{"_id":"6057a4b98ebc3eda727e2dce","slug":"achievement-of-moksha-only-through-devotion-to-god-bhavya-bhushan-mawana-news-mrt531067612","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान की भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति : भव्य भूषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान की भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति : भव्य भूषण
विज्ञापन
भगवान की भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति : भव्य भूषण
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में मुनि 108 भाव भूषण महाराज एवं चिन्मयमती माता ससंघ विराजमान हैं। मुनिश्री के सानिध्य में फाल्गुन अष्टान्हिका महापर्व पर श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। मुख्य वेदी में अभिषेक के पश्चात विधान का ध्वजारोहण किया गया। पाठ एवं ध्वजारोहण का सौभाग्य उमेश जैन, राजबाला जैन को प्राप्त हुआ। नंदीश्वरद्वीप जिनालय में जाप्य अनुष्ठान के उपरांत जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया गया।
श्री पंचमेरू नंदीश्वर जिनालय में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान में शांतिधारा का सौभाग्य उमेश जैन, राजबाला जैन, पंकज जैन को मिला। विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य पंकज जैन, द्वीपमाला जैन, कुबेर, इंद्र, उमेश जैन, यज्ञनायक विपिन जैन, मोनिका जैन, कार्यक्रम का द्वीप प्रज्ज्वलन आदर्श जैन ने किया। मुख्य मंगल कलश प्रद्युम्न कुमार जैन, मनोरमा जैन, विपिन जैन ने विराजमान किया। अष्टमंगल द्रव्य एवं अष्टप्रातिहार्य विराजमान करने का सौभाग्य शशि, शिखा, कमला बाई, सुशीला, विपिन, मोनिका, अनंतवीर, राजमाला, संगीता, मनोरमा को प्राप्त हुआ।
मुनिश्री भव्य भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि अपने अंतरंग से भावपूर्ण भावना के साथ धार्मिक कार्य करने से पुण्य का संचय होता है। प्रभु के मंगल आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। तभी मनुष्य सुख-शांति को प्राप्त करता है। भगवान की भक्ति से ही जीव मोक्ष की प्राप्ति करता है। आज व्यक्ति अपने हित को छोड़कर दूसरों के अहित में लगा हुआ है।
विज्ञापन
शास्त्र सभा, प्रवचन, संगीतमय महाआरती और भजन संध्या, प्रश्नमंत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन सराफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन, आदि रहे। महाप्रबंधक मुकेश जैन, अशोक जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल जैन का सहयोग रहा।
‘मनुष्यत्व का जन्म होना जरूरी’
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तांबर विधान एवं पाठ के 34वें दिन रविवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। जिसमें स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य नरेंद्र, शांतिधारा करने का सौभाग्य चंदन, सक्षम, नरेंद्र, अनिल को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन शशि व क्षमा ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तांबर विधान का शुभारंभ हुआ, जिसमें आयोजन 151 परिवारों ने कराया।
गुरुवर 108 भावभूषण मुनिराज ने कहा कि इस धरा पर जन्म लेने के बाद अब तक तुमने पाया ही पाया है। खोया कुछ भी नहीं। मनुष्य रूप में जन्म तो लिया, पर मनुष्यत्व का जन्म नहीं हुआ। आज यह भाव जागृत कर लेना कि मेरा जीवन मेरे तक ही सीमित न रहे, वह दूसरों के काम भी आ सके। इस विधान का विसर्जन मनोरमा, मुकेश ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मधु व अनिल ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन विजय ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन अनिल ने किया। इस मौके पर अध्यक्ष विनोद, महामंत्री मुकेश, कोषाध्यक्ष राजेंद्र, सह संयोजक मोतीलाल, कुणाल आदि का सहयोग रहा।
विज्ञापन
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में मुनि 108 भाव भूषण महाराज एवं चिन्मयमती माता ससंघ विराजमान हैं। मुनिश्री के सानिध्य में फाल्गुन अष्टान्हिका महापर्व पर श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। मुख्य वेदी में अभिषेक के पश्चात विधान का ध्वजारोहण किया गया। पाठ एवं ध्वजारोहण का सौभाग्य उमेश जैन, राजबाला जैन को प्राप्त हुआ। नंदीश्वरद्वीप जिनालय में जाप्य अनुष्ठान के उपरांत जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया गया।
श्री पंचमेरू नंदीश्वर जिनालय में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान में शांतिधारा का सौभाग्य उमेश जैन, राजबाला जैन, पंकज जैन को मिला। विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य पंकज जैन, द्वीपमाला जैन, कुबेर, इंद्र, उमेश जैन, यज्ञनायक विपिन जैन, मोनिका जैन, कार्यक्रम का द्वीप प्रज्ज्वलन आदर्श जैन ने किया। मुख्य मंगल कलश प्रद्युम्न कुमार जैन, मनोरमा जैन, विपिन जैन ने विराजमान किया। अष्टमंगल द्रव्य एवं अष्टप्रातिहार्य विराजमान करने का सौभाग्य शशि, शिखा, कमला बाई, सुशीला, विपिन, मोनिका, अनंतवीर, राजमाला, संगीता, मनोरमा को प्राप्त हुआ।
विज्ञापन
मुनिश्री भव्य भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि अपने अंतरंग से भावपूर्ण भावना के साथ धार्मिक कार्य करने से पुण्य का संचय होता है। प्रभु के मंगल आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। तभी मनुष्य सुख-शांति को प्राप्त करता है। भगवान की भक्ति से ही जीव मोक्ष की प्राप्ति करता है। आज व्यक्ति अपने हित को छोड़कर दूसरों के अहित में लगा हुआ है।
विज्ञापन
शास्त्र सभा, प्रवचन, संगीतमय महाआरती और भजन संध्या, प्रश्नमंत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर क्षेत्र के महामंत्री मुकेश जैन सराफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन, आदि रहे। महाप्रबंधक मुकेश जैन, अशोक जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल जैन का सहयोग रहा।
‘मनुष्यत्व का जन्म होना जरूरी’
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तांबर विधान एवं पाठ के 34वें दिन रविवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया। जिसमें स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य नरेंद्र, शांतिधारा करने का सौभाग्य चंदन, सक्षम, नरेंद्र, अनिल को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन शशि व क्षमा ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तांबर विधान का शुभारंभ हुआ, जिसमें आयोजन 151 परिवारों ने कराया।
गुरुवर 108 भावभूषण मुनिराज ने कहा कि इस धरा पर जन्म लेने के बाद अब तक तुमने पाया ही पाया है। खोया कुछ भी नहीं। मनुष्य रूप में जन्म तो लिया, पर मनुष्यत्व का जन्म नहीं हुआ। आज यह भाव जागृत कर लेना कि मेरा जीवन मेरे तक ही सीमित न रहे, वह दूसरों के काम भी आ सके। इस विधान का विसर्जन मनोरमा, मुकेश ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मधु व अनिल ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन विजय ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन अनिल ने किया। इस मौके पर अध्यक्ष विनोद, महामंत्री मुकेश, कोषाध्यक्ष राजेंद्र, सह संयोजक मोतीलाल, कुणाल आदि का सहयोग रहा।