श्री मुरारी लाल माहेश्वरी स्मृति वाद-विवाद प्रतियोगिता में शाश्वत अव्वल, पुरस्कार पाकर खिले चेहरे
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अमर उजाला की ओर से श्री मुरारी लाल माहेश्वरी स्मृति राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता के मंडल स्तरीय आयोजन में राजनीतिज्ञों के लिए आयु सीमा होनी ही चाहिए विषय पर प्रतिभागियों ने विचार रखें। विचारों के प्रवाह में किसी ने राजनीतिज्ञों के लिए आयु सीमा होने को सही ठहराने वाले तर्क पेश किए, तो किसी ने उम्र के साथ अनुभव बढ़ने का तर्क देते हुए आयु सीमा का बंधन गलत ठहराया।
मंगलवार को सहारनपुर में दिल्ली रोड स्थित सरस्वती विहार स्कूल में आयोजित प्रतियोगिता में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जनपद के जिला स्तरीय प्रतियोगिता के विजेताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कमिश्नर संजय कुमार, महापौर संजीव वालिया, नगर विधायक संजय गर्ग, पूर्व विधायक लाजकृष्ण गांधी, उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य दिनेश सेठी, प्रबंधक अमर गुप्ता और पूर्व प्रबंधक अशोक चावला ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इसके बाद सरस्वती वंदना हुई। प्रतियोगिता का विषय ‘राजनीतिज्ञों के लिए आयु सीमा होनी ही चाहिए’ था, जिसके पक्ष और विपक्ष में प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे।
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मुजफ्फरनगर की शिविका चौधरी ने कहा कि नेता जितना पुराना होता है उसका अनुभव उतना ही अधिक होता है। अखिलेश यादव का उदाहरण दिया कि यदि उनकी जगह अनुभवी मुलायम सिंह मुख्यमंत्री होते, तो यह संभावना थी कि फिर से प्रदेश में सपा की ही सरकार बनती। मुजफ्फरनगर की श्रुति नायक ने कहा कि जब सरकारी कर्मचारियों के लिए उम्र की सीमा होती है तो नेताओं के लिए क्यों नहीं। उनका तर्क था कि उम्र के साथ व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता कम हो जाती है। मुजफ्फरनगर की एकता वर्मा ने भी नेताओं के लिए उम्र सीमा होने का समर्थन किया। उनका कहना था कि देश के 90 फीसदी नेता 60 साल की उम्र से अधिक वाले हैं। वह केवल पैसे और कुर्सी के लिए राजनीति करते हैं।
वहीं शामली के शुभम शर्मा ने कहा कि हिन्दुस्तानी लोग नेताओं को अपना भगवान मान बैठे हैं। कहने को भारत युवाओं का देश है, मगर यहां की सत्ता बूढ़े नेताओं के हाथ में है। टीना देशवाल ने कहा कि देश की 70 फीसदी आबादी युवा है। सबसे अधिक समस्याएं भी युवाओं के ही सामने हैं। युवाओं के दर्द और जरूरत को युवा नेता ही समझ और समाधान कर सकते हैं। सहारनपुर के शाश्वत वत्स ने सरदार पटेल और महात्मा गांधी द्वारा बड़ी उम्र में सटीक फैसले लेने का उदाहरण रखते हुए नेताओं के लिए उम्र की सीमा नहीं होने का पक्ष रखा। उन्होंने राजनीतिज्ञों को प्रशासनिक अधिकारियों या सरकारी कर्मचारियों की तरह उम्र सीमा से बांधने को गलत बताया। राजनीतिज्ञों की आयु सीमा के लिए संवैधानिक पक्ष भी रखा।
सहारनपुर की दीशू पुंडीर ने कहा कि संविधान सबको समानता का अधिकार देता है। यदि सरकारी कर्मचारियों के लिए आयु सीमा हो सकती है, तो नेताओं के लिए भी होनी चाहिए। देवबंद (सहारनपुर) की प्राची ने आयु सीमा होने की बात कही। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम ने भी एक समय में संन्यास ले लिया था, मगर नेता कुर्सी और पैसे के लिए राजनीति छोड़ना नहीं चाहते हैं।
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निर्णायक मंडल की ओर से डॉक्टर पीके वार्ष्णेय ने मंच पर आकर निर्णय सुनाया। जिसमें सहारनपुर के शाश्वत वत्स को प्रथम, शुभम शर्मा (शामली) को द्वितीय, एकता वर्मा (मुजफ्फरनगर) को तृतीय स्थान मिला। प्राची (सहारनपुर) और श्रुति (मुजफ्फरनगर) को सांत्वना पुरस्कार मिला।
