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सूरजकुंड में 75 का अंतिम संस्कार
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लगातार दूसरे दिन भी मौतों का आंकड़ा 75 पार
मेरठ। ऑक्सीजन की कमी और समय पर उपचार न मिलने के कारण मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। मंगलवार को भी सूरजकुंड श्मशान घाट पर 75 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। शवों का अंतिम संस्कार श्मशान के मुख्य द्वार और गंगा मोटर कमेटी के कार्यक्रम के सामने भी किया जाने लगा है। श्मशान के अंदर बनी सड़क पर भी शवों का अंतिम संस्कार हुआ।
रोडवेज स्थित गंगा मोटर कमेटी के कार्यालय के अनुसार लोग सुबह 6:00 बजे से ही अंतिम संस्कार के लिए सामान लेने पहुंचने लगे थे। मंगलवार को 75 लोगों की मौत हुई। इस बीच नगर आयुक्त के आदेश के बावजूद यहां 27 प्लेटफार्म बनाने का काम और 24 घटे में अस्थियां चुगने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। आचार्य समय न होने की बात कह रहे हैं। आचार्य का कहना 4 से 5 लोगों के लिए 75 शवों का प्रतिदिन अंतिम संस्कार करना परिश्रम भरा कार्य है। इसके बाद अस्थियों को आचार्य नही हटवा सकते।
उधर, नगर निगम कर्मचारी भी एक दिन सुराजकुंड पर सफाई व्यवस्था की खानापूर्ति कर गायब हो गए हैं। व्यवस्था बनने से पूर्व ही बिगड़ना शुरू हो गई है।
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दो दिन में बढ़ा दिए लकड़ी के रेट
श्मशान घाट पर लकड़ी के दो टाल हैं। एक कुछ दिनों से बंद है। दूसरी ने दोबारा लकड़ी के दाम बढ़ा दिए हैं। एसीएम के निरीक्षण के बाद लकड़ी का भाव 700 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। बावजूद इसके मंगलवार को रेट बढ़ाकर 800 से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया। शहर में लकड़ी का रेट 600 रुपये प्रति क्विंटल है।
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बेटी को आठ अस्पतालों में नहीं मिला इलाज
कंपकपाती आवाज में 80 साल के अंसल कोर्टयार्ड निवासी विजय कुमार शर्मा ने बताया कि रात आठ अस्पतालों में बेटी के इलाज के लिए ले गए थे। कई जगह इनकार के बावजूद मेडिकल कॉेलज में सुबह पता लगा कि उसकी मौत हो गई। 24 घंटे में ही अब श्मशान में है।
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मेडिकल में इलाज नहीं अस्पताल कर रहे इंकार
गंगा कॉलोनी बागपत रोड मधुबाला की चिकित्सा सुविधा के अभाव में मृत्यु हो गई। सूरजकुंड पहुंचे भतीजे अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल में इलाज नहीं है। मरीज ऑक्सूजन सिलिंडर कहाम से लाए। हर तरफ मनमानी और कालाबाजारी चल रही है।
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महामारी में ऑक्सीजन और इंजेक्शन के लिए मारामारी
मेरठ। कोरोना महामारी में शहर के अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट है। ऑक्सीजन मिल जाती है तो जिंदगी बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मारामारी हो रही है। समाजसेवी, रंगकर्मी और दवा विक्रेता प्रह्लाद नगर निवासी अजय सेठी इसी का शिकार हो गए।
गढ़ रोड स्थित न्यूटिमा अस्पताल में भर्ती सेठी की 31 