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रिश्तेदारों की बात मान लेते तो बच जाती जान

Tue, 28 Aug 2018 02:12 AM IST
Updated Tue, 28 Aug 2018 02:12 AM IST
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रिश्तेदारों की बात मान लेते तो बच जाती जान
मेरठ। गगोल गांव में सोमवार दोपहर तक राजेंद्र के यहां हंसी खुशी का माहौल था। बहन, बेटियां, दामाद सब रिश्तेदार जमा थे। धार्मिक यात्रा पर जाने की तैयारी थी। लेकिन पल भर में ये खुशियां मातम में बदल गई। पूरे गांव में शोक छाया था।
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गगोल निवासी राजेंद्र ने बडे़ मन से धार्मिक यात्रा पर जाने की तैयारी की थी। सब रिश्तेदार पहुंच चुके थे। दोपहर के खाने के बाद शाम चार बजे तक निकलने का प्लान था। लेकिन उससे पहले ही ये हादसा हो गया। रिश्तेदार घटना स्थल की ओर दौड़ गए। महिलाओं, बच्चों में चीख पुकार मच गई। गांव के लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंचने लगे।
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परिजनों के अनुसार मंगलसेन की मां प्रकाशी नेत्रहीन हैं। पिता की मृत्यु हो चुकी है। उनको कोई संतान नहीं है। परिवार में पत्नी आरती गर्भवती है। अशोक के परिवार में तीन बेटे अर्जुन, अनिकेत, लविश हैं जबकि दो बेटियां ज्योति और तनु हैं। ये सब भी गगोल गांव आए हुए थे। हादसे के बाद इनका रो रोकर बुरा हाल था। राजेंद्र खुद इस हादसे से इतना दुखी थे कि उसके आंसू नहीं रुक रहे थे। धार्मिक स्थल पर जाना भी टाल दिया गया।
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...काश रिश्तेदारों की बात मान लेते
रिश्तेदार इंद्रजीत ने बताया कि मंगलसेन और अशोक को बाइक से जाने के लिए सब रिश्तेदारों ने मना किया था। कहा था कि जो सामान चाहिए वो रास्ते में ले लेना। लेकिन वे थोड़ी देर में आने की बात कहकर चले गए। उनके साथ राजेंद्र के बहनोई बागपत के निरोजपुर निवासी जयप्रकाश भी गए थे। लेकिन वे परतापुर में ही रुक गए। हादसे के बाद सब रिश्तेदारों को इस बात का मलाल था कि काश मंगलसेन और अशोक उनकी बात मान लेते। यदि वो रुक जाते तो ये हादसा ना होता।

व्यवस्था पर भी सवाल
इंद्रजीत ने बताया कि हादसे के बाद वहां पहुंची 108 एंबुलेंस घायल अशोक को पहले भूडबराल सीएचसी लेकर गईद्घ यदि एंबुलेंस से पहले ही उन्हें मेडिकल या जिला अस्पताल ले जाया जाता तो शायद वे बच जाते। हालांकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु होने की बात कही जा रही है। रिश्तेदारों का कहना है कि सरकार को व्यवस्था बनानी चाहिए कि घायल की हालत के अनुसार ही उन्हें सीधे बडे़ अस्पताल ले जाया जाए।

खास बातें:
हादसे में हापुड़ के दो लोगों की मौत की साइड खबर, हापुड़ के ध्यानार्थ
हादसे के बाद शोक में गगोल गांव
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