समापन पर डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने विजेताओं को प्रमाण पत्र और चेक प्रदान किए। तीनों विजेता अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करेंगे। निर्णायकों में जेवी जैन कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉक्टर पीके वार्ष्णेय, मुन्नालाल गर्ल्स कॉलेज की राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉक्टर गुंजन त्रिपाठी और सरस्वती विहार स्कूल की उपप्रधानाचार्या कंचन सेठी शामिल रहीं। कमिश्नर संजय कुमार ने पॉलिथीन त्यागने, पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और जल बचाने का संदेश विद्यार्थियों को दिया। साथ ही लक्ष्य निर्धारित कर उसे हासिल करने के लिए तन और मन से जुट जाने की अपील की। डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में कामयाब होने के लिए बच्चों को कई सटीक उदाहरण भी बताए। कार्यक्रम का संचालन नीना भाटिया ने किया। कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम से हुआ।
पुरस्कार पाकर खिले चेहरे
मंडलीय प्रतियोगिता के विजेताओं को इनामी धनराशि के चेक सौंपे गए। प्रथम स्थान पर रहे शाश्वत वत्स को सात हजार का चेक मिला, द्वितीय स्थान पर रहे शुभम शर्मा को पांच हजार रुपये का चेक और तृतीय रहीं एकता वर्मा को दो हजार रुपये का चेक दिया गया। सांत्वना पुरस्कार के रूप में श्रुति और प्राची को 1500-1500 रुपये के चेक दिए गए।
प्रमुख रूप से यह लोग रहे मौजूद
प्रतियोगिता कार्यक्रम में स्कूल की प्रशासनिक अधिकारी मंजू जैन, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज, आईआईए के चैप्टर चेयरमैन रविंद्र मिगलानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरजीत सिंह, कोषाध्यक्ष मंजीत सिंह अरोड़ा, महासचिव राजेश सपरा, पार्षद मंसूर बदर, पार्षद चंद्रजीत सिंह निक्कू, पार्षद ज्योति अग्रवाल, अमजद, सईद सिद्दीकी, शहजाद मलिक, बहार जुबैरी, अनुपम गुप्ता, वीरेंद्र बहल, आरके हांडा, एम आजाद अंसारी, राधेश्याम नारंग, काउंसलर सुरभि सिंह, अनुपमा महाजन, महेंद्र सचदेवा, सुशांत सिंघल, रश्मि टेरेंस, प्रधान मनोज, अशोक मलिक, सहदेव चौधरी, नेम सिंह, चरण सिंह आदि मौजूद रहे।
सभी ने मुक्तकंठ से की सराहना
बहुत दिन बाद इस तरह के आयोजन में शामिल होने का मौका मिला। स्कूलों में वाद विवाद प्रतियोगिताओं का प्रचलन खत्म होता जा रहा है। इस तरह के आयोजन से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा, आत्मविश्वास और विषयों को लेकर ज्ञान बढ़ता है। अमर उजाला का यह प्रयास सराहनीय है। विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों में प्रतिभाग का लाभ उठाना चाहिए। जीवन में भी लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए जुटना चाहिए। - संजय कुमार, कमिश्नर।
वाद विवाद प्रतियोगिता में शामिल होकर यह बात पता चली है कि हमारे विद्यार्थियों के भीतर कई अच्छे नेता भी छिपे हैं। विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने और पैसा कमाने के लिए पढ़ाई नहीं करनी चाहिए, बल्कि अच्छा और जिम्मेदार इंसान बनने के लिए पढ़ाई करें। अमर उजाला का यह प्रयास सराहनीय है। - उपेंद्र अग्रवाल, डीआईजी।
वाद-विवाद प्रतियोगिताओं से प्रतिभागियों के साथ ही सुनने वालों की विषय को लेकर समझ बढ़ती है। इस परंपरा को अमर उजाला बरकरार रख रहा है यह अच्छी बात है। विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों में शामिल होना चाहिए। स्वच्छता के प्रति भी लोगों को जागरूक होना चाहिए। - संजीव वालिया, महापौर।
विद्यार्थियों के लिए अमर उजाला अनेक कार्यक्रम चलाता रहा है। विद्यार्थियों को ऐसे आयोजन, जिनमें ज्ञानवर्धन होने के साथ ही पुरस्कार भी मिलता हो, उसमें शामिल होना चाहिए। बच्चों के बीच आकर बहुत अच्छा लगा। विजेताओं को बधाई। - संजय गर्ग नगर विधायक।
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