{"_id":"52-65504","slug":"Meerut-65504-52","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाट माप-तौल विभाग का कारनामा:","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाट माप-तौल विभाग का कारनामा:
Meerut
Updated Thu, 14 Nov 2013 05:42 AM IST
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मेरठ। बाट माप-तौल विभाग ने केंद्र सरकार से मिली मोबाइल वेब्रिज टेस्टिंग वैन को बिना इस्तेमाल किए कबाड़ बना दिया। 54 लाख रुपए की यह वैन करीब सात साल से दौराला शुगर मिल में धूल फांक रही है।
केंद्र सरकार ने बड़े धर्म कांटों के साथ औद्योगिक इकाइयों में लगे बड़े कांटों की जांच के लिए सचल वैन दस्ते की योजना बनाई थी। इसके लिए मंडल स्तर पर एक-एक वैन उपलब्ध कराई। इस कड़ी में करीब सात साल मेरठ को सचल वैन दी गई। यह लिफ्टिंग से लेकर वजन तौलने और मापने के सभी उपकरणों से लैस है। इसका संचालन भी कंप्यूटराइज्ड है। आरटीओ कार्यालय में यूपी-15एजी/0210 नंबर से पंजीकृत इस वैन का एक बार भी विभाग ने प्रयोग नहीं किया है।
इसलिए दी गई थी:
विभाग एक निश्चित अवधि के लिए बाट माप-तौल यंत्र सत्यापित करता है। इसके लिए कार्यालय परिसर में सुविधा उपलब्ध कराने के साथ शिविर भी लगाए जाते हैं, जिनमें दुकानदार अपने माप-तौल यंत्रों को सत्यापित कराते हैं। लेकिन स्थाई रूप से लगे बड़े धर्मकांटों का सत्यापन नहीं हो पाता। ऐसे में इस वैन के जरिए इन कांटों के सत्यापन की योजना सरकार ने लागू की थी, ताकि घट तौली रोकी जा सके।
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और हो यह रहा है:
विभागीय अधिकारियों और निरीक्षकों का ध्यान छोटे दुकानदारों पर होता है। जबकि बड़े धर्मकांटे और औद्योगिक इकाइयों में, जहां बडे़ कांटे होते हैं, वहां बड़े पैमाने पर घट तौली की आशंकाओं के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जाता। गन्ना तौल केंद्र पर घट तौली के मामले लगातार सामने आते हैं। लेकिन आज तक मिलों के भीतर कभी भी इसकी जांच नहीं की गई।
आरटीआई में खुलासा:
सचल वैन दौराला शुगर मिल के कैंपस में धूल फांक रही है। इस संबंध में जब व्यापारी नेता लोकेश अग्रवाल ने आरटीआई के तहत सूचना मांगी तो उप नियंत्रक विधिक माप विज्ञान मेरठ मंडल ने इसके वर्तमान में कार्यरत न होने की जानकारी दी। लेकिन यह कहां है और किसके अंडर में है, यह नहीं बताया। जब दोबारा जानकारी मांगी तो आरटीआई के नियमों के विपरीत सूचना बताते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया गया।
बॉक्स:
छोटी सी खबर बना दो:
उप नियंत्रक कृष्ण कुमार से जब इस सचल वैन को लेकर बात की गई तो वह उखड़ गए। बोले जिसने तुम्हें यह खबर दी है और आरटीआई में हमारा जवाब सौंपा है, उसके आधार पर छोटी सी खबर बना दो। क्यों चक्कर में पड़ रहे हैं। इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया।
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केंद्र सरकार ने बड़े धर्म कांटों के साथ औद्योगिक इकाइयों में लगे बड़े कांटों की जांच के लिए सचल वैन दस्ते की योजना बनाई थी। इसके लिए मंडल स्तर पर एक-एक वैन उपलब्ध कराई। इस कड़ी में करीब सात साल मेरठ को सचल वैन दी गई। यह लिफ्टिंग से लेकर वजन तौलने और मापने के सभी उपकरणों से लैस है। इसका संचालन भी कंप्यूटराइज्ड है। आरटीओ कार्यालय में यूपी-15एजी/0210 नंबर से पंजीकृत इस वैन का एक बार भी विभाग ने प्रयोग नहीं किया है।
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इसलिए दी गई थी:
विभाग एक निश्चित अवधि के लिए बाट माप-तौल यंत्र सत्यापित करता है। इसके लिए कार्यालय परिसर में सुविधा उपलब्ध कराने के साथ शिविर भी लगाए जाते हैं, जिनमें दुकानदार अपने माप-तौल यंत्रों को सत्यापित कराते हैं। लेकिन स्थाई रूप से लगे बड़े धर्मकांटों का सत्यापन नहीं हो पाता। ऐसे में इस वैन के जरिए इन कांटों के सत्यापन की योजना सरकार ने लागू की थी, ताकि घट तौली रोकी जा सके।
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और हो यह रहा है:
विभागीय अधिकारियों और निरीक्षकों का ध्यान छोटे दुकानदारों पर होता है। जबकि बड़े धर्मकांटे और औद्योगिक इकाइयों में, जहां बडे़ कांटे होते हैं, वहां बड़े पैमाने पर घट तौली की आशंकाओं के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जाता। गन्ना तौल केंद्र पर घट तौली के मामले लगातार सामने आते हैं। लेकिन आज तक मिलों के भीतर कभी भी इसकी जांच नहीं की गई।
आरटीआई में खुलासा:
सचल वैन दौराला शुगर मिल के कैंपस में धूल फांक रही है। इस संबंध में जब व्यापारी नेता लोकेश अग्रवाल ने आरटीआई के तहत सूचना मांगी तो उप नियंत्रक विधिक माप विज्ञान मेरठ मंडल ने इसके वर्तमान में कार्यरत न होने की जानकारी दी। लेकिन यह कहां है और किसके अंडर में है, यह नहीं बताया। जब दोबारा जानकारी मांगी तो आरटीआई के नियमों के विपरीत सूचना बताते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया गया।
बॉक्स:
छोटी सी खबर बना दो:
उप नियंत्रक कृष्ण कुमार से जब इस सचल वैन को लेकर बात की गई तो वह उखड़ गए। बोले जिसने तुम्हें यह खबर दी है और आरटीआई में हमारा जवाब सौंपा है, उसके आधार पर छोटी सी खबर बना दो। क्यों चक्कर में पड़ रहे हैं। इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया।