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मिट्टी की ढांग गिरने से हादसा: राहत कार्य में देरी और खत्म हो गईं तीन जिंदगियां, भाई की लाश देख फफक पड़ा अनिल

Mon, 27 Nov 2023 12:15 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 27 Nov 2023 12:15 PM IST
सार

मेरठ के गंगानगर एक्सटेंशन में बेसमेंट की खोदाई कर रहे तीन मजदूर दब गए। एक को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उसने दम तोड़ दिया, जबकि दो की मौके पर ही मौत हो गई।

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Accident due to falling of earthen pan: Relief work was delayed and three lives were lost
मिट्टी की ढांग गिरने से हादसा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मेरठ के गंगानगर के यू पॉकेट में ढांग गिरने के बाद राहत कार्य में देरी के कारण भी दबे मजदूरों की जिंदगी बचाना मुश्किल हो गया। पहले तो क्रिकेट खेल रहे युवक ही मिट्टी हटाने में लगे रहे।

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सूचना पर पुलिस-दमकल कर्मियों की टीम आधा घंटा देरी से पहुंची।  जेसीबी लाई गई, मगर उसका प्रयोग इसलिए नहीं किया गया कि कहीं मजदूरों को इससे उलटा कोई नुकसान न पहुंच जाए। ऐसे में फावड़े से ही मिट्टी हटाने का काम धीमी गति से चलता रहा। राहत कार्य में सवा दो घंटे का समय लग गया। यहां मौजूद साथी मजदूर और अन्य लोग भी बेबस रहे।

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सुबह 11:45 बजे घटना हुई। पहला मजदूर रामचंद्र घायल अवस्था में दोपहर 12:30 बजे निकाला जा सका। हालांकि बाद में उसकी मौत हो गई। दोपहर 12:45 बजे राम प्रवेश मृत अवस्था में निकाला गया। आखिर में गुरु प्रसाद को दोपहर बाद 2:08 बजे पुलिस और दमकलकर्मियों ने निकाला। सीएफओ संतोष कुमार राय ने कहा कि राहत कार्य में मजदूरों को बचाने के लिए कड़ी मशक्कत की गई, मगर उन्हें बचाया नहीं जा सका।
 

भाई की मौत पर फफक पड़ा अनिल
भाई राम प्रवेश की मौत का पता  चलते ही यहां मौजूद उसका भाई अनिल राव फफक पड़ा। इससे पहले मजदूर के निकलने तक वह भाई को बचाने की गुहार लगाता रहा। अनिल ने बताया कि एक दिन पहले ही उसका भाई मेरठ आया था। अनिल खुद भी रविवार को काम करने के लिए आया था। जैसे ही भाई की मौत की खबर फोन पर परिजनों को दी वे बिलख पड़े।
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थोड़ी देर पहले गिरती ढांग तो और बड़ा होता हादसा
ढांग गिरने से पहले मजदूरों ने साथ बैठकर आपस में बातचीत की। यदि थोड़ी देर पहले ढांग गिर जाती तो सातों मजदूरों की जान जा सकती थी। घटना से पहले सभी मजदूर साथ काम कर रहे थे। हादसे में जिन मजदूरों की जान बची, वह भी घटना के बाद से काफी देर तक दहशत में दिखे।

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