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Meerut News: गुलाबी रात में शायरी ने ली मोहब्बत की अंगड़ाई

Sun, 27 Sep 2026 08:43 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 08:43 PM IST
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एक के बाद एक शायर ने पेश किया कलाम
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शेरों की रवानी, अल्फाज की मिठास और दाद देती महफिल। शहर की रात जब शायरी के नाम हुई तो देर रात तक वाह-वाह की गूंज फिजाओं में तैरती रही। मरहूम शायर तौफीक उल हक हक्की हाजी मेरठी की याद में सजे ऑल इंडिया मुशायरे में एक के बाद एक शायर ने अपना कलाम पेश किया। किसी ने मोहब्बत और जिंदगी के रंग बिखेरे तो किसी ने वक्त और रिश्तों की हकीकत को शेरों में ढाला।
हमखयाल फाउंडेशन के तत्वावधान और इरशाद बेताब एडवोकेट के संयोजन में ‘एक शाम तौफीक उल हक हक्की के नाम’ ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन लिसाड़ी क्षेत्र में किया गया। कार्यक्रम हाजी आदिल चौधरी की सरपरस्ती में हुआ। मुशायरे का आगाज समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी ने शमा रोशन कर किया। अध्यक्षता मशहूर अंतरराष्ट्रीय शायर विजेंद्र सिंह परवाज ने की, जबकि संचालन डॉ. फुरकान साधन ने अपने खास अंदाज में किया।
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महफिल में इरशाद बेताब ने अपने कलाम “तुझ पे सर प्यार वार दूं, जिंदगी तेरी संवार दूं” से मोहब्बत के एहसास को आवाज दी। मेहनाज श्योहारवी ने जिंदगी और रिश्तों की तल्ख हकीकत को इन अल्फाज में पेश किया, “वक्त इंसान को जब कोई सजा देता है, गैर तो गैर है अपना भी दगा देता है।” गाजियाबाद से आए अशोक पंकज ने कहा, “सितम जो मेरे दिल पे ढाए हुए हैं, वो फिर आज महफिल में आए हुए हैं।” उनके शेरों पर भी श्रोताओं ने जमकर दाद दी। वहीं देवबंद से आए हास्य शायर जहाज देवबंदी ने अपने चुटीले अंदाज से महफिल में हंसी के रंग भर दिए। वसीम राजपुरी ने सामाजिक सरोकार से जुड़े शेर पढ़ते हुए कहा, “मुश्किल में अपने आप को डाला न कीजिए, पगड़ी किसी की आप उछाला न कीजिए।” उनके कलाम पर भी महफिल से लगातार वाह-वाह की सदाएं उठती रहीं। जुनेद कांधलवी ने वक्त की फितरत को शेर में पिरोते हुए कहा, “रुकता नहीं किसी से, गुजरता जरूर है, ये वक्त की सिफत है, बदलता जरूर है।”
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आखिर में सदर-ए-मुशायरा विजेंद्र सिंह परवाज ने अपने कलाम से महफिल को यादगार बना दिया। उन्होंने पढ़ा, “रुक-रुक के बारिशों का वो मंजर नजर में है, तेरी गली नजर में, तेरा घर नजर में है। जिसकी झलक से दिल के अंधेरे चमक उठे, परवाज ऐसा नूर का पैकर नजर में है।” उनके शेरों पर देर तक दाद और तालियों की गूंज सुनाई देती रही। कार्यक्रम के समापन पर आयोजक हाजी आदिल चौधरी ने सभी मेहमानों और शायरों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान उबैद मेरठी, अब्दुल जब्बार एडवोकेट, तनसीर उल हक हक्की, इमरान चौहान, मकबूल अहमद रेमंड आदि मौजूद रहे।
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