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खेत मालिक की जागरुकता ने दी पहचान-BAGHPAT
Updated Fri, 08 Jun 2018 01:20 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। एक बार फिर से सिनौली सुर्खियों में है। यहां सिनौली में चार हजार साल पुरानी मानव सभ्यता के दुर्लभ अवशेष मिले है। बृहस्पतिवार को उत्खनन स्थल पर मीडिया कर्मियों जमावड़ा लगा रहा, खोज से उत्साहित एएसआई अधिकारियों से बाइट लेने की होड़ के बीच भीड़ में किसान श्रीराम शर्मा भी खड़े हैं, जिनके खेत में यह अवशेष मिले हैं। यह उत्खनन उन्हीं की सजगता का परिणाम है। खेत में कापर के टुकड़े मिलने के तुरंत बाद उन्होंने इसकी जानकारी एएसआई अधिकारियों को दी, लगातार प्रयास कर उन्हें उत्खनन के लिए राजी किया।
श्रीराम शर्मा बताते हैं कि 2005 मेें उनके गांव में करीब 13 माह तक उत्खनन कार्य चला। वहां पर काफी महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेष और करीब 116 कंकाल मिले थे। इस उत्खनन से ग्रामीण भी जागरूक हुए। 2007 में डीआईजी विजय कुमार गुप्ता और इतिहासकार अमित राय जैन ने फिर सिनौली का निरीक्षण कर अन्य महत्वपूर्ण प्राचीन कालीन जानकारी मिलने की उम्मीद जताई थी। श्रीराम शर्मा ने बताया कि मार्च 2018 में वे अपनी भूमि पर खेत की डोल बना रहे थे, तो उन्हें कुछ कॉपर के टुकडे़ पड़े मिले तो इसकी सूचना पुरातत्व विभाग को दी, उस समय बरनावा लाक्षागृह में उत्खनन का कार्य चल रहा था। बजट की समस्या आई, अन्य चुनौतियां भी कम नहीं थी, लेकिन इनके प्रयास रंग लाए। आखिरकार एएसआई की टीम बरनावा से यहां पहुंची और उत्खनन शुरू कर दिया।
श्रीराम शर्मा कहते हैं कि अब सिनौली का नाम विश्व पटल पर सुर्खियों में है। उनकी इच्छा पूरी हुई और वह बहुत खुश हैं। उत्खनन के चलते उनका खेत खाली पड़ा है, वह बुवाई नहीं कर पाए लेकिन उन्हें इसके लिए मुआवजे की कोई इच्छा नहीं है। वह चाहते हैं कि आसपास भूमि पर खोदाई कराई जाए, ताकि और भी अवशेष प्राप्त हो सकते है।
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श्रीराम शर्मा बताते हैं कि 2005 मेें उनके गांव में करीब 13 माह तक उत्खनन कार्य चला। वहां पर काफी महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेष और करीब 116 कंकाल मिले थे। इस उत्खनन से ग्रामीण भी जागरूक हुए। 2007 में डीआईजी विजय कुमार गुप्ता और इतिहासकार अमित राय जैन ने फिर सिनौली का निरीक्षण कर अन्य महत्वपूर्ण प्राचीन कालीन जानकारी मिलने की उम्मीद जताई थी। श्रीराम शर्मा ने बताया कि मार्च 2018 में वे अपनी भूमि पर खेत की डोल बना रहे थे, तो उन्हें कुछ कॉपर के टुकडे़ पड़े मिले तो इसकी सूचना पुरातत्व विभाग को दी, उस समय बरनावा लाक्षागृह में उत्खनन का कार्य चल रहा था। बजट की समस्या आई, अन्य चुनौतियां भी कम नहीं थी, लेकिन इनके प्रयास रंग लाए। आखिरकार एएसआई की टीम बरनावा से यहां पहुंची और उत्खनन शुरू कर दिया।
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श्रीराम शर्मा कहते हैं कि अब सिनौली का नाम विश्व पटल पर सुर्खियों में है। उनकी इच्छा पूरी हुई और वह बहुत खुश हैं। उत्खनन के चलते उनका खेत खाली पड़ा है, वह बुवाई नहीं कर पाए लेकिन उन्हें इसके लिए मुआवजे की कोई इच्छा नहीं है। वह चाहते हैं कि आसपास भूमि पर खोदाई कराई जाए, ताकि और भी अवशेष प्राप्त हो सकते है।
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