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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: इन बैंकों के 700 करोड़ एनपीए में पहुंचे, 17800 किसानों की जारी हुई आरसी

Fri, 28 Jun 2019 03:07 AM IST
कपिल kapil रणवीर सैनी, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
रणवीर सैनी, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 28 Jun 2019 03:07 AM IST
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Amar Ujala Exclusive: 700 crore of these banks in the district reached in NPA
राकेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला

यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में बैंकों का 700 करोड़ रुपये एनपीए में पहुंच गया है। किसान क्रेडिट कार्ड का पैसा सही समय पर जमा नहीं करने से यह स्थिति बनी है। जिले में संचालित सभी 28 बैंकों के करीब 17800 किसानों की आरसी जारी हो गई है। इसमें सबसे ज्यादा पैसा लीड बैंक पीएनबी का है। जिले में प्रतिवर्ष बैंक यहां दो लाख 21 हजार किसानों को कृषि के लिए चार हजार करोड़ का ऋण देते हैं। इसमें लगभग तीन हजार करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से दिया जाता है।

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किसान क्रेडिट कार्ड पर और पशुपालन आदि में जिले के दो लाख 21 हजार किसान प्रतिवर्ष बैंकों से चार हजार करोड़ का लेन-देन करते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ही किसान लगभग तीन हजार करोड़ का ऋण बैंकों से लेते हैं, जो किसान समय से पैसा जमा करते हैं, उन्हें केसीसी का बड़ा लाभ मिलता है, जो किसान समय पर पैसा जमा नहीं कर पाते उनके लिए ऋण मुसीबत का सबब बन जाता है। किसी भी ऋण पर बैंकों का लगभग नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज होता है। किसान क्रेडिट कार्ड पर 365 दिन से पहले जमा करने पर केवल चार प्रतिशत ब्याज है। किसानों को जो पांच प्रतिशत की छूट मिलती है, इसमें दो प्रतिशत आरबीआई और तीन प्रतिशत ब्याज सरकार देती है। बड़ी बात यह है कि 365 दिन में पैसा जमा नहीं होने पर किसान पर बैंक के हिसाब से साढे़ ग्यारह प्रतिशत तक ब्याज लगना शुरू हो जाता है। एक बार केस खराब होने पर किसान पैसा जमा नहीं कर पाता है। जिले में लीड बैंक पीएनबी सहित 28 बैंक संचालित हैं। 
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वहीं नियम के अनुसार किसान का केसीसी का खाता केवल एक बैंक में हो सकता है। कई मामले ऐसे सामने आ रहे हैं कि किसानों के केसीसी के कई-कई खाते हैं। ऋण किसी बैंक से लिया है और गन्ने का भुगतान किसी दूसरे बैंक में आ रहा है। जिले में दलालों ने ऐसी व्यवस्था बना दी है कि किसान भ्रमित हो गया है। इसका बड़ा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। हाल ही में जो डाटा सामने आया है, यह बड़ा चौंकाने वाला है। समय पर पैसा जमा नहीं करने पर जिले में बैंकों ने 17 हजार 800 किसानों की आरसी जारी की है। इन किसानों से बैंकों का 260 करोड़ वसूला जाना है। बैंकों का जो कुल पैसा एनपीए में है वह 700 करोड़ है।

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किसानों में जागरूकता का अभाव
जिले के लीड बैंक मैनेजर अमित बुंदेला का कहना है कि 80 प्रतिशत किसान समय पर पैसा जमा कर रहे हैं। इन्हें केंद्र सरकार की चार प्रतिशत ब्याज की योजना का लाभ मिल रहा है। बीस प्रतिशत किसान जानकारी के अभाव और दलालों के चक्कर में आने के कारण पैसा जमा नहीं कर पाते हैं। इससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। इनमें कुछ ऐसे केस भी हैं, जिनके घर में बीमारी आदि की समस्या आ जाती है। किसानों को जागरूक करने के लिए हम जिला मुख्यालय से लेकर गांव तक अभियान चलाएंगे। हमारा उद्देश्य किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाना है। केसीसी के डबल खाते में कहीं-कहीं बैंक अफसरों की मिली भगत भी सामने आती है। 

मजबूरी में पैसा जमा नहीं कर पाते किसान: राकेश टिकैत
बड़े स्तर पर किसानों की आरसी जारी होने के मामले में भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान जब आर्थिक रूप से फंस जाता है तब वह बैंक से ऋण लेता है। केसीसी के डबल खातों में दलालों का खेल है। किसान मजबूरी में इनके चंगुल में फंस जाता है और उससे ऋण के 25 प्रतिशत तक की उगाही दलाल कर लेते हैं। बाद में किसान की जमीन की नीलामी की स्थिति पैदा होती है। किसानों को जागरूक करने को अभियान चलना चाहिए।

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