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भक्तामर पाठ में 81 परिवारों ने किया विधान
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत स्थित दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का आयोजन हो रहा है। मंगलवार को पांचवें दिन सर्वप्रथम विधानाचार्य सुदीप शास्त्री, विवेक शास्त्री ने शुभारंभ किया।
आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य अनुराग जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक का अनुराग जैन, शांतिधारा का अनुराग जैन, अमन जैन चंदन, नरेंद्र जैन, साहिल जैन, दीप प्रज्ज्वलन का अंजू जैन, आंचल जैन को मिला। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। इसमें सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए। आज 81 परिवारों की तरफ से विधान का आयोजन कराया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ चंदन भैया ने किया। पूज्य गुरु श्री निर्वाण भूषण जी ने कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा व समर्पण का भाव होना चाहिए। समर्पण से ही भक्ति का प्रादुर्भाव हुआ है। जैन धर्म में समर्पण का विशेष महत्व है। समर्पण विनय का प्रतीक है। जब श्रावक में भक्ति का जागरण होता है तो समर्पण का भाव स्वत: ही प्रकट होता है। आज के विधान का विसर्जन गुरुकुल के रंजीता जैन, सिद्धि जैन हस्तिनापुर ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन नरेंद्र जैन सपरिवार इंदौर ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन अलका जैन साधना जैन, सीमा जैन दिल्ली ने किया। मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम जैन, विपिन शर्मा आदि का विशेष सहयोग रहा। क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन दिल्ली, महामंत्री मुकेश जैन मेरठ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन मवाना, सह संयोजक मोतीलाल जैन लंदन, सुनील जैन मेरठ कैंट, आदिश्वर प्रसाद जैन मुजफ्फरनगर, राजीव जैन का सहयोग रहा।
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आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य अनुराग जैन, स्वर्ण कलश से अभिषेक का अनुराग जैन, शांतिधारा का अनुराग जैन, अमन जैन चंदन, नरेंद्र जैन, साहिल जैन, दीप प्रज्ज्वलन का अंजू जैन, आंचल जैन को मिला। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। इसमें सभी धर्म प्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए। आज 81 परिवारों की तरफ से विधान का आयोजन कराया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ चंदन भैया ने किया। पूज्य गुरु श्री निर्वाण भूषण जी ने कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा व समर्पण का भाव होना चाहिए। समर्पण से ही भक्ति का प्रादुर्भाव हुआ है। जैन धर्म में समर्पण का विशेष महत्व है। समर्पण विनय का प्रतीक है। जब श्रावक में भक्ति का जागरण होता है तो समर्पण का भाव स्वत: ही प्रकट होता है। आज के विधान का विसर्जन गुरुकुल के रंजीता जैन, सिद्धि जैन हस्तिनापुर ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन नरेंद्र जैन सपरिवार इंदौर ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन अलका जैन साधना जैन, सीमा जैन दिल्ली ने किया। मुकेश जैन, मनोज जैन, राजीव, सुभाष, प्रेम जैन, विपिन शर्मा आदि का विशेष सहयोग रहा। क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन दिल्ली, महामंत्री मुकेश जैन मेरठ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन मवाना, सह संयोजक मोतीलाल जैन लंदन, सुनील जैन मेरठ कैंट, आदिश्वर प्रसाद जैन मुजफ्फरनगर, राजीव जैन का सहयोग रहा।
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