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मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर-कर्मचारियों ने लीक किया था एमबीबीएस का पेपर

Fri, 23 Mar 2018 01:47 AM IST
Updated Fri, 23 Mar 2018 01:47 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर-कर्मचारियों ने लीक किया था एमबीबीएस का पेपर
मेडिकल कॉलेज से लीक हुआ था एमबीबीएस का पेपर
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मेरठ। एमबीबीएस पेपर लीक मामले में सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। एसटीएफ की जांच में पेपर लीक करने के पीछे मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर और कई कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। इस मामले में एक डॉक्टर से पूछताछ की जा रही है। डॉक्टर पर बड़ी जिम्मेदारी वाला पद बताया जा रहा है। इसके अलावा कई दूसरे कर्मचारियों की भी तलाश चल रही है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक पूरे रैकेट का जल्द खुलासा हो सकता है।
एमबीबीएस के मेडिकल कॉलेज मेरठ, सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज, पिलखुवा के रामा मेडिकल कॉलेज, हापुड़ के सरस्वती मेडिकल कॉलेज और मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के सेकेंड और थर्ड ईयर की पांच फरवरी से परीक्षाएं शुरू हुई थीं। मेरठ और सहारनपुर के कॉलेज में सेल्फ सेंटर था। पिलखुवा का सेंटर एडेड कॉलेज आरएसएस पिलखुवा, हापुड़ का सेंटर एमएम डिग्री कॉलेज मोदीनगर और मुजफ्फरनगर का सेंटर जैन कन्या पीजी कॉलेज मुजफ्फरनगर में बनाया गया था।
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11 फरवरी को विवि के अधिकारियों के पास व्हाट्स एप पर कुछ सवाल भेजकर थर्ड ईयर के सेकेंड पार्ट सर्जरी का पेपर आउट होने की बात कही गई थी। कुलपति द्वारा बनाई गई आंतरिक कमेटी ने जांच में पेपर आउट मिलने पर आगे की सारी परीक्षाएं स्थगित कर दी थीं। इस मामले में जांच कमेटी का गठन हुआ था। कमेटी की जांच में एक सेल्फ सेंटर वाला कॉलेज शक के घेरे में आया था। इसके लिफाफे को देखकर इसे खोलने के बाद दोबारा चिपकाए जाने की आशंका लग रही थी। पूरे मामले में मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। लेकिन वो जांच आज तक भी आगे नहीं बढ़ सकी। विवि भी इसको लेकर अपनी जांच आगे नहीं बढ़ा पाया।
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इस बीच नया खुलासा
इसी बीच यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की कॉपियां बदलने के खेल का एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया तो पेपर लीक मामले में भी सुराग मिल गए। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर से सघन पूछताछ की जा रही है। ये डॉक्टर उसी कॉलेज का है, जिसका लिफाफा खोलकर दोबारा से चिपकाए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। इसी के साथ एसटीएफ की टीम ने छानबीन की तो कई कर्मचारी यूनिवर्सिटी का प्रकरण सामने आने के बाद से छुट्टी पर चले गए हैं। ये कर्मचारी इसी डॉक्टर से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इसी रैकेट द्वारा पेपर आउट कराने की बात सामने आ रही है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक एक-दो आरोपियों के पकड़े जाने के बाद पूरा मामला साफ हो जाएगा।
पांच लाख में पेपर बेचा
पूरे प्रकरण में सीसीएसयू के एक छात्र नेता का नाम भी पांच लाख रुपये में मुजफ्फरनगर में पेपर बेचने में सामने आया था। ऐसे में टीम इसकी भी तलाश में जुटी है। छात्र नेता से जुड़े कई दूसरे छात्रों के नाम भी इस रैकेट से जुड़ रहे हैं।

तो अब तक खुल जाता केस
एमबीबीएस का पेपर लीक हुए एक माह से ज्यादा हो गया। इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से मेडिकल थाने में तब ही रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी। शासन को भी अवगत कराया गया था। लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने कोई काम नहीं किया। यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई समिति तक से लिफाफों के बारे में भी रिपोर्ट नहीं ली गई। इसी कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसे में अब यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को भी एसटीएफ टीम पर ही भरोसा है। छात्रों का भी कहना है कि पेपर लीक मामले को एसटीएफ ही खोल सकती है।

खास बातें:
एसटीएफ के घेरे में आए मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और कर्मचारी
कई से चल रही पूछताछ, एसटीएफ कर सकती है कभी भी खुलासा
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