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पिता के बाद बेटे ने भी ली अंतिम सांस
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पिता के बाद बेटे ने भी ली अंतिम सांस
मेरठ। कोरोना के चलते एक दिन पहले पिता की मौत के बाद बृहस्पतिवार को बेटे की भी सांसों की डोर टूट गई। दो दिन के अंदर पिता-पुत्र परिवार को रोता बिलखता छोड़ गए।
दिल्ली रोड की पंजाबीपुरा कॉलोनी निवासी संदीप दरगन को एक पखवाड़ा पूर्व कोरोना के चलते सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके तीन दिन बाद कोरोना पॉजिटिव हुए उनके पिता विनोद दरगन को भी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। बुधवार सुबह विनोद दरगन कोरोना से जंग हार गए। परिजनों ने सूरजकुंड शमशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया। अभी उनकी चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे उनके बेटे संदीप दरगन की भी सांसों की डोर टूट गई। संदीप की मां, पत्नी और दो बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दुख की इस घड़ी में पूरे पंजाबीपुरा में शोक की लहर दौड़ गई। पड़ोसी विरेंद्र जैन उर्फ बिल्लू ने बताया कि पूरा परिवार धार्मिक प्रवृत्ति का था और हर किसी के दुख दर्द में हर समय खड़े रहते थे। पिता-पुत्र की मौत से सभी को गहरा सदमा लगा है।
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मेरठ। कोरोना के चलते एक दिन पहले पिता की मौत के बाद बृहस्पतिवार को बेटे की भी सांसों की डोर टूट गई। दो दिन के अंदर पिता-पुत्र परिवार को रोता बिलखता छोड़ गए।
दिल्ली रोड की पंजाबीपुरा कॉलोनी निवासी संदीप दरगन को एक पखवाड़ा पूर्व कोरोना के चलते सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके तीन दिन बाद कोरोना पॉजिटिव हुए उनके पिता विनोद दरगन को भी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। बुधवार सुबह विनोद दरगन कोरोना से जंग हार गए। परिजनों ने सूरजकुंड शमशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया। अभी उनकी चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे उनके बेटे संदीप दरगन की भी सांसों की डोर टूट गई। संदीप की मां, पत्नी और दो बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दुख की इस घड़ी में पूरे पंजाबीपुरा में शोक की लहर दौड़ गई। पड़ोसी विरेंद्र जैन उर्फ बिल्लू ने बताया कि पूरा परिवार धार्मिक प्रवृत्ति का था और हर किसी के दुख दर्द में हर समय खड़े रहते थे। पिता-पुत्र की मौत से सभी को गहरा सदमा लगा है।
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