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शाहिद अखलाक के सपा में जाने की चर्चा
Meerut
Updated Sun, 05 Oct 2014 05:32 AM IST
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मेरठ। मुद्दत से हाथी की सवारी कर रहे पूर्व सांसद हाजी शाहिद अखलाक अब साइकिल पर सवार हो सकते हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात हो चुकी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी मुलाकात के फोटो आम होने के बाद ही बसपा आलाकमान में उथल पुथल हुई और आनन फानन में उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसी के आधार पर उनके सपा में आने की चर्चा तेज है।
शाहिद अखलाक का बसपा से पुराना नाता रहा है। बसपा के टिकट पर ही वे सांसद बने। मेयर बने। बाद में नाराज होकर अपनी पार्टी बनाई लेकिन फिर से बसपा में लौट आए। साथ ही इस बार मेरठ लोकसभा से चुनाव भी लड़े । हारे लेकिन उनका चुनाव मजबूत रहा। फिलहाल भी में पार्टी में मजबूत स्थिति में थे। उन्हें कहा गया था कि अगले लोकसभा चुनाव में भी वे ही मेरठ से चुनाव लड़ेंगे। साथ ही मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से उनके भाई को चुनाव लड़ाने की घोषणा की जा चुकी थी। वह भी तब जब पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी खुद दक्षिण से विधानसभा का टिकट मांग रहे थे। अब शाहिद समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। दरअसल, 28 सितंबर को शाहिद अखलाक दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री आशु मलिक के साथ लखनऊ जाकर सूबे के सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात कर चुके हैं। उनकी इस मीटिंग का फोटो व्हाट्सएप पर सार्वजनिक हुआ तो बसपाइयों में हड़कंप मच गया। कहा जा रहा है कि तत्काल इस फोटो को बसपा सुप्रीमो मायावती के दरबार में पेश किया गया और उन्हें इस मीटिंग की जानकारी दी गई। इसके बाद ही आनन फानन में शाहिद व उनके भाईयों को पार्टी से निकालने का फरमान सुनाया गया।
बेहद कमजोर तर्क किया पेश
शाहिद को बाहर करने का बसपा आला कमान ने बेहद कमजोर तर्क पेश किया है। कहा गया है कि वे खुद को राज्यसभा भेजने की जिद कर रहे थे। हालांकि यह नहीं कहा गया है कि वे इसका दबाव बना रहे थे। साथ ही वे अपनी पत्नी को लोकसभा का चुनाव लड़ाने की बात कह रहे थे। बसपा के ये तर्क राजनीति से जुडे़ लोगों के गले नहीं उतर रहे हैं। यह जिद ऐसी नहीं कि इस कद के नेता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए। वह भी उस सूरत में जब कद्दावर मुस्लिम नेताओं की बसपा तथा अन्य सभी दलों में ही तलाश चल रही है। ऐसा भी नहीं है कि अखलाक ने सार्वजनिक तौर पर कहीं यह इच्छा जाहिर की हो या फिर पार्टी के खिलाफ कोई बयान बाजी की हो।
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मुनकाद फैक्टर भी कर रहा है काम
बसपा में इस समय नए सिरे से संगठन को खड़ा किया जा रहा है। वेस्ट यूपी प्रभारी रहे सांसद बाबू मुनकाद अली को यहां से हटाकर दिल्ली अटैच किया जा चुका है लेकिन चर्चा यह भी है कि उनके नजदीकियों को या तो कमजोर किया जा रहा है या बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। पिछले दिनों शहर में लगाए गए शाहिद अखलाक के होर्डिंगाें पर बाबू मुनकाद अली का भी फोटो लगा था जो पार्टी के हाकिमों को हजम नहीं हो रहा था। यहां तक कि एक पखवाड़ा पूर्व मेरठ आए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी यह फरमान जारी कर गए कि यहां से बाहर भेजे गए पदाधिकारी बिना अनुमति लिए हुए यहां किसी भी कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेंगे। एक तरह से मुनकाद व उनकी टीम के यहां सामान्य कार्यक्रमों में भी शिरकत करने पर पाबंदी लगा दी गई है।
