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देशभर में पानी की किल्लत, यूपी के इस शहर में रोजाना वाहनों की धुलाई में बह रहा 20 लाख लीटर पानी

Fri, 21 Jun 2019 07:13 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 21 Jun 2019 07:13 PM IST
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Amar Ujala Campaign: Washing of vehicles in Meerut is finish twenty lakh liters of water per day
दिल्ली चुंगी के पास डक पर गाड़ी धोने में पानी बर्बाद करता शख्स - फोटो : अमर उजाला

देशभर में जहां पानी को लेकर त्राहिमाम मचा हुआ है, वहीं दोआबा क्षेत्र के शहर मेरठ में वाहनों की धुलाई पर रोजाना करीब बीस लाख लीटर पेयजल बर्बाद किया जा रहा है। शहर में चल रहे अवैध डक (वाहन धुलाई सेंटर) पर न तो पानी को रिसाइकिल कर प्रयोग किया जाता है और न ही इनके पास नगर निगम और कैंट बोर्ड की एनओसी है। इन छोटे बड़े करीब 200 डकों पर रोजाना औसतन 6 हजार वाहनों की धुलाई की जा रही है। इसमें करीब बीस लाख लीटर पानी खर्च हो रहा है। 

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शहर में पहले वाहन कंपनियों के सर्विस सेंटर के अलावा कुछ ही प्राइवेट वाहन धुलाई सेंटर (डक) थे। लेकिन वाहनों की धुलाई में अच्छी कमाई होने के चलते अब ये डक बढ़ते जा रहे हैं। गैराज से लेकर एक छोटी सी दुकान में भी जुगाड़बाजी कर प्रेशर मशीन के जरिये वाहनों की धुलाई की जा रही है। शहर में करीब 200 डक हैं। इन डकों पर रोजाना औसतन 30 वाहनों के हिसाब से करीब 6000 वाहनों की धुलाई की जाती है। वाहन धुलाई में छोटे-बड़े वाहन पर औसतन 300 से 325 लीटर पानी खर्च होता है। इस हिसाब से 6000 वाहनों की धुलाई पर रोजाना 19 लाख 50 हजार पानी बर्बाद हो जाता है। वाहन की धुलाई में प्रयोग किया जाने वाला पानी स्वच्छ होता है और इसे रिसाइकिल नहीं किया जाता है। धुलाई के बाद ये पानी सीधा गटर में चला जाता है। 
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एनओसी, वाटर रि-साइकिल प्लांट लगाना जरूरी
नियमानुसार वाहनों की धुलाई के लिए सेंटरों को नगर निगम या कैंट बोर्ड से एनओसी लेना जरूरी है। एनओसी तभी मिलती है जब सेंटर पर वाटर रिसाइकिल सिस्टम लगा हो बिजली का उचित लोड व सुरक्षा के साधन हो, लेकिन शहर में अधिकतर सेंटर बिना एनओसी और रिसाइकिल सिस्टम के चल रहे हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी इन पर लगाम लगाने को तैयार नहीं है।

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क्लब-60 कर रहा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से जल संरक्षण
वरिष्ठ नागरिकों के क्लब-60 ने शास्त्रीनगर के एच ब्लॉक की जयहिंद सोसायटी में विशेष अभियान चलाकर कई सफल व अभिनव प्रयोग से सभी का ध्यान खींचा है। यहां के टैगोर पार्क के पेड़ों और घास की सिंचाई जहां ड्रिप इरीगेशन व स्प्रिंकलर से होती है वहीं तीन साल पहले लगाए गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिये हर साल लाखों लीटर वर्षा का जल भूगर्भ में डालकर वाटर लेवल बढ़ाने का काम हो रहा है। क्लब सदस्य हरि बिश्नोई, रमेशचंद्र रस्तोगी ने बताया कि कॉलोनी का जल स्तर बढ़ने से उत्साहित होकर टंकी के पास वाले पार्क में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की दूसरी यूनिट लगाई जा रही है। 

22 साल में बचा चुके चार लाख लीटर पानी
हरि बिश्नोई ने बताया कि एडवोकेट अनुभव गुप्ता शहर के ऐसे शख्स है जो अपनी गाड़ी में स्टॉपर, टोंटी, धागा व रिंच आदि लेकर चलते है। जहां भी नल खुला या पानी बहता देखते है तो खुद ही उसकी मरम्मत कर पानी बहना रोक देते हैं। जल संरक्षण की इस मुहिम में सुधीर शर्मा, अंतरिक्ष निर्भय, प्रकाश शर्मा, हरिमोहन मित्तल, पीडी स्वामी, पीके रस्तोगी आदि शामिल है। 

किचन, आरओ व एसी के पानी से पेड़ों की सिंचाई
हरि बिश्नोई ने बताया गृहिणी कंचन रस्तोगी किचन, आरओ और एसी के पानी का पुनरोपयोग पेड़ पौधो की सिंचाई में करके पानी की बचत करती है। इन्हें देख सोसायटी की और महिलाएं भी अब इसे अपना रही है।

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