लोकसभा के बाद तीन तलाक बिल राज्यसभा में पारित होने पर सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली अधिवक्ता फरहा फैज का कहना है कि फतवों के डर से मुक्त हो गई हैं मुस्लिम महिलाएं। अब किसी की दादागीरी नहीं, बल्कि कानून का राज चलेगा। अगली स्लाइडों में जानिए पूरा अपडेट-
सहारनपुर के प्रतापनगर निवासी अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि तीन तलाक के खिलाफ वह करीब 10 साल से लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन 2015 में उन्होंने पीआईएल दाखिल की थी। इसके बाद तीन तलाक के खिलाफ कानूनी तौर पर लड़ाई लड़ती रहीं। होलीं, मेरा विरोध भी खूब हुआ, लेकिन मैं घबराई नहीं। मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए संघर्ष करती रही।
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महिलाओं को मिठाई खिलातीं फरहा फैज
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उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने के लिए कहा था, लेकिन पूर्व में लोकसभा में बिल पास होने के बाद राज्यसभा में पास नहीं हो सका था। उस दौरान भी एक बार यह लगा था कि अब दोबारा बिल कैसे पास होगा, क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल की मुखालफत करने वाले भी खड़े हो रहे थे। बावजूद इसके उन्हें उम्मीद थी कि देश की बड़ी संख्या में तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को इंसाफ जरूर मिलेगा। आखिर वह दिन आ गया, जब कई साल का संघर्ष अपने मुकाम पर पहुंच गया।
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तीन तलाक बिल
- फोटो : SELF
उन्होंने कहा कि लोकसभा के बाद राज्यसभा में बिल पास होने पर केंद्र सरकार बधाई की पात्र है क्योंकि केंद्र सरकार ने जो हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में लगाया था, उसी से तीन तलाक के खिलाफ बिल लाए जाने का रास्ता साफ हुआ।
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अधिवक्ता फरहा फैज
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मेरे ऊपर हमला तक हुआ, पर घबराई नहीं : फरहा
अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की राह में काफी अड़चनें भी आईं। यहां तक कि उनके ऊपर हमला भी किया गया। 2016 में दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से जब वह ट्रेन से सहारनपुर आ रही थीं, तो ट्रेन में सवार युवकों ने उन पर जानलेवा हमला किया था।