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Meerut News: जोड़ मेले के समापन पर उमड़ा आस्था का सैलाब
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जोड़ मेले में अंतिम दिन गुरुद्वारा साहिब में पपहुंची संगत स्रोत संवाद
- श्रद्धालुओं ने टेका मत्था, किया गुरु महिमा का गुणगान
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। क्षेत्र के गांव किशनपुर में स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव थल्ली साहिब में आयोजित 78वें तीन दिवसीय जोड़ मेले के तीसरे एवं अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल चरम पर रहा। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेका। रागी जत्थों ने गुरुओं की बहादुरी से जुड़े प्रसंग सुनकर गुरु महिमा का गुणगान किया।
महान गुरमत समागम के अंतिम दिन दीवान हॉल साहिब में भव्य कीर्तन दरबार सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया। जत्थेदारों ने संगत को गुरवाणी के इलाही कीर्तन, कथा और व्याख्या के साथ निहाल किया और संगत को गुरु साहिबानों द्वारा दर्शाए रास्ते पर चलने का आह्वान किया।
जत्थेदारों ने संगत को सिख इतिहास के साथ जोड़ते हुए गुरु साहिबानों तथा साहिबजादों के जीवन से शिक्षा लेने के लिए प्रेरित किया। समागम दौरान प्रवक्ताओं ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने देश और कौम के लिए अपना पूरा परिवार वार कर कुर्बानी की नई मिसाल पैदा की है। मेला संयोजक दर्शन सिंह चाकर, इंद्र सिंह, अतर सिंह, गुरदास सिंह, बलजीत सिंह, जसबीर सिंह, गुरबचन सिंह, निहाल सिंह व जसवीर सिंह आदि का सहयोग रहा। नगर पंचायत की चेयरपर्सन सुधा खटीक ने भी गुरुद्वारा पहुंचकर मत्था टेका। उन्होंने कहा कि सिख धर्म की परंपराएं त्याग, बलिदान और सेवा की अनुपम मिसाल हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। क्षेत्र के गांव किशनपुर में स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव थल्ली साहिब में आयोजित 78वें तीन दिवसीय जोड़ मेले के तीसरे एवं अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल चरम पर रहा। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेका। रागी जत्थों ने गुरुओं की बहादुरी से जुड़े प्रसंग सुनकर गुरु महिमा का गुणगान किया।
महान गुरमत समागम के अंतिम दिन दीवान हॉल साहिब में भव्य कीर्तन दरबार सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया। जत्थेदारों ने संगत को गुरवाणी के इलाही कीर्तन, कथा और व्याख्या के साथ निहाल किया और संगत को गुरु साहिबानों द्वारा दर्शाए रास्ते पर चलने का आह्वान किया।
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जत्थेदारों ने संगत को सिख इतिहास के साथ जोड़ते हुए गुरु साहिबानों तथा साहिबजादों के जीवन से शिक्षा लेने के लिए प्रेरित किया। समागम दौरान प्रवक्ताओं ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने देश और कौम के लिए अपना पूरा परिवार वार कर कुर्बानी की नई मिसाल पैदा की है। मेला संयोजक दर्शन सिंह चाकर, इंद्र सिंह, अतर सिंह, गुरदास सिंह, बलजीत सिंह, जसबीर सिंह, गुरबचन सिंह, निहाल सिंह व जसवीर सिंह आदि का सहयोग रहा। नगर पंचायत की चेयरपर्सन सुधा खटीक ने भी गुरुद्वारा पहुंचकर मत्था टेका। उन्होंने कहा कि सिख धर्म की परंपराएं त्याग, बलिदान और सेवा की अनुपम मिसाल हैं।
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