अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट: चौंका देगी मिड-डे मील की हकीकत, ये हैं जिले के प्राइमरी स्कूलों का हाल
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परिषदीय स्कूलों में आए दिन मिड-डे-मील को लेकर हंगामे हो रहे हैं। मंगलवार को अमर उजाला टीम ने जिलेभर में कई स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता की हकीकत जानी। कहीं बच्चे जमीन पर बैठकर खाना खाते मिले, तो कहीं बर्तन धोते नजर आए। दाल में पानी ज्यादा था और चावल की क्वालिटी बेहद खराब। अधिकांश स्कूलों में खाने से पहले हाथ धोने के लिए साबुन का भी इंतजाम नहीं था। प्रस्तुत है मिड डे मील के बारे में एक खास रिपोर्ट।
प्रा.वि.मुंडेट कला शामली
स्कूल में कुल 119 पंजीकृत छात्रों में 114 उपस्थित थे। कक्षा एक और दो के छोटे बच्चे नीचे टाट पट्टी पर बैठे थे और जमीन में खाने की थाली रखकर खाना खा रहे थे। दाल, चावल बने थे। दाल में दल कम और पानी ज्यादा था। चावल भी काफी मोटे और घटिया क्वालिटी के थे। कुछ बच्चे भोजन करने के बाद प्लेट धोते नजर आए। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि बच्चे प्लेट पर केवल पानी डालकर रखते हैं। उसे रसोइया बाद में धोती है। खाना रसोइया बनाती है। हम तो सामान उपलब्ध करा देते हैं। हो सकता है आज दाल में पानी अधिक हो गया हो। प्राथमिक विद्यालय नंबर तीन थानाभवन स्कूल में 192 छात्र थे। यहां खाने में दाल-चावल तैयार किए गए। इसमें चावल घटिया गुणवत्ता का इस्तेमाल किया जा रहा था।
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प्राथमिक विद्यालय नंबर एक, हसनपुर लुहारी थानाभवन
स्कूल में 287 छात्र हैं, लेकिन बैठने के लिए टाट पट्टी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बच्चे जमीन पर बैठकर ही खाना खा रहे थे। एक ही प्लेट में चार-पांच बच्चे खा रहे थे। पूछने पर शिक्षकों ने बताया कि बर्तन कम हैं। कुछ बच्चे तो थाली खाली होने के इंतजार में बैठे थे।
प्राथमिक विद्यालय गांव नागल थानाभवन
स्कूल में केवल 27 छात्र हैं। यहां भी दाल चावल बने थे, बच्चे जमीन पर बैठकर ही खाना खा रहे थे। चावल की क्वालिटी बहुत खराब थी। स्कूल में बच्चों के पीने के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं थी।
प्राथमिक विद्यालय, सलेमपुर कांधला
स्कूल में 123 बच्चे नामांकित बताए गए, लेकिन मौके पर केवल 48 थे। पांच शिक्षक तैनात थे। स्कूल में बच्चे खुले में ही जमीन पर बैठकर खाना खा रहे थे। खाना बनाने वाले स्थान पर साफ सफाई नहीं थी।
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प्राथमिक विद्यालय मलकपुर कांधला
स्कूल में पंजीकृत छात्रों में 186 मौके पर उपस्थित थे, जबकि 10 शिक्षकों की तैनाती थी। छह मौजूद थे। मेन्यू के हिसाब से दाल, चावल बना था, लेकिन खाने से पहले बच्चों के हाथ धोने के लिए साबुन आदि की कोई व्यवस्था नहीं थी।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय आर्यपुरी देहात कैराना
स्कूल में 530 छात्र हैं। स्कूल में दाल और चावल बने थे। कक्षा तीन की छात्रा बुशरा ने बताया कि खाने से पहले हाथ धोने के साबुन भी नहीं है। कक्षा तीन की छात्रा सराना ने बताया की मिड डे मील खाने के बाद उन्हें बर्तन स्वयं साफ करने पड़ते हैं। सकीरा ने भी यही कहा, मगर खाना अच्छा बताया। यहां तैनात रसोई माता ने कहा कि पांच महीने से मानदेय नहीं मिला है।
प्रधानाध्यापक नत्थू सिंह ने बताया की 530 बच्चों का खाना बनाने के बाद रसोई माता को बर्तन धोने का समय नहीं मिलता। इस स्कूल के प्रधानाध्यापक की शिकायत थी कि एसएमआई गोदाम से आने वाले अनाज और चावल में सुरसुली आ रही है, जिन्हें साफ करने के लिए रसोई माताओं का एक घंटा बर्बाद हो जाता है।
प्रा.वि.कन्या नंबर 3, 5 और प्राथमिक विद्यालय कलालान कैराना
तीनों स्कूलों एक ही परिसर में हैं। कक्षा 1 से कक्षा 5 तक 408 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में प्रधानाध्यापक के अलावा केवल 2 शिक्षामित्र और हैं। यहां पर खाना एनजीओ जनकल्याण शिक्षा सेवा समिति हापुड़ के द्वारा सप्लाई किया जाता है। दाल चावल बने थे। छात्रों ने खाने से संतुष्टि जताई।
आज ही बैठक में शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों में मिड-डे-मील की गुणवत्ता की नियमित जांच के निर्देश उच्चाधिकारियों को दिए हैं। कहा गया है कि स्कूलों में जाकर बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की जांच करते रहें। देखें कि खाना मानक और मेन्यू के अनुसार बन रहा है या नहीं। - अखिलेश सिंह, डीएम
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