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Meerut News: वक्त इंसान को जब कोई सजा देता है, गैर तो गैर है अपना भी दगा देता है
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... एक के बाद एक शायर ने पेश किया कलाम, वाह-वाह करते रहे श्रोता
...मरहूम तौफीक उल हक हक्की हजि मेरठी की याद में सजा ऑल इंडिया मुशायरा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
शायरी की खूबसूरत शाम सजी तो श्रोताओं पर शायरी की खुमारी छा गई। एक के बाद एक शायर ने अपना कलाम पेश किया और श्रोता देर रात तक वाह-वाह करते रहे। हमखयाल फाउंडेशन के तत्वावधान और इरशाद बेताब एडवोकेट के संयोजन में मरहूम शायर तौफीक उल हक हक्की हजि मेरठी की याद में एक शाम तौफीक उल हक हक्की के नाम ऑल इंडिया मुशायरा लिसाड़ी क्षेत्र में आयोजित किया गया। कार्यक्रम हाजी आदिल चौधरी की सरपरस्ती में हुआ।
मुशायरे का शुभारंभ समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी ने शमा रोशन करके किया। अध्यक्षता मशहूर अंतरराष्ट्रीय शायर विजेंद्र सिंह परवाज ने की, जबकि संचालन डॉ. फुरकान साधन ने बेहतरीन अंदाज में किया।
इरशाद बेताब ने पढ़ा तुझ पे सर प्यार वार दूं,जिंदगी तेरी संवार दूं। तो वही मेहनाज श्योहारवी ने अपने खास अंदाज में कहा वक्त इंसान को जब कोई सजा देता है, गैर तो गैर है अपना भी दगा देता है।
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अशोक पंकज गाजियाबाद ने अलग ही अंदाज में कहा सितम जो मेरे दिल पे ढाए हुए हैं, वो फिर आज महफिल में आए हुए हैं। देवबंद से आए हास्य शायर जहाज देवबंदी ने भी अपने अंदाज से खूब गुदगुदाया।
वसीम राजपुरी ने कहा मुश्किल में अपने आप को डाला न कीजिए, पगड़ी किसी की आप उछाला न कीजिए। हर तरफ वाह वाह का स्वर गूंजता रहा।
जुनेद कांधलवी ने पढ़ा रुकता नहीं किसी से गुजरता जरूर है,
ये वक्त की सिफत है बदलता जरूर है। अंत में अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर विजेंद्र सिंह परवाज ने अपने कलाम से समां बांध दिया। उन्होंने कहा रुक-रुक के बारिशों का वो मंजऱ नजर में है, तेरी गली नजर में, तेरा घर नजर में है। जिसकी झलक से दिल के अंधेरे चमक उठे, परवाज ऐसा नूर का पैकर नजर में है।”
कार्यक्रम के अंत में आयोजक हाजी आदिल चौधरी ने सभी मेहमानों और शायरों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान उबैद मेरठी, अब्दुल जब्बार एडवोकेट, तनसीर उल हक हक्की, इमरान चौहान, मकबूल अहमद रेमंड आदि रहे।
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...मरहूम तौफीक उल हक हक्की हजि मेरठी की याद में सजा ऑल इंडिया मुशायरा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
शायरी की खूबसूरत शाम सजी तो श्रोताओं पर शायरी की खुमारी छा गई। एक के बाद एक शायर ने अपना कलाम पेश किया और श्रोता देर रात तक वाह-वाह करते रहे। हमखयाल फाउंडेशन के तत्वावधान और इरशाद बेताब एडवोकेट के संयोजन में मरहूम शायर तौफीक उल हक हक्की हजि मेरठी की याद में एक शाम तौफीक उल हक हक्की के नाम ऑल इंडिया मुशायरा लिसाड़ी क्षेत्र में आयोजित किया गया। कार्यक्रम हाजी आदिल चौधरी की सरपरस्ती में हुआ।
मुशायरे का शुभारंभ समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी ने शमा रोशन करके किया। अध्यक्षता मशहूर अंतरराष्ट्रीय शायर विजेंद्र सिंह परवाज ने की, जबकि संचालन डॉ. फुरकान साधन ने बेहतरीन अंदाज में किया।
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इरशाद बेताब ने पढ़ा तुझ पे सर प्यार वार दूं,जिंदगी तेरी संवार दूं। तो वही मेहनाज श्योहारवी ने अपने खास अंदाज में कहा वक्त इंसान को जब कोई सजा देता है, गैर तो गैर है अपना भी दगा देता है।
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अशोक पंकज गाजियाबाद ने अलग ही अंदाज में कहा सितम जो मेरे दिल पे ढाए हुए हैं, वो फिर आज महफिल में आए हुए हैं। देवबंद से आए हास्य शायर जहाज देवबंदी ने भी अपने अंदाज से खूब गुदगुदाया।
वसीम राजपुरी ने कहा मुश्किल में अपने आप को डाला न कीजिए, पगड़ी किसी की आप उछाला न कीजिए। हर तरफ वाह वाह का स्वर गूंजता रहा।
जुनेद कांधलवी ने पढ़ा रुकता नहीं किसी से गुजरता जरूर है,
ये वक्त की सिफत है बदलता जरूर है। अंत में अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर विजेंद्र सिंह परवाज ने अपने कलाम से समां बांध दिया। उन्होंने कहा रुक-रुक के बारिशों का वो मंजऱ नजर में है, तेरी गली नजर में, तेरा घर नजर में है। जिसकी झलक से दिल के अंधेरे चमक उठे, परवाज ऐसा नूर का पैकर नजर में है।”
कार्यक्रम के अंत में आयोजक हाजी आदिल चौधरी ने सभी मेहमानों और शायरों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान उबैद मेरठी, अब्दुल जब्बार एडवोकेट, तनसीर उल हक हक्की, इमरान चौहान, मकबूल अहमद रेमंड आदि रहे।