राजनीति के साथ व्यवसायिक मजबूरी तो नहीं
शाहिद अखलाक मीट का कारोबार करते हैं। उनकी मीट फैक्ट्रियां हैं जिसके लिए तमाम लाइसेंसों की स्वीकृति चाहिए। विभिन्न मानक पूरे करने पड़ते हैं। बताया जा रहा है कि मीट की फैक्ट्री के लिए ही पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की कंसर्न के लिए शाहिद आशु मलिक के संपर्क में आए और इसी को लेकर सीएम से मिले। इसी के साथ राजनीतिक भविष्य का ताना बाना बुने जाने की चर्चा है।
सपा में होगा पुरजोर विरोध
शाहिद मंजूर समेत सपा के तमाम बड़े नेता अखलाक के राजनीतिक विरोधी रहे हैं। मंजूर तो उनके सामने हाल ही में चुनाव भी लड़ृे हैं। मेरठ महापौर के चुनाव में सपा उम्मीमदवार रफीक अंसारी का शाहिद अखलाक ने खुलकर विरोध किया। वर्तमान में सपा के नगर अध्यक्ष आदिल चौधरी के सामने दक्षिण विधानसभा से शाहिद के भाई राशिद चुनाव लड़े थे। ऐसे में यह तो तय है कि यदि शाहिद ने सपा का रुख किया तो वहां उनकी एंट्री आसान नहीं होगी। शाहिद की एंट्री में आजम खां फैक्टर भी काम करेगा।
बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
यदि शाहिद सपा में गए तो मेरठ के राजनीतिक समीकरणों में भारी फेरदबल होगी। हाजी याकूब कुरैशी का बसपा में कद बढ़ने की उम्मीद प्रबल होगी। इस समय मेरठ में बसपा के पास याकूब कुरैशी भी हैं। दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्वता लगातार बनी रही। याकूब ने दक्षिण विधानसभा से टिकट मांगा पर बसपा आलाकमान ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वहां से शाहिद के भाई को टिकट दिया जाएगा।
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शाहिद अखलाक का बसपा से पुराना नाता रहा है। बसपा के टिकट पर ही वे सांसद बने। मेयर बने। बाद में नाराज होकर अपनी पार्टी बनाई लेकिन फिर से बसपा में लौट आए। साथ ही इस बार मेरठ लोकसभा से चुनाव भी लड़े । हारे लेकिन उनका चुनाव मजबूत रहा। फिलहाल भी में पार्टी में मजबूत स्थिति में थे। उन्हें कहा गया था कि अगले लोकसभा चुनाव में भी वे ही मेरठ से चुनाव लड़ेंगे। साथ ही मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से उनके भाई को चुनाव लड़ाने की घोषणा की जा चुकी थी। वह भी तब जब पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी खुद दक्षिण से विधानसभा का टिकट मांग रहे थे। अब शाहिद समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। दरअसल, 28 सितंबर को शाहिद अखलाक दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री आशु मलिक के साथ लखनऊ जाकर सूबे के सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात कर चुके हैं। उनकी इस मीटिंग का फोटो व्हाट्सएप पर सार्वजनिक हुआ तो बसपाइयों में हड़कंप मच गया। कहा जा रहा है कि तत्काल इस फोटो को बसपा सुप्रीमो मायावती के दरबार में पेश किया गया और उन्हें इस मीटिंग की जानकारी दी गई। इसके बाद ही आनन फानन में शाहिद व उनके भाईयों को पार्टी से निकालने का फरमान सुनाया गया।
