाई तय होगी। - अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी 

तथ्य छिपाकर कृत्य गलत
खनन विभाग और राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मेरे द्वारा स्वीकृति दी जाती है। यदि तथ्य छिपाकर या उसे बाद में बदलकर इस तरह का कृत्य हो रहा है तो बहुत गलत है। मैं इस पर जांच कराकर कार्रवाई करूंगा। - सुभाष चंद्र प्रजापति, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)

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