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राजनीति का रणक्षेत्र बना मेरठ
Meerut
Updated Sat, 20 Jul 2013 05:32 AM IST
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मेरठ। वैसे तो पश्चिम की राजनीति का मेरठ हमेशा से ही गढ़ रहा है, लेकिन अब राष्ट्रीय राजनीति में भी मेरठ की अलग पहचान होती जा रही है। भाजपा के दिग्गज अमित शाह का मेरठ आना और उसके बाद कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री का यहां पहुंचकर हुंकार भरना लोकसभा चुनाव के समीकरणों को बया कर रहा है। सपा, बसपा और रालोद के भी तमाम दिग्गज यहां का दौरा करते रहे हैं। लैपटॉप वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री समेत सपा के अधिकांश वरिष्ठ नेता मेरठ में होंगे। चौ. अजित सिंह भी हाईकोर्ट बेंच और हवाई अड्डे के सहारे मेरठ से रालोद की जमीन तैयार कर रहे हैं।
मिशन 2014 के लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। उत्तर प्रदेश पर सभी दलों की निगाहें हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश पर भी खासी जोर-आजमाइश की जा रही है। भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी खोई जमीन तलाश रही है, तो कांग्रेस पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को और बेहतर करना चाहती है। भाजपा में नरेंद्र मोदी को चेहरा बनाने के बाद चुनाव में हिंदुत्व का मुद्दा अहम हो उठा और इसकी टक्कर पर कांग्रेस मुस्लिमों का ध्रुवीकरण चाहती है। कहा जा रहा है कि विशेष रणनीति के तहत मेरठ की संवेदनशीलता को देखकर भाजपा ने अमित शाह को लखनऊ के बाद मेरठ भेजा। यहां तक कि अमित शाह अयोध्या भी मेरठ के बाद ही गए थे। भाजपा की इसी रणनीति को टक्कर देने की नीयत से अमित शाह की काट बनाकर कांग्रेस में लाए गए मधुसूदन मिस्त्री मेरठ पहुंचे। मेरठ के महत्व को खुद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने सम्मेलन में स्वीकारा और कहा कि मेरठ राजनीति का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। इसीलिए कांग्रेस ने अपना जोन कार्यालय मेरठ में बनाया है।
ऐसा नहीं है कि सपा, बसपा और रालोद इस मामले में पीछे हैं। रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह ने लोकसभा चुनावों से पहले फिर हाईकोर्ट बेंच और हवाई अड्डे के मामले को भुनाने की कोशिश की है। रालोद इसके बहाने पश्चिम की अपने प्रभाव की सभी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाए है। बसपा की मुखिया पश्चिम की ही रहने वाली हैं। बसपा भी मेरठ में गतिविधियां बनाए हुए है, ताकि पश्चिम सहित पूरे प्रदेश में बेहतर संदेश जाए। सपा से प्रदेश सरकार की ओर से कद्दावर मंत्री आजम खां मेरठ के प्रभारी हैं। इतना नहीं चार लोकसभा सीटों के लिए प्रभारी बनाए गए सपा के मंत्री रामसकल गुर्जर कई बार मेरठ आ चुके हैं। अब लैपटॉप वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया मेरठ में आएंगे। इस कार्यक्रम के बहाने सपा लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के दो दिग्गजों के मेरठ से अभियान शुरू करने की रणनीति पर निगाह है।
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मिशन 2014 के लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। उत्तर प्रदेश पर सभी दलों की निगाहें हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश पर भी खासी जोर-आजमाइश की जा रही है। भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी खोई जमीन तलाश रही है, तो कांग्रेस पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को और बेहतर करना चाहती है। भाजपा में नरेंद्र मोदी को चेहरा बनाने के बाद चुनाव में हिंदुत्व का मुद्दा अहम हो उठा और इसकी टक्कर पर कांग्रेस मुस्लिमों का ध्रुवीकरण चाहती है। कहा जा रहा है कि विशेष रणनीति के तहत मेरठ की संवेदनशीलता को देखकर भाजपा ने अमित शाह को लखनऊ के बाद मेरठ भेजा। यहां तक कि अमित शाह अयोध्या भी मेरठ के बाद ही गए थे। भाजपा की इसी रणनीति को टक्कर देने की नीयत से अमित शाह की काट बनाकर कांग्रेस में लाए गए मधुसूदन मिस्त्री मेरठ पहुंचे। मेरठ के महत्व को खुद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने सम्मेलन में स्वीकारा और कहा कि मेरठ राजनीति का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। इसीलिए कांग्रेस ने अपना जोन कार्यालय मेरठ में बनाया है।
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ऐसा नहीं है कि सपा, बसपा और रालोद इस मामले में पीछे हैं। रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह ने लोकसभा चुनावों से पहले फिर हाईकोर्ट बेंच और हवाई अड्डे के मामले को भुनाने की कोशिश की है। रालोद इसके बहाने पश्चिम की अपने प्रभाव की सभी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाए है। बसपा की मुखिया पश्चिम की ही रहने वाली हैं। बसपा भी मेरठ में गतिविधियां बनाए हुए है, ताकि पश्चिम सहित पूरे प्रदेश में बेहतर संदेश जाए। सपा से प्रदेश सरकार की ओर से कद्दावर मंत्री आजम खां मेरठ के प्रभारी हैं। इतना नहीं चार लोकसभा सीटों के लिए प्रभारी बनाए गए सपा के मंत्री रामसकल गुर्जर कई बार मेरठ आ चुके हैं। अब लैपटॉप वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया मेरठ में आएंगे। इस कार्यक्रम के बहाने सपा लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस के दो दिग्गजों के मेरठ से अभियान शुरू करने की रणनीति पर निगाह है।
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