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Meerut News: नकली सिगरेट फैक्टरी में रहता था सुरक्षा का घेरा
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- किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। दूधली गांव के पास कॉलेज की बिल्डिंग में संचालित नकली सिगरेट फैक्टरी को लेकर ग्रामीणों ने एक और अहम जानकारी सामने रखी है। ग्रामीणों का दावा है कि जिस भवन को कॉलेज की बिल्डिंग बताया जा रहा है, उसमें उन्होंने कभी कॉलेज संचालित होते नहीं देखा। फैक्टरी संचालन के दौरान भवन के आसपास सुरक्षा का कड़ा घेरा रहता था और किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी।
ग्रामीणों के मुताबिक मुख्य गेट पर दूसरे राज्य का एक सिक्योरिटी गार्ड 24 घंटे तैनात रहता था। भवन की दीवारों पर कंटीले तारों की फेंसिंग भी की गई थी, जिससे किसी के लिए अंदर प्रवेश करना आसान नहीं था। रात के समय निगरानी और कड़ी कर दी जाती थी। ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से फैक्टरी के भीतर चल रही गतिविधियों की जानकारी आसपास के लोगों को नहीं हो सकी।
बताया गया कि कंबोडिया से दूधली लाई गई मशीन मोलिंस मार्क-9.5 मॉडल की थी। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी क्षमता एक मिनट में करीब 3500 से 5000 सिगरेट बनाने की बताई गई है। मशीनों को भवन में लाते समय उन्हें पूरी तरह ढककर रखा गया था। आसपास के लोगों को बताया गया था कि यहां दूध का प्लांट लगाया जाएगा। इसी नाम पर मेरठ के एक व्यापारी से करीब डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह की दर से तीन जनरेटर लिए जाने की बात भी सामने आई है। जनरेटर व्यापारी को कुछ महीने का एडवांस पेमेंट भी किया गया था। पुलिस ने जनरेटरों को सील कर रखा है।
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ग्रामीणों के अनुसार सिगरेट का उत्पादन जरूरत के हिसाब से दिन-रात चलता था। स्टॉक पूरा होने पर मशीनें मुख्य रूप से रात में चलाई जाती थीं, ताकि उनकी आवाज आसपास तक न पहुंचे। भवन के बाहर हेवी लोड के लिए विद्युत कनेक्शन भी लिया गया था। बताया गया कि विद्युत कनेक्शन फैक्टरी संचालक रवि किशोर के नाम पर था।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन को लेकर पहले शिकायतें हुई थीं तो समय रहते जांच क्यों नहीं की गई। भवन संचालक की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी पुलिस अभी तक इस मामले में सिर्फ एक आरोपी को गिरफ्तार कर सकी है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और कई बिंदुओं पर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई चल रही है। यहां जो गिरोह काम कर रहा था उसके तार पश्चिमी देश कंबोडिया से जुड़े होने के कारण गुत्थी सुलझाने में पुलिस को अभी समय लग रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। दूधली गांव के पास कॉलेज की बिल्डिंग में संचालित नकली सिगरेट फैक्टरी को लेकर ग्रामीणों ने एक और अहम जानकारी सामने रखी है। ग्रामीणों का दावा है कि जिस भवन को कॉलेज की बिल्डिंग बताया जा रहा है, उसमें उन्होंने कभी कॉलेज संचालित होते नहीं देखा। फैक्टरी संचालन के दौरान भवन के आसपास सुरक्षा का कड़ा घेरा रहता था और किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी।
ग्रामीणों के मुताबिक मुख्य गेट पर दूसरे राज्य का एक सिक्योरिटी गार्ड 24 घंटे तैनात रहता था। भवन की दीवारों पर कंटीले तारों की फेंसिंग भी की गई थी, जिससे किसी के लिए अंदर प्रवेश करना आसान नहीं था। रात के समय निगरानी और कड़ी कर दी जाती थी। ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से फैक्टरी के भीतर चल रही गतिविधियों की जानकारी आसपास के लोगों को नहीं हो सकी।
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बताया गया कि कंबोडिया से दूधली लाई गई मशीन मोलिंस मार्क-9.5 मॉडल की थी। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी क्षमता एक मिनट में करीब 3500 से 5000 सिगरेट बनाने की बताई गई है। मशीनों को भवन में लाते समय उन्हें पूरी तरह ढककर रखा गया था। आसपास के लोगों को बताया गया था कि यहां दूध का प्लांट लगाया जाएगा। इसी नाम पर मेरठ के एक व्यापारी से करीब डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह की दर से तीन जनरेटर लिए जाने की बात भी सामने आई है। जनरेटर व्यापारी को कुछ महीने का एडवांस पेमेंट भी किया गया था। पुलिस ने जनरेटरों को सील कर रखा है।
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ग्रामीणों के अनुसार सिगरेट का उत्पादन जरूरत के हिसाब से दिन-रात चलता था। स्टॉक पूरा होने पर मशीनें मुख्य रूप से रात में चलाई जाती थीं, ताकि उनकी आवाज आसपास तक न पहुंचे। भवन के बाहर हेवी लोड के लिए विद्युत कनेक्शन भी लिया गया था। बताया गया कि विद्युत कनेक्शन फैक्टरी संचालक रवि किशोर के नाम पर था।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन को लेकर पहले शिकायतें हुई थीं तो समय रहते जांच क्यों नहीं की गई। भवन संचालक की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है। एक सप्ताह बीतने के बाद भी पुलिस अभी तक इस मामले में सिर्फ एक आरोपी को गिरफ्तार कर सकी है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और कई बिंदुओं पर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई चल रही है। यहां जो गिरोह काम कर रहा था उसके तार पश्चिमी देश कंबोडिया से जुड़े होने के कारण गुत्थी सुलझाने में पुलिस को अभी समय लग रहा है।