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भाकियू: टिकैत की वो रात... जब आंसुओं को देख भावुक हुए थे चौधरी अजित, एक एलान पर फिर खचाखच भर गया था गाजीपुर बॉर्डर

Sat, 20 Nov 2021 10:30 AM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 20 Nov 2021 10:30 AM IST
सार

जब 27 जनवरी को गिरफ्तारी के लिए पहुंचे भारी पुलिस बल को देखकर मीडिया से बात करते हुए चौधरी राकेश टिकैत भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक उठे। इसके बाद चौधरी अजित सिंह ने भाकियू को समर्थन का एलान किया था।

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Agriculture law update news: When Chaudhary Ajit Singh made a big announcement in support of Rakesh Tikait and Bhakiyu
राकेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड में लाल किला पर हुई भारी हिंसा के बाद कमजोर पड़े किसान आंदोलन को अगले दिन 27 जनवरी की शाम को उस वक्त बल मिला जब पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह ने राकेश टिकैत को फोन कर अपना पूर्ण समर्थन देते हुए धरने पर ही डटे रहने को कहा। इसके बाद उन्होंने इस बारे में ट्वीट भी किया। मीडिया में चौधरी अजित सिंह द्वारा साथ आने की खबर चलते ही किसानों का हुजूम गाजीपुर बॉर्डर की तरफ उमड़ पड़ा और रात एक बजे तक गाजीपुर बॉर्डर फिर से आबाद हो गया। इसके बाद किसान आंदोलन न केवल बढ़ता गया बल्कि राकेश टिकैत भी किसान आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे। 

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तीनों कृषि कानूनों के विरोध में 2020 से चल रहा गाजीपुर बॉर्डर आंदोलन 26 जनवरी 2021 को ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किला हिंसा के बाद खत्म होने लगा था। कई किसान संगठन भी गाजीपुर बॉर्डर से वापस लौट गए थे। भाकियू कार्यकर्ता और किसान भी अपने घरों को लौटने लगे थे। शाम तक बॉर्डर पर कुछ संख्या में ही किसान बाकी बचे थे। इस बीच गिरफ्तारी के लिए पहुंचे भारी पुलिस बल को देखकर मीडिया से बात करते हुए चौधरी राकेश टिकैत भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक उठे। यह देख पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय चौधरी अजित सिंह से रहा नहीं गया और उन्होंने टिकैत को फोन कर समर्थन का एलान कर दिया और कहा कि वह धरने से उठे नहीं वे उनके साथ हैं। 
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ये चौधरी अजित सिंह की ही हुंकार का असर था कि घटना के कुछ घंटे बाद ही किसानों की भारी भीड़ बॉर्डर पर पहुंचना शुरू हो गई थी। रात एक बजे तक गाजीपुर बॉर्डर फिर से किसानों की भारी भीड़ से आबाद हो गया था। इस घटनाक्रम के बाद राकेश टिकैत न केवल देश में किसान आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे बल्कि भाकियू का भी तेजी से विस्तार हो रहा है।

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