पंचायत चुनाव: भाजपा के सामने बड़ी चुनौती, सपा दिख रही मजबूत, पढ़िए क्या है पूरा अपडेट
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर जोड़तोड़ शुरू हो चुकी है। मामला वर्चस्व कायम करने का है तो निश्चित रूप से चुनाव होगा, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर भाजपा का पलड़ा विपक्ष के सामने बहुत कमजोर है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर जोड़तोड़ शुरू हो चुकी है। मामला वर्चस्व कायम करने का है तो निश्चित रूप से चुनाव होगा, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर भाजपा का पलड़ा विपक्ष के सामने बहुत कमजोर नजर आ रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर इस समय भाजपा सहित विपक्षी दलों में मंथन शुरू हो चुका है। मेरठ में भाजपा के पांच, सपा के सात, बसपा के आठ और रालोद के आठ सदस्य सहित आम आदमी पार्टी का एक और चार निर्दलीय जीत कर आए हैं।
ये हैं संभावित प्रत्याशी
अभी तक जो गणित सामने आ रहा है, उसमें भाजपा में गौरव चौधरी का नाम ही सामने आ रहा है। लेकिन उनके सामने सपा से विपिन भड़ाना का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है, जबकि बसपा और रालोद से अभी तक कोई प्रत्याशी सामने नहीं आ रहा है। इस चुनाव में जातिगत गणित भी हावी रहेगा। ऐसे में जाट बिरादरी से जहां छह वोट हैं तो गुर्जर बिरादरी से आठ जीत कर आए हैं। इसके अलावा दलित आठ, मुस्लिम पांच और ठाकुर और त्यागी बिरादरी से दो-दो प्रत्याशी जीत कर आए हैं। इनमें एक ब्राह्मण सदस्य भी है।
सपा की स्थिति मजबूत
सपा और रालोद गठबंधन की 15 वोट हैं। ऐसे में मात्र दो वोट की जरूरत इस गठबंधन को है जो बसपा के साथ ही निदर्लीयों से भी उसे आसानी से मिल सकती है, जबकि भाजपा के सामने 12 वोट जुटाना एक बड़ी चुनौती होगी।
धन-बल होगा निर्णायक
इस चुनाव में इस बार पैसा पूरी तरह निर्णायक होगा। संगठनात्मक दबाव की बात यदि चलती है तो भाजपा प्रत्याशी के सामने इतना वोट जुटाना आसान नहीं होगा, जबकि विपक्ष आसानी से जुटा सकता है।
इस चुनाव में भी चलेगा भीतरीघात
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भी भीतरीघात हावी रहेगा। सूत्रों के अनुसार यदि सपा से गुर्जर प्रत्याशी आता है तो भाजपा के ही कुछ लोग चुप्पी साध लेंगे क्योंकि व्यक्तिगत हित में वह अपनी बिरादरी को नाराज करना नहीं चाहेंगे। ऐसे में भाजपा के सामने एक बार फिर से बड़ी चुनौती होगी।
अखिलेश यादव से साधा संपर्क
सपा सूत्रों के अनुसार सपा नेताओं ने चुनाव परिणाम आने के बाद आगामी रणनीति के लिए सीधे अखिलेश यादव से संपर्क साधा है। इसमें आर्थिक सहायता अहम मुद्दा है। सपाई खेमा भी जानता है कि इस चुनाव में पैसा ही काम करेगा। ऐसे में आर्थिक सहायता जुटाने के लिए अब आलाकमान के दबाव की जरूरत है।
पश्चिम में भाजपा का व्यक्तिगत परिणाम संतोषजनक
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में पश्चिमी क्षेत्र में 14 जनपद आते हैं। इनमें भाजपा को कुल 99 सीटों पर जीत मिली है, जो सबसे ज्यादा है। इसके बाद सपा को 85, बसपा को 83, कांग्रेस को मात्र 11 और रालोद को 38 सीटें मिली हैं, जबकि 129 सीट निर्दलीयों और अन्य दलों के खाते में गई हैं। ऐसे में व्यक्तिगत प्रदर्शन भाजपा का संतोषजनक है, लेकिन विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए यदि पश्चिम का पूरा समीकरण देखें तो सपा रालोद को कुल 123 सीट मिली हैं जो भाजपा से 24 सीट ज्यादा हैं। इसमें अहम बात ये है कि वर्तमान परिस्थितियों में मुस्लिम प्रत्याशी बसपा से भी बड़ी संख्या में जीत कर आए हैं जो भाजपा को बिल्कुल भी समर्थन नहीं करेंगे। ऐसे में एक दो जनपदों में छोड़कर बाकी में भाजपा की हालत खस्ता है।
टूट सकता है सत्ता के साथ का मिथक
जिला पंचायत या ब्लाक प्रमुख पद सत्ता के साथ चलता है। जिसकी सरकार प्रदेश में रही हैं, उसके ही अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख निर्वाचित होते आए है। लेकिन इस बार जो परिस्थिति सामने आ रही है, उससे यह मिथक टूटता नजर आ रहा है।
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