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मूर्ति को जीवंत करने की प्रक्रिया है अधिवास : आचार्य कौशल
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- त्रिनेत्र धाम मंदिर में चल रहा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बिजली बंबा बाईपास रोड स्थित दि ग्रैंड डे सोसायटी में चल रहे पंच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह के तीसरे दिन यजमानों ने यज्ञ अनुष्ठान कार्यक्रम में हिस्सा लिया। आचार्य कौशल वत्स ने कहा कि पूजन के बाद प्राण प्रतिष्ठा में विराजमान मूर्तियों का पुष्पाधिवास, धूपाधिवास और वस्त्राधिवास कराया गया। उन्होंने कहा कि अधिवास दैव्य मूर्ति को जीवंत करने की प्रक्रिया है।
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि पुष्पाधिवास में सभी भगवान की देव मूर्तियों को सात प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से अधिवास किया गया। प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का यह प्रमुख चरण है। इसमें मूर्ति को सुगंधित द्रव्यों, अगरबत्ती, धूप, इत्र और चंदन के बीच रखा जाता है। यह प्रक्रिया मूर्ति को पवित्र, दिव्य और जीवंत बनाने के लिए होती है। जो अधिवास के विभिन्न प्रकारों में से एक है। यह प्रक्रिया मूर्ति को उपासकों की प्रार्थना सुनने और वरदान देने में सक्षम बनाती है।
आचार्य ने बताया कि अधिवास की प्रक्रिया वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न कराई गई। महोत्सव के तहत प्रतिदिन मंडप में संध्या आरती के समय में महिलाओं द्वारा संगीतमय भजन कीर्तन किया जा रहा है। अंत में महाआरती के साथ प्रसाद वितरित किया गया। दूसरे दिन मुख्य यजमान मुकेश अग्रवाल, जितेंद्र शर्मा, गौरव, दिनेश कंसल, दिनेश शर्मा, अमित सिंघल, सोमांक रस्तोगी और सोनिया शर्मा रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बिजली बंबा बाईपास रोड स्थित दि ग्रैंड डे सोसायटी में चल रहे पंच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह के तीसरे दिन यजमानों ने यज्ञ अनुष्ठान कार्यक्रम में हिस्सा लिया। आचार्य कौशल वत्स ने कहा कि पूजन के बाद प्राण प्रतिष्ठा में विराजमान मूर्तियों का पुष्पाधिवास, धूपाधिवास और वस्त्राधिवास कराया गया। उन्होंने कहा कि अधिवास दैव्य मूर्ति को जीवंत करने की प्रक्रिया है।
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि पुष्पाधिवास में सभी भगवान की देव मूर्तियों को सात प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से अधिवास किया गया। प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का यह प्रमुख चरण है। इसमें मूर्ति को सुगंधित द्रव्यों, अगरबत्ती, धूप, इत्र और चंदन के बीच रखा जाता है। यह प्रक्रिया मूर्ति को पवित्र, दिव्य और जीवंत बनाने के लिए होती है। जो अधिवास के विभिन्न प्रकारों में से एक है। यह प्रक्रिया मूर्ति को उपासकों की प्रार्थना सुनने और वरदान देने में सक्षम बनाती है।
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आचार्य ने बताया कि अधिवास की प्रक्रिया वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न कराई गई। महोत्सव के तहत प्रतिदिन मंडप में संध्या आरती के समय में महिलाओं द्वारा संगीतमय भजन कीर्तन किया जा रहा है। अंत में महाआरती के साथ प्रसाद वितरित किया गया। दूसरे दिन मुख्य यजमान मुकेश अग्रवाल, जितेंद्र शर्मा, गौरव, दिनेश कंसल, दिनेश शर्मा, अमित सिंघल, सोमांक रस्तोगी और सोनिया शर्मा रहे।
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