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अलकरीम पर चला हथोड़ा, दो दुकानें जमींदोज
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Tue, 07 Feb 2017 10:55 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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घंटाघर पर निगम की दुकानों में चल रहे अलकरीम होटल पर सोमवार को निगम का हथोड़ा चल गया। पांच घंटे चले अभियान के दौरान दो दुकानों को जमींदोज किया गया। दिनभर मजिस्ट्रेट और पैरामिलिट्री फोर्स के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा। लेकिन बाकी बची दो दुकानों में अवैध निर्माण को तोड़ने की न तो एमडीए हिम्मत जुटा पा रहा है, और न ही नगर निगम।
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नगर निगम की चार दुकानों में अलकरीम होटल चल रहा है। होटल मालिक नासिर इलाही के रिश्तेदार नूर इलाही ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करके आरोप लगाया था कि निगम की दुकान संख्या 420, 421, 422 और 423 को तोड़कर अवैध तरीके से होटल बनाया गया है। दुकानों के ऊपर भी अवैध निर्माण किया गया है। जिसको लेकर पिछले वर्ष हाईकोर्ट ने डीएम, एमडीए वीसी, नगरायुक्त को न्यायालय में तलब किया था। साथ ही अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। आदेश के बाद एमडीए ने होटल की दो दुकानों के ऊपर बना निर्माण हटाया था। 31 जनवरी को भी अलकरीम होटल में तोड़फोड़ की गयी थी।
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सोमवार को मजिस्ट्रेट अतुल मिश्र के नेतृत्व में एमडीए और नगर निगम की टीम होटल पहुंची। निगम की चार दुकान और उनके ऊपर अवैध निर्माण करके बनायी गयी बिल्डिंग को ढहाने के लिए टीम लगायी गई थी। सोमवार सुबह दस बजे कार्यवाही शुरू होनी थी। मजिस्ट्रेट भी समय से पहुंच गए। लेकिन निगम और एमडीए अधिकारी दोपहर 11 बजे तक नहीं पहुंचे। इसके बाद अपर नगरायुक्त रामभरत तिवारी, संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार, दिनेश यादव निगम कर्मचारी और जेसीबी लेकर आए। एमडीए टीम दोपहर 12 बजे के बाद मौके पर पहुुंची। उसके बाद भी एमडीए अधिकारी एसपी सिटी कार्यालय में कुर्सी डालकर बैठे रहे।
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अपर नगरायुक्त ने सबसे पहले होटल की लाइट कटवाई। इससे पहले ही होटल स्वामी के लोगों ने दुकानों से सामान निकालना और तोड़ना शुरू कर दिया था। नगर निगम ने जैसे ही बुलडोजर लगाया तो होटल मालिक ने विरोध कर दिया। साथ ही हाथ से ही तोड़ने की बात कही। जिस पर नगर निगम अधिकारी संतुष्ट हो गए। निगम की दुकानों पर हथोड़ा चलता रहा। शाम पांच बजे तक दोनों दुकानें जमीदोज हो गईं। इसके बाद होटल का बिजली कनेक्शन जुड़वा दिया गया।
एमडीए के पीछे चलेगा निगम
होटल की बाकी बची दो दुकानों में किए गए अवैध निर्माण को तोड़ने की जिम्मेदारी एमडीए की है। यानी साफ हो गया है कि नगर निगम की टीम अब आगे नहीं, बल्कि एमडीए के पीछे चलेगी। नगरायुक्त देवेंद्र कुमार कुशवाहा का कहना है कि निगम ने दुकानें तोड़ दी हैं। बाकी कार्य एमडीए ही करेगा।
दुकानें तोड़ने से निगम को भी नुकसान
नगर निगम प्रशासन चाहता तो दोनों दुकानों पर कब्जा लेकर नई दर पर किसी को भी आवंटित कर सकता था। अब दुकानों को दोबारा बनाने में तो रुपया लगेगा ही, इससे प्राप्त होने वाले लाखों के राजस्व का भी नुकसान होगा।