वायुसेना दिवस: पूर्व सैनिकों के दिल में कायम है देशसेवा का जज्बा; कारगिल से मिसाइल मिशन तक याद किए अनुभव
वायुसेना दिवस पर मेरठ में रह रहे पूर्व वायु सैनिकों ने सेवा के दौरान के अनुभव साझा किए। किसी ने कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर की जिम्मेदारी याद की तो किसी ने इजराइल और रूस में मिसाइल खरीद से जुड़े मिशन के अनुभव बताए।
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आसमान की ऊंचाइयों से देश की सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा करने वाली भारतीय वायुसेना का गौरव उसके जवानों के दिल में हमेशा कायम रहता है। 8 अक्तूबर को मनाए जाने वाले वायुसेना दिवस पर मेरठ में रह रहे पूर्व वायु सैनिकों ने सेवा के दौरान के अनुभव साझा किए। किसी ने कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में निभाई जिम्मेदारी को याद किया तो किसी ने इजराइल और रूस में मिसाइल खरीद से जुड़े महत्वपूर्ण मिशन का अनुभव बताया।
मिसाइल मिशन ने सिखाई जिम्मेदारी
भारतीय वायुसेना में सेवाओं के लिए वर्ष 2001 में एयर ऑफिसर-इन-चार्ज-इन-चीफ कमेंडेशन और वर्ष 2007 में एयर चीफ कमेंडेशन मिला। इजराइल और रूस में मिसाइलों की खरीद से जुड़े राजनयिक मिशनों में संयुक्त निदेशक के रूप में जिम्मेदारी निभाई। सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सैनिकों से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। - ग्रुप कैप्टन अरुण चौधरी, सेवानिवृत्त
कारगिल की यादें करती हैं भावुक
वर्ष 1995 में डीआरडीओ तिमारपुर में आपदा प्रबंधन के दौरान भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने का अवसर मिला। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेवा की भूमिका निभाई। -एयर वेटरन डॉ. हरेंद्र चौधरी
वर्ष 1983 में वायुसेना में शामिल हुए और करीब 20 वर्षों तक ग्राउंड रडार, आईएल-76 और एएन-12 जैसे एयरक्राफ्ट सिस्टम पर काम किया। वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद दिल्ली मेट्रो और फिर केंद्रीय विद्यालय संगठन में करीब 20 वर्षों तक शिक्षक रहे। आज भी रोजाना करीब 10 किलोमीटर दौड़ते हैं। -एयर वेटरन राजेंद्र सिंह यादव
वर्ष 1985 से 2005 तक वायुसेना में सेवा की। मिसाइल और यूएवी स्क्वाड्रन में काम करते हुए दिन-रात सतर्कता और टीम भावना के अनुभव आज भी याद हैं। वायुसेना ने मुझे सिर्फ करियर नहीं दिया, बल्कि ऐसी जीवनशैली दी जिसमें देश सबसे पहले, टीम उसके बाद और स्वयं सबसे अंत में आता है। -जूनियर वारंट ऑफिसर सेवानिवृत्त सतेंद्र कुमार वर्मा