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अमर उजाला खास रिपोर्ट: टीबी का वार... हर रोज कर रहा 30 को बीमार, ये लक्षण दिखें तो कराएं जांच

Sat, 31 Jul 2021 03:04 PM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 31 Jul 2021 03:04 PM IST
सार

कोरोना के अलावा टीबी की बीमारी भी लोगों पर तेजी से वार कर रही है। शहर में हर रोज करीब 30 टीबी के नए मरीज मिल रहे हैं।

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Amar Ujala Special Report: Every day 30 people are falling ill due to TB disease in Meerut
टीबी की बीमारी के आंकड़े एक नजर में - फोटो : Amar Ujala Meerut

विस्तार

एक तरफ कोरोना तो दूसरी तरफ टीबी का वार भी जारी है। मेरठ शहर में हर रोज करीब 30 टीबी के नए मरीज मिल रहे हैं। इससे साल 2025 तक टीबी मुक्त भारत मुहिम को झटका लग रहा है। इस साल एक जनवरी से 30 जून तक 181 दिन में टीबी के 5430 मरीज मिले हैं। इनमें 3256 मरीज क्षय रोग विभाग की टीम तक पहुंचे हैं, जबकि 2174 रोगियों की जानकारी निजी चिकित्सकों के माध्यम से मिली है।

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इन रोगियों में 30 से 50 साल की उम्र वाले सबसे ज्यादा हैं। 60 प्रतिशत पुरुष और 40 फीसदी महिलाएं हैं। टीबी के इलाज के लिए मेरठ में 18 ट्रीटमेंट यूनिट हैं। एक हजार से ज्यादा डॉट सेंटर हैं और 600 से ज्यादा स्टाफ लगा हुआ है। जिले में पिछले पांच साल में 33 हजार से ज्यादा मरीजों को टीबी की पुष्टि हो चुकी है। 
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. गुलशन राय ने बताया कि टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ने का कारण अपर्याप्त और कम पौष्टिक भोजन, स्वच्छता का अभाव, कम जगह में ज्यादा लोगों का रहना, टीबी के मरीज के संपर्क में रहना व उसकी चीजों को इस्तेमाल करना है। इसके अलावा टीबी के मरीजों के कहीं भी थूकने, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने और बीच में ही दवाओं को छोड़ने से भी टीबी रोगी बढ़ रहे हैं।
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इलाज न कराने वाला मरीज 10-12 लोगों को बनाता है शिकार
टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) का अगर एक मरीज इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 12 मरीजों को टीबी का शिकार बना सकता है। यदि व्यक्ति को टीबी हो और उसे इसका पता न हो तो उसकी वजह से और भी लोग टीबी के मरीज हो सकते हैं।

ये लक्षण दिखें तो जांच कराएं 
- दो हफ्ते से लगातार खांसी होना
- बुखार और भूख न लगना
- रात में पसीना आना
- वजन में लगातार गिरावट

यह है टीबी
टीबी एक गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और जानलेवा हो सकती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवाएं मुफ्त मिलती हैं। जिला अस्पताल में इसका केंद्र है।

घबराएं नहीं, इलाज कराएं
डिस्ट्रिक्ट पीपीएम को-ओर्डिनेटर शबाना बेगम और अजय सक्सेना ने बताया कि रोग को न छिपाएं, यह लाइलाज नहीं है। समय पर उपचार से छुटकारा मिल सकता है। दवाओं के साथ पौष्टिक आहार भी जरूरी है। शरीर में पोषक तत्व सेहत को मजबूत करते हैं।

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