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Meerut News: महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में शोभायात्रा निकाली
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महर्षि वाल्मीकि शोभायात्रा का फीता काटकर शुभारंभ करते पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि व पालिका
संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना। महर्षि वाल्मीकि बड़ा मंदिर आश्रम ट्रस्ट के तत्वावधान में महर्षि वाल्मीकि शोभा यात्रा का आयोजन हुआ। शोभा यात्रा का शुभारंभ मिल रोड स्थित कपिल सिनेमा के पास महर्षि वाल्मीकि मंदिर से हुआ।
यात्रा का शुभारंभ पूर्व राज्यमंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि व पालिका अध्यक्ष अखिल कौशिक ने पूजा-अर्चना कर और फीता काटकर किया। इस अवसर पर संबोधन में पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने विश्व को अहिंसा और शांति का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का हृदय अत्यंत कोमल था और वे किसी को भी दुखी नहीं देख सकते थे। महाकाव्य रामायण के रचयिता और आदि कवि महर्षि वाल्मीकि काव्य, संस्कृत एवं संगीत के प्रथम जन्मदाता हैं। उन्होंने लव-कुश को शस्त्र, संगीत और काव्य की शिक्षा देकर विश्व को सर्वश्रेष्ठता का परिचय कराया।
अध्यक्षता कर रहे मंदिर कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत के अद्वितीय प्रकांड ऋषि थे। त्रिकालदर्शी भगवान वाल्मीकि ने चौबीस हजार श्लोक, एक सौ उपाख्यान, पांच सौ उपाख्यान सर्ग तथा उत्तरकाण्ड सहित सात कांडों का प्रतिपादन कर विश्व को शांतिप्रिय जीवन जीने की कला सिखाई। शोभायात्रा में ढोल, गणेश, उसके बाद ताशे वाले, घोड़े पर सवार लव-कुश, राम-लक्ष्मण सीता आदि की झांकियां थीं।
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शोभा यात्रा में संजय शर्मा, राजेंद्र चौहान, किशोर वाल्मीकि, अशोक चौधरी, रोहित बालाजी, नरेश बाला, रवि गोला, विपेंद्र सुधा वाल्मीकि, प्रवीन, राजकुमार, स्वराज, राजू, सूरज, ललित आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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मवाना। महर्षि वाल्मीकि बड़ा मंदिर आश्रम ट्रस्ट के तत्वावधान में महर्षि वाल्मीकि शोभा यात्रा का आयोजन हुआ। शोभा यात्रा का शुभारंभ मिल रोड स्थित कपिल सिनेमा के पास महर्षि वाल्मीकि मंदिर से हुआ।
यात्रा का शुभारंभ पूर्व राज्यमंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि व पालिका अध्यक्ष अखिल कौशिक ने पूजा-अर्चना कर और फीता काटकर किया। इस अवसर पर संबोधन में पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने विश्व को अहिंसा और शांति का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का हृदय अत्यंत कोमल था और वे किसी को भी दुखी नहीं देख सकते थे। महाकाव्य रामायण के रचयिता और आदि कवि महर्षि वाल्मीकि काव्य, संस्कृत एवं संगीत के प्रथम जन्मदाता हैं। उन्होंने लव-कुश को शस्त्र, संगीत और काव्य की शिक्षा देकर विश्व को सर्वश्रेष्ठता का परिचय कराया।
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अध्यक्षता कर रहे मंदिर कमेटी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत के अद्वितीय प्रकांड ऋषि थे। त्रिकालदर्शी भगवान वाल्मीकि ने चौबीस हजार श्लोक, एक सौ उपाख्यान, पांच सौ उपाख्यान सर्ग तथा उत्तरकाण्ड सहित सात कांडों का प्रतिपादन कर विश्व को शांतिप्रिय जीवन जीने की कला सिखाई। शोभायात्रा में ढोल, गणेश, उसके बाद ताशे वाले, घोड़े पर सवार लव-कुश, राम-लक्ष्मण सीता आदि की झांकियां थीं।
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शोभा यात्रा में संजय शर्मा, राजेंद्र चौहान, किशोर वाल्मीकि, अशोक चौधरी, रोहित बालाजी, नरेश बाला, रवि गोला, विपेंद्र सुधा वाल्मीकि, प्रवीन, राजकुमार, स्वराज, राजू, सूरज, ललित आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

महर्षि वाल्मीकि शोभायात्रा का फीता काटकर शुभारंभ करते पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि व पालिका

महर्षि वाल्मीकि शोभायात्रा का फीता काटकर शुभारंभ करते पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि व पालिका