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बेहद कमजोर तर्क किया पेश
शाहिद को बाहर करने का बसपा आला कमान ने बेहद कमजोर तर्क पेश किया है। कहा गया है कि वे खुद को राज्यसभा भेजने की जिद कर रहे थे। हालांकि यह नहीं कहा गया है कि वे इसका दबाव बना रहे थे। साथ ही वे अपनी पत्नी को लोकसभा का चुनाव लड़ाने की बात कह रहे थे। बसपा के ये तर्क राजनीति से जुडे़ लोगों के गले नहीं उतर रहे हैं। यह जिद ऐसी नहीं कि इस कद के नेता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए। वह भी उस सूरत में जब कद्दावर मुस्लिम नेताओं की बसपा तथा अन्य सभी दलों में ही तलाश चल रही है। ऐसा भी नहीं है कि अखलाक ने सार्वजनिक तौर पर कहीं यह इच्छा जाहिर की हो या फिर पार्टी के खिलाफ कोई बयान बाजी की हो।
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मुनकाद फैक्टर भी कर रहा है काम
बसपा में इस समय नए सिरे से संगठन को खड़ा किया जा रहा है। वेस्ट यूपी प्रभारी रहे सांसद बाबू मुनकाद अली को यहां से हटाकर दिल्ली अटैच किया जा चुका है लेकिन चर्चा यह भी है कि उनके नजदीकियों को या तो कमजोर किया जा रहा है या बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। पिछले दिनों शहर में लगाए गए शाहिद अखलाक के होर्डिंगाें पर बाबू मुनकाद अली का भी फोटो लगा था जो पार्टी के हाकिमों को हजम नहीं हो रहा था। यहां तक कि एक पखवाड़ा पूर्व मेरठ आए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी यह फरमान जारी कर गए कि यहां से बाहर भेजे गए पदाधिकारी बिना अनुमति लिए हुए यहां किसी भी कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेंगे। एक तरह से मुनकाद व उनकी टीम के यहां सामान्य कार्यक्रमों में भी शिरकत करने पर पाबंदी लगा दी गई है।
राजनीति के साथ व्यवसायिक मजबूरी तो नहीं
शाहिद अखलाक मीट का कारोबार करते हैं। उनकी मीट फैक्ट्रियां हैं जिसके लिए तमाम लाइसेंसों की स्वीकृति चाहिए। विभिन्न मानक पूरे करने पड़ते हैं। बताया जा रहा है कि मीट की फैक्ट्री के लिए ही पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की कंसर्न के लिए शाहिद आशु मलिक के संपर्क में आए और इसी को लेकर सीएम से मिले। इसी के साथ राजनीतिक भविष्य का ताना बाना बुने जाने की चर्चा है।
सपा में होगा पुरजोर विरोध
शाहिद मंजूर समेत सपा के तमाम बड़े नेता अखलाक के राजनीतिक विरोधी रहे हैं। मंजूर तो उनके सामने हाल ही में चुनाव भी लड़ृे हैं। मेरठ महापौर के चुनाव में सपा उम्मीमदवार रफीक अंसारी का शाहिद अखलाक ने खुलकर विरोध किया। वर्तमान में सपा के नगर अध्यक्ष आदिल चौधरी के सामने दक्षिण विधानसभा से शाहिद के भाई राशिद चुनाव लड़े थे। ऐसे में यह तो तय है कि यदि शाहिद ने सपा का रुख किया तो वहां उनकी एंट्री आसान नहीं होगी। शाहिद की एंट्री में आजम खां फैक्टर भी काम करेगा।
बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
यदि शाहिद सपा में गए तो मेरठ के राजनीतिक समीकरणों में भारी फेरदबल होगी। हाजी याकूब कुरैशी का बसपा में कद बढ़ने की उम्मीद प्रबल होगी। इस समय मेरठ में बसपा के पास याकूब कुरैशी भी हैं। दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्वता लगातार बनी रही। याकूब ने दक्षिण विधानसभा से टिकट मांगा पर बसपा आलाकमान ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वहां से शाहिद के भाई को टिकट दिया जाएगा।