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मौसम की सटीक सूचनाओं से बेहतर होगा कृषि विकास : गोरोशी

Tue, 23 Jun 2026 08:26 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 08:26 PM IST
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Agricultural development will improve with accurate weather information: Goroshi
- कृषि विवि में मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोदीपुरम। बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों के बीच किसानों तक सटीक एवं समयबद्ध मौसम आधारित संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को शुभारंभ हुआ। यह 25 जून तक चलेगा। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए कृषि मौसम वैज्ञानिक और तकनीकी अधिकारी भाग ले रहे हैं।
मुख्य अतिथि आईएमडी नई दिल्ली के एग्रोमेट एडवाइजरी सर्विसेज प्रभाग प्रमुख डॉ. शेषा कुमार गोरोशी ने कहा कि किसानों को मौसम जनित जोखिमों से बचाने के लिए मौसम के पूर्वानुमान, सटीक विश्लेषण और आगामी चुनौतियों के लिए तैयार होने के लिए प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इससे जोखिम कम करने और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान को किसानों के हित में उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मौसम की सटीक सूचनाओं से कृषि विकास बेहतर होगा।
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अध्यक्षता कर रहे डीन एजी डॉ विवेक धामा ने कहा कि कृषि और मौसम विज्ञान का समन्वय ही जलवायु-स्मार्ट कृषि की आधारशिला है। अधिष्ठाता स्नातकोत्तर डॉ डीके सिंह और निदेशक प्लेसमेंट डॉ. आरएस सेंगर ने भी खेती-किसानी में मौसम परामर्श सेवाओं का महत्व बताया।
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विवि के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि कृषि मौसम सेवाओं का सुदृढ़ीकरण खेती की लागत कम करने और कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है। उन्होंने भारत मौसम विज्ञान विभाग और विश्वविद्यालय के बीच इस सहयोगात्मक पहल की सराहना की। कृषि मौसम सेवा जीकेएमएस के नोडल अधिकारी एवं मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. यूपी शाही ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से 30 प्रतिभागी शामिल हुए हैं।

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उन्नत उपकरणों से बेहतर अनुमान पर दिया जोर
प्रशिक्षण में उन्नत उपकरणों का प्रयोग कर मौसम का बेहतर अनुमान लगाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में कृषि मौसम बुलेटिन निर्माण निर्णय सहायता प्रणाली डीएसएस प्रभाव आधारित पूर्वानुमान, उन्नत एग्रोमेट उपकरणों के उपयोग और स्थान-विशिष्ट किसान परामर्श जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवसर पर आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष मिश्रा, डॉ. लता विश्नोई और डॉ. प्रियंका सिंह ने भी तकनीकी विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, शिक्षक एवं शोधार्थी मौजूद रहे।
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