{"_id":"5bf6fc88bdec2241ae4f4fa4","slug":"91542913160-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजनौर में रकबा बढ़ने के बावजूद घटा गन्ने का उत्पादन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजनौर में रकबा बढ़ने के बावजूद घटा गन्ने का उत्पादन
Updated Fri, 23 Nov 2018 12:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर में रकबा बढ़ने के बावजूद घटा गन्ने का उत्पादन
बिजनौर। इस साल रकबा बढ़ने के बाद भी जिले की प्रमुख फसल गन्ने का उत्पादन कम रहा है। प्रति हेक्टेयर 15 फीसदी तक कमी ने गन्ना उत्पादन बढ़ने के सारे दावों को गलत साबित कर दिया है। इसका असर सीधे चीनी उत्पादन पर पड़ेगा, जो मिलों के लिए तो चिंता का विषय है ही, लेकिन किसान भी परेशान हैं।
गन्ना वेस्ट यूपी के किसानों की मुख्य फसल है और काफी हद तक इसी पर बाजार और किसानों की अर्थव्यवस्था निर्भर करती है। जिले के किसानों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए ट्रैंच विधि और उन्नत प्रजाति के गन्ने को अपनाकर उत्पादन को बढ़ाया। पिछले सालों में इससे जिले के किसानों की आमदनी भी बढ़ी। बीते साल जिले में दस करोड़ क्विंटल से भी अधिक गन्ना पैदा हुआ। हालांकि बंपर फसल और चीनी के उत्पादन ने बाजार में मंदी का असर पैदा किया। किसानों को मिलों में गन्ना आपूर्ति करने में भी बहुत समस्याएं आईं।
लेकिन इसके बाद भी किसानों ने गन्ने का रकबा कम करने के बजाए और बढ़ा दिया। कुछ चीनी मिलों ने किसानों से गन्ना रकबा कम करने की अपील भी की, पर किसानों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। गन्ना रकबा बढ़ने के साथ ही इस साल गन्ना उत्पादन और चीनी के दाम और बढ़ने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन इस साल औसत उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम निकल रहा है। गन्ना विभाग के सर्वे के अनुसार पिछले साल गन्ना उत्पादन 843.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, लेकिन इस बार उत्पादन 833.96 प्रति क्विंटल है, जबकि किसान उत्पादन को इससे बहुत कम बता रहे हैं। कुछ मिल क्षेत्रों में तो गन्ने का औसत उत्पादन 15 प्रतिशत तक कम है।
विज्ञापन
-------
चीनी मिल 2017 रकबा आपूर्ति 2018 रकबा
बिजनौर 8015 4007000 8105
धामपुर 43508 22476000 45123
स्योहारा 23796 19978000 24820
नजीबाबाद 16922 5385000 17102
बुंदकी 27470 11775000 27963
चांदपुर 14752 6427000 15441
बिलाई 22528 12997000 22981
बरकातपुर 24430 12383000 25432
बहादरपुर 26515 11269000 28388
नोट: आपूर्ति क्विंटल, रकबा हेक्टेयर में है।
----------
साल गन्ना उत्पादन
2011-12 576.88
2012-13 584.72
2013-14 599.32
2014-15 657.44
2015-16 686.56
2016-17 784.04
2017-18 843.50
2018-19 833.96 अब तक
नोट: गन्ना उत्पादन क्विंटल प्रति हेक्टेयर में है।
------------
पेराई को पिछले साल के बराबर गन्ना नहीं: परोपकार सिंह
गन्ना उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम है। चीनी मिल क्षेत्र में रकबा दो प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन उत्पादन 15 प्रतिशत कम होने का अनुमान है। पिछले साल मिल ने एक करोड़ 30 लाख क्विंटल गन्ना पेरा था, इस साल एक करोड़ 20 लाख तक भी पहुंचना मुश्किल है।
-परोपकार सिंह, गन्ना प्रबंधक, बिलाई चीनी मिल।
------------
गन्ने की फसल में नुकसान : दिगंबर सिंह
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार गन्ना उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत तक कम है। इस बार गन्ने की फसल से किसानों को नुकसान है। प्रदेश सरकार ने अभी गन्ना मूल्य तय नहीं किया है। प्रदेश सरकार गन्ने के कम उत्पादन को देखते हुए गन्ने का दाम कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करे।
विज्ञापन
बिजनौर। इस साल रकबा बढ़ने के बाद भी जिले की प्रमुख फसल गन्ने का उत्पादन कम रहा है। प्रति हेक्टेयर 15 फीसदी तक कमी ने गन्ना उत्पादन बढ़ने के सारे दावों को गलत साबित कर दिया है। इसका असर सीधे चीनी उत्पादन पर पड़ेगा, जो मिलों के लिए तो चिंता का विषय है ही, लेकिन किसान भी परेशान हैं।
गन्ना वेस्ट यूपी के किसानों की मुख्य फसल है और काफी हद तक इसी पर बाजार और किसानों की अर्थव्यवस्था निर्भर करती है। जिले के किसानों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए ट्रैंच विधि और उन्नत प्रजाति के गन्ने को अपनाकर उत्पादन को बढ़ाया। पिछले सालों में इससे जिले के किसानों की आमदनी भी बढ़ी। बीते साल जिले में दस करोड़ क्विंटल से भी अधिक गन्ना पैदा हुआ। हालांकि बंपर फसल और चीनी के उत्पादन ने बाजार में मंदी का असर पैदा किया। किसानों को मिलों में गन्ना आपूर्ति करने में भी बहुत समस्याएं आईं।
विज्ञापन
लेकिन इसके बाद भी किसानों ने गन्ने का रकबा कम करने के बजाए और बढ़ा दिया। कुछ चीनी मिलों ने किसानों से गन्ना रकबा कम करने की अपील भी की, पर किसानों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। गन्ना रकबा बढ़ने के साथ ही इस साल गन्ना उत्पादन और चीनी के दाम और बढ़ने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन इस साल औसत उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम निकल रहा है। गन्ना विभाग के सर्वे के अनुसार पिछले साल गन्ना उत्पादन 843.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, लेकिन इस बार उत्पादन 833.96 प्रति क्विंटल है, जबकि किसान उत्पादन को इससे बहुत कम बता रहे हैं। कुछ मिल क्षेत्रों में तो गन्ने का औसत उत्पादन 15 प्रतिशत तक कम है।
विज्ञापन
-------
चीनी मिल 2017 रकबा आपूर्ति 2018 रकबा
बिजनौर 8015 4007000 8105
धामपुर 43508 22476000 45123
स्योहारा 23796 19978000 24820
नजीबाबाद 16922 5385000 17102
बुंदकी 27470 11775000 27963
चांदपुर 14752 6427000 15441
बिलाई 22528 12997000 22981
बरकातपुर 24430 12383000 25432
बहादरपुर 26515 11269000 28388
नोट: आपूर्ति क्विंटल, रकबा हेक्टेयर में है।
----------
साल गन्ना उत्पादन
2011-12 576.88
2012-13 584.72
2013-14 599.32
2014-15 657.44
2015-16 686.56
2016-17 784.04
2017-18 843.50
2018-19 833.96 अब तक
नोट: गन्ना उत्पादन क्विंटल प्रति हेक्टेयर में है।
------------
पेराई को पिछले साल के बराबर गन्ना नहीं: परोपकार सिंह
गन्ना उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम है। चीनी मिल क्षेत्र में रकबा दो प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन उत्पादन 15 प्रतिशत कम होने का अनुमान है। पिछले साल मिल ने एक करोड़ 30 लाख क्विंटल गन्ना पेरा था, इस साल एक करोड़ 20 लाख तक भी पहुंचना मुश्किल है।
-परोपकार सिंह, गन्ना प्रबंधक, बिलाई चीनी मिल।
------------
गन्ने की फसल में नुकसान : दिगंबर सिंह
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार गन्ना उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत तक कम है। इस बार गन्ने की फसल से किसानों को नुकसान है। प्रदेश सरकार ने अभी गन्ना मूल्य तय नहीं किया है। प्रदेश सरकार गन्ने के कम उत्पादन को देखते हुए गन्ने का दाम कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करे।