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इनकी गांधीगीरी का नहीं कोई असर
Meerut
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:31 AM IST
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मेरठ। गांधी जी के आंदोलन ने भले ही अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया हो, लेकिन आज आजाद देश में गांधी की नीतियों पर चलने वाले आंदोलन पर सुनवाई तक नहीं होती है। तभी तो कलक्ट्रेट परिसर में खरखौदा का परिवार जहां 16 माह से धरना दिए बैठा है, तो बाकी परिवारों को भी एक से दो माह हो चुके हैं।
खरखौदा निवासी जगमाल और उनकी पत्नी सीता देवी 21 जून 2013 से कलक्ट्रेट में धरना दिए हुए हैं। जगमाल की दुकान पर ताला डालकर उसके दुकान मालिक ने सामान भी खुर्दबुर्द कर दिया। हालांकि जिलाधिकारी पंकज यादव ने इस पूरे मामले की जांच अपर जिलाधिकारी प्रशासन अनिल उपाध्याय से कराई तो उसमें पूरे मामले में पुलिस की भूमिका ही संदिग्ध पाई गई। एसएसपी तत्कालीन थानाध्यक्ष खरखौदा के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं, लेकिन अभी तक भी जगमाल को न्याय नहीं मिला है।
उधर, ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के होराम नगर निवासी विमला चौधरी 29 सितंबर से धरने पर है। विमला चौधरी के पति की 31 अगस्त को हत्या कर दी गई थी, लेकिन ब्रह्मपुरी थाना पुलिस उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। वहीं, कंकरखेडा थाना क्षेत्र के दायमपुर निवासी अशोक और उनकी पत्नी फूलवती भी 18 सितंबर से कलक्ट्रेट में धरना दिए हुए हैं। इस दलित परिवार के बेटे विपिन की एक जुलाई को हत्या कर दी गई थी, लेकिन आज तक भी इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई है।
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चौथा मामला आवास एवं विकास परिषद के उन मृतक कर्मचारियों के परिवारों का है, जिनके आश्रितों को नौकरी नहीं मिली है। ऐसे आठ परिवार के लोग जगमोहन नेगी, अंकुर राणा, संजीव, संतोष, सोनू, जीवन, राजकुमार और हिमांशु 16 अगस्त से धरना दे रहे हैं। ये लोग मुख्यमंत्री तक अपनी पीड़ा पहुंचा चुके हैं, लेकिन आज तक न्याय नहीं मिला।
इन सभी लोगों का कहना है कि अगर दीवाली तक भी न्याय नहीं मिला तो वह अपने घर नहीं जाएंगे, बल्कि कलक्ट्रेट में ही सभी लोग धरने पर मौजूद रहेंगे।
वर्जन..........
सभी लोगों के मामले संबंधित विभागों और शासन को भेज दिए गए हैं। इनमें से कोई भी ऐसा मामला नहीं है जो डीएम स्तर पर तत्काल निस्तारित हो सके। कई बार इन लोगों को समझाया भी जा चुका है। फिर भी एक बार फिर इन सभी के मामलों में रिमाइंडर भेजा जाएगा।
पंकज यादव, जिलाधिकारी मेरठ।
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खरखौदा निवासी जगमाल और उनकी पत्नी सीता देवी 21 जून 2013 से कलक्ट्रेट में धरना दिए हुए हैं। जगमाल की दुकान पर ताला डालकर उसके दुकान मालिक ने सामान भी खुर्दबुर्द कर दिया। हालांकि जिलाधिकारी पंकज यादव ने इस पूरे मामले की जांच अपर जिलाधिकारी प्रशासन अनिल उपाध्याय से कराई तो उसमें पूरे मामले में पुलिस की भूमिका ही संदिग्ध पाई गई। एसएसपी तत्कालीन थानाध्यक्ष खरखौदा के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं, लेकिन अभी तक भी जगमाल को न्याय नहीं मिला है।
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उधर, ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के होराम नगर निवासी विमला चौधरी 29 सितंबर से धरने पर है। विमला चौधरी के पति की 31 अगस्त को हत्या कर दी गई थी, लेकिन ब्रह्मपुरी थाना पुलिस उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। वहीं, कंकरखेडा थाना क्षेत्र के दायमपुर निवासी अशोक और उनकी पत्नी फूलवती भी 18 सितंबर से कलक्ट्रेट में धरना दिए हुए हैं। इस दलित परिवार के बेटे विपिन की एक जुलाई को हत्या कर दी गई थी, लेकिन आज तक भी इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई है।
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चौथा मामला आवास एवं विकास परिषद के उन मृतक कर्मचारियों के परिवारों का है, जिनके आश्रितों को नौकरी नहीं मिली है। ऐसे आठ परिवार के लोग जगमोहन नेगी, अंकुर राणा, संजीव, संतोष, सोनू, जीवन, राजकुमार और हिमांशु 16 अगस्त से धरना दे रहे हैं। ये लोग मुख्यमंत्री तक अपनी पीड़ा पहुंचा चुके हैं, लेकिन आज तक न्याय नहीं मिला।
इन सभी लोगों का कहना है कि अगर दीवाली तक भी न्याय नहीं मिला तो वह अपने घर नहीं जाएंगे, बल्कि कलक्ट्रेट में ही सभी लोग धरने पर मौजूद रहेंगे।
वर्जन..........
सभी लोगों के मामले संबंधित विभागों और शासन को भेज दिए गए हैं। इनमें से कोई भी ऐसा मामला नहीं है जो डीएम स्तर पर तत्काल निस्तारित हो सके। कई बार इन लोगों को समझाया भी जा चुका है। फिर भी एक बार फिर इन सभी के मामलों में रिमाइंडर भेजा जाएगा।
पंकज यादव, जिलाधिकारी मेरठ।