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शराब माफियाओं के लिए वरदान बनी जांच की लचर प्रक्रिया
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मेरठ। अवैध शराब पर प्रभावी अंकुश लगाने की बात अक्सर कही जाती है लेकिन शराब से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी के साथ काम नहीं किया जाता है। अवैध, नकली और जहरीली शराब से मौत की घटनाओं में जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। साथ ही बिसरा जांच प्राथमिकता के आधार पर नहीं होने के कारण आरोपी महीनों तक खुलेआम घूमते रहते हैं।
केस एक:
रोहटा के डूंगर गांव में 19 जुलाई को अवैध शराब पीने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस और आबकारी विभाग पर सवाल उठने लगे तो बिसरा जांच के लिए भेजने का हवाला देकर प्रशासन ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। चार माह बीतने वाले हैं लेकिन बिसरा रिपोर्ट न मिलने के कारण पीड़ित परिवार न्याय से वंचित हैं।
केस दो:
जानी ब्लॉक के मीरपुर जखेड़ा में 9 सितंबर को शराब पीने से तीन लोगों की मौत हुई। अवैध और नकली शराब का मुद्दा गरमाया। विपक्ष ने सरकार को घेरने का काम किया। इस मामले में भी पुलिस और आबकारी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर की पुष्टि न होने का हवाला देकर खुद को क्लीन चिट दी। बिसरा की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
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दोनों मामलों में जांच चल रही है। कई लोग जेल भी भेजे गए थे। बिसरा जांच के लिए समय निर्धारित है। बिसरा रिपोर्ट के बाद ही कुछ स्पष्ट होगा।
- राजेंद्र प्रसाद शाही, सीओ सरधना
पोस्टमार्टम में जहर की पुष्टि नही होती है। बिसरा जांच में ही खुलासा होता है। बिसरा जांच की रिपोर्ट कब तक आएगी, यह पुलिस ही बता सकती है।
- आलोक कुमार, जिला आबकारी अधिकारी
कार्रवाई के बाद खादर क्षेत्र में बंद हुई कच्ची शराब की आपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब के खिलाफ पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित हो गई है। इसके चलते क्षेत्र में कच्ची शराब के रेट दोगुने तक हो गए हैं।
खादर क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब माफिया का बोलबाला है। यहां बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का धंधा चलता है, जिसे रोकने में स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग भी नाकाम साबित होता है। थाना पुलिस ने बृहस्पतिवार को लतीफपुर सहित तारापुर के समीप बूढ़ी गंगा के जंगल में लगभग 6 हजार लीटर लहन नष्ट कर छह भट्टियों को नष्ट कर दिया था। शुक्रवार को आबकारी विभाग ने भी क्षेत्र में छापा मारा था। इसके बाद शराब माफिया पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। इससे शराब का उत्पादन और बिक्री दोनों प्रभावित हुए है। नतीजतन, सौ रुपये लीटर मिलने वाली कच्ची शराब अब दो सौ रुपये लीटर मिल रही है? यही नहीं, कच्ची शराब के लिए लोग शाम को जंगलों और गांवों के आसपास भटकते देखे जा रहे हैं।
अच्छा मुनाफा है इस कारोबार में
अवैध कारोबार से जुड़े लोगो ने बताया कि शराब में कम लागत पर अधिक मुनाफा मिलता है। एक किलो गुड़ से एक बोतल शराब तैयार हो जाती है। और दस रुपये की एलपीजी फुक जाती है उसके बाद एक बोतल सौ रुपये में बिकती है। शराब कारोबारी पचास रुपये की लागत से तैयार एक बोतल सौ से दो सौ रुपये में बेची जाती है।
जमीन में दबाकर रखते हैं शराब
लहन और शराब को जमीन के अंदर दबाकर रखा जाता है। इसका कारण शराब को लंबे समय तक सुरक्षित और पुलिस से बचाने के लिए लहन और शराब को खेतों के साथ सड़कों के किनारे गड्ढों में दबा दिया जाता है।
जानी क्षेत्र में फिर फलने-फूलने लगा धंधा
संवाद न्यूज एजेंसी
जानीखुर्द। जानी क्षेत्र में कोई कोना नहीं है, जहां अवैध शराब का कारोबार नहीं होता है। क्षेत्र का गांव मीरपुर जखेड़ा एक माह पूर्व जहरीली शराब पीने से तीन युवकों की मौत के बाद चर्चा में आया था। उस समय पुलिस की कार्रवाई से अवैध शराब का कारोबार करने वाले ज्यादातर लोग क्षेत्र छोडकर अन्य जगह चले गए लेकिन अब कारोबार दोबारा फलने-फूलने लगा है।
जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेन्द्र कुसैड़ी के अनुसार क्षेत्र में अनेक गांव हैं, जहां वर्षो से अवैध शराब का कारोबार होता आ रहा है। जानी ग्राम प्रधान हरिओम के अनुसार अवैध शराब का कारोबार चुनाव और त्योहारों पर बढ़ जाता है। दूसरी ओर जानी थाना प्रभारी ऋषिपाल सिंह कहते हैं कि एक माह में बड़ी मात्रा में अवैध शराब के साथ 15 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
अवैध कारोबार में मोटा मुनाफा
जानी क्षेत्र में अवैध शराब हरियाणा से आती है। अवैध शराब मेरठ के बॉर्डर तक रात के अंधेरे में ट्रैक्टर, सब्जी या अन्य सामान के ट्रकों में लाई जाती है। मेरठ-बागपत बॉर्डर पर स्थित हिंडन नदी के किनारे पर स्थित खेतों और नलकूपों के कमरों में हरियाणा से अवैध शराब लाकर स्टाक किया जाता है। ऑर्डर पर आगे भेज दी जाती है। हरियाणा से देशी शराब का एक पव्वा 12 रुपये में आता है। इसके बाद मेरठ में इसे 22-23 रुपये में बेच दिया जाता है। ग्राहकों को यही पव्वा 50 से 70 रुपये में बेचा जाता है।
गावों में अवैध शराब हर समय उपलब्ध
सरकारी ठेके सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक खुलते हैं। वही सरकारी ठेकों पर अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर शराब बेची जाती है। शिकायत के बाद भी आबकरी विभाग ठेके मालिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है। गांवों में बिकने वाली अवैध शराब हर समय पीने वालों को मिल जाती है। वहीं गांवों में अवैध शराब सरकारी ठेकों पर बिकने वाली शराब से सस्ती मिलती है।
नहीं होती है कठोर कार्रवाई
वर्तमान कानून में कच्चा शराब बनाने में पकड़े जाने पर कठोर सजा का प्रावधान नहीं है। अवैध शराब पकड़े जाने पर पुलिस दो धाराओं में कार्रवाई करती है। अगर पकड़ी गई अवैध शराब उत्तर प्रदेश की बनी है तो दफा 60 लगाई जाती है। वहीं अगर पकड़ी गई अवैध शराब दूसरे प्रदेश की बनी है तो दफा 63 लगाई जाती है। दफा 60 में आरोपी को तुरंत जमानत मिल जाती है।
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केस एक:
रोहटा के डूंगर गांव में 19 जुलाई को अवैध शराब पीने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस और आबकारी विभाग पर सवाल उठने लगे तो बिसरा जांच के लिए भेजने का हवाला देकर प्रशासन ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। चार माह बीतने वाले हैं लेकिन बिसरा रिपोर्ट न मिलने के कारण पीड़ित परिवार न्याय से वंचित हैं।
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जानी ब्लॉक के मीरपुर जखेड़ा में 9 सितंबर को शराब पीने से तीन लोगों की मौत हुई। अवैध और नकली शराब का मुद्दा गरमाया। विपक्ष ने सरकार को घेरने का काम किया। इस मामले में भी पुलिस और आबकारी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर की पुष्टि न होने का हवाला देकर खुद को क्लीन चिट दी। बिसरा की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
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दोनों मामलों में जांच चल रही है। कई लोग जेल भी भेजे गए थे। बिसरा जांच के लिए समय निर्धारित है। बिसरा रिपोर्ट के बाद ही कुछ स्पष्ट होगा।
- राजेंद्र प्रसाद शाही, सीओ सरधना
पोस्टमार्टम में जहर की पुष्टि नही होती है। बिसरा जांच में ही खुलासा होता है। बिसरा जांच की रिपोर्ट कब तक आएगी, यह पुलिस ही बता सकती है।
- आलोक कुमार, जिला आबकारी अधिकारी
कार्रवाई के बाद खादर क्षेत्र में बंद हुई कच्ची शराब की आपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब के खिलाफ पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित हो गई है। इसके चलते क्षेत्र में कच्ची शराब के रेट दोगुने तक हो गए हैं।
खादर क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब माफिया का बोलबाला है। यहां बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का धंधा चलता है, जिसे रोकने में स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग भी नाकाम साबित होता है। थाना पुलिस ने बृहस्पतिवार को लतीफपुर सहित तारापुर के समीप बूढ़ी गंगा के जंगल में लगभग 6 हजार लीटर लहन नष्ट कर छह भट्टियों को नष्ट कर दिया था। शुक्रवार को आबकारी विभाग ने भी क्षेत्र में छापा मारा था। इसके बाद शराब माफिया पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। इससे शराब का उत्पादन और बिक्री दोनों प्रभावित हुए है। नतीजतन, सौ रुपये लीटर मिलने वाली कच्ची शराब अब दो सौ रुपये लीटर मिल रही है? यही नहीं, कच्ची शराब के लिए लोग शाम को जंगलों और गांवों के आसपास भटकते देखे जा रहे हैं।
अच्छा मुनाफा है इस कारोबार में
अवैध कारोबार से जुड़े लोगो ने बताया कि शराब में कम लागत पर अधिक मुनाफा मिलता है। एक किलो गुड़ से एक बोतल शराब तैयार हो जाती है। और दस रुपये की एलपीजी फुक जाती है उसके बाद एक बोतल सौ रुपये में बिकती है। शराब कारोबारी पचास रुपये की लागत से तैयार एक बोतल सौ से दो सौ रुपये में बेची जाती है।
जमीन में दबाकर रखते हैं शराब
लहन और शराब को जमीन के अंदर दबाकर रखा जाता है। इसका कारण शराब को लंबे समय तक सुरक्षित और पुलिस से बचाने के लिए लहन और शराब को खेतों के साथ सड़कों के किनारे गड्ढों में दबा दिया जाता है।
जानी क्षेत्र में फिर फलने-फूलने लगा धंधा
संवाद न्यूज एजेंसी
जानीखुर्द। जानी क्षेत्र में कोई कोना नहीं है, जहां अवैध शराब का कारोबार नहीं होता है। क्षेत्र का गांव मीरपुर जखेड़ा एक माह पूर्व जहरीली शराब पीने से तीन युवकों की मौत के बाद चर्चा में आया था। उस समय पुलिस की कार्रवाई से अवैध शराब का कारोबार करने वाले ज्यादातर लोग क्षेत्र छोडकर अन्य जगह चले गए लेकिन अब कारोबार दोबारा फलने-फूलने लगा है।
जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेन्द्र कुसैड़ी के अनुसार क्षेत्र में अनेक गांव हैं, जहां वर्षो से अवैध शराब का कारोबार होता आ रहा है। जानी ग्राम प्रधान हरिओम के अनुसार अवैध शराब का कारोबार चुनाव और त्योहारों पर बढ़ जाता है। दूसरी ओर जानी थाना प्रभारी ऋषिपाल सिंह कहते हैं कि एक माह में बड़ी मात्रा में अवैध शराब के साथ 15 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
अवैध कारोबार में मोटा मुनाफा
जानी क्षेत्र में अवैध शराब हरियाणा से आती है। अवैध शराब मेरठ के बॉर्डर तक रात के अंधेरे में ट्रैक्टर, सब्जी या अन्य सामान के ट्रकों में लाई जाती है। मेरठ-बागपत बॉर्डर पर स्थित हिंडन नदी के किनारे पर स्थित खेतों और नलकूपों के कमरों में हरियाणा से अवैध शराब लाकर स्टाक किया जाता है। ऑर्डर पर आगे भेज दी जाती है। हरियाणा से देशी शराब का एक पव्वा 12 रुपये में आता है। इसके बाद मेरठ में इसे 22-23 रुपये में बेच दिया जाता है। ग्राहकों को यही पव्वा 50 से 70 रुपये में बेचा जाता है।
गावों में अवैध शराब हर समय उपलब्ध
सरकारी ठेके सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक खुलते हैं। वही सरकारी ठेकों पर अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर शराब बेची जाती है। शिकायत के बाद भी आबकरी विभाग ठेके मालिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है। गांवों में बिकने वाली अवैध शराब हर समय पीने वालों को मिल जाती है। वहीं गांवों में अवैध शराब सरकारी ठेकों पर बिकने वाली शराब से सस्ती मिलती है।
नहीं होती है कठोर कार्रवाई
वर्तमान कानून में कच्चा शराब बनाने में पकड़े जाने पर कठोर सजा का प्रावधान नहीं है। अवैध शराब पकड़े जाने पर पुलिस दो धाराओं में कार्रवाई करती है। अगर पकड़ी गई अवैध शराब उत्तर प्रदेश की बनी है तो दफा 60 लगाई जाती है। वहीं अगर पकड़ी गई अवैध शराब दूसरे प्रदेश की बनी है तो दफा 63 लगाई जाती है। दफा 60 में आरोपी को तुरंत जमानत मिल जाती है।