कोरोना का कहर: महामारी में संकट, टल गए 18 हजार से अधिक ऑपरेशन, पढ़िए अमर उजाला की ये खास रिपोर्ट
कोरोना महामारी के चलते मेरठ में एक हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। यहां कोरोना की वजह से डेढ़ महीने में करीब 18 हजार ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। अमर उजाला की यह खास रिपोर्ट पढ़िए।
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विस्तार
महामारी में ऑपरेशन पर संकट छा गया है। मेरठ में पिछले डेढ़ माह में निजी और सरकारी अस्पतालों में करीब 18 हजार से अधिक ऑपरेशन टल गए हैं। इस दौरान सिर्फ इमरजेंसी ऑपरेशन हो रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर भारी पड़ रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले डेढ़ माह में जिले में बड़ी संख्या में ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में हर रोज करीब सौ ऑपरेशन होते थे। अब महीने भर में इमरजेंसी (डिलीवरी) के अलावा बमुश्किल 150 ऑपरेशन ही किए गए हैं। जिला अस्पताल में हर रोज 50 ऑपरेशन होते थे, अब पांच से आठ ऑपरेशन इमरजेंसी में हो रहे हैं। महिला अस्पताल में 50-60 डिलीवरी हर रोज होती थीं। अब औसतन पांच से 10 डिलीवरी ही हो पा रही हैं। निजी अस्पताल 250 हैं, जिनमें ऑपरेशन होते हैं। आईएमए के मुताबिक, डेढ़ माह पहले तक 400- 500 से अधिक हर रोज ऑपरेशन हो रहे थे, अब डिलीवरी के अलावा इक्का-दुक्का ही ऑपरेशन हो पा रहे हैं।
मार्च के आखिर से ही कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार जोर पकड़ने लगी थी। अप्रैल की शुरुआत से महामारी ने जिले में भयावह रूप धारण कर लिया। सरकारी अस्पतालों में जगह कम पड़ने पर निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल में तब्दील करते हुए वहां कोरोना के मरीज भर्ती किए जाने लगे। इन परिस्थितियों में अभी भी ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है। सबसे ज्यादा प्रभावित वे मरीज हुए हैं, जो पहले से किसी बीमारी से ग्रसित थे और उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह देते हुए तिथि तय कर दी थी। लेकिन अचानक ऑपरेशन रद्द करने पड़ गए। तमाम मरीज ऐसे भी रहे जो कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे की वजह से खुद भी अस्पताल जाकर ऑपरेशन कराने से दूरी बनाए हुए हैं। वे हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
केस - 1
घुटने का होना था ऑपरेशन
पुलिस लाइन निवासी राम किशन का घुटने का ऑपरेशन होना था। मुजफ्फरनगर के डॉक्टर डॉ. मुकेश से संपर्क किया। कोविड के कारण ऑपरेशन नहीं हुआ।
केस-2
पथरी के दर्द से पीड़ित हैं
शास्त्री नगर सेक्टर-10 निवासी 45 वर्षीय फरजाना गहलोत दोनों किडनी में पथरी के दर्द से पीड़ित हैं। दूसरी लहर से ठीक पहले दाईं किडनी का ऑपरेशन कराया था, लेकिन दूसरी किडनी का ऑपरेशन बाकी है। जब डॉक्टर से संपर्क किया तो उन्होंने मना कर दिया। अब पीड़िता की हालत चिंताजनक है।
बोले चिकित्सक
केवल वही ऑपरेशन हुए, जो जरूरी हैं। जिन्हें बाद में भी किया जा सकता है, वे नहीं हुए। ओपीडी बंद होने की वजह से मरीज भी कम आए। इससे ऑपरेशन की संख्या खासी घट गई है। - डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
30 निजी अस्पतालों में बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस के संक्रमितों का इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों का इन दिनों फोकस इस महामारी से निपटने पर है। यही वजह है कोविड अस्पतालों में तब्दील अस्पताल में सामान्य ऑपरेशन नहीं किए जा रहे हैं। - डॉ अनिल कपूर, अध्यक्ष, आईएमए
जिला अस्पताल में ओपीडी बंद है। नेत्र रोग, ईएनटी और हड्डी के जो मरीज आ रहे हैं, उनका उपचार किया जा रहा है। जिनके ऑपरेशन टाले जा सकते हैं, उनके टाल दिए गए हैं। - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
ये टले ऑपरेशन
- मोतियाबिंद और आंख 5500
- हड्डी 2000
- हार्निया- 1700
- रसौली और स्त्री रोग 2200
- ट्रांसप्लांट 1800
- पथरी- 2400
- दांत - 1700
- कटे-फटे होंठ के- 1300
- हृदय - 1200
- ईएनटी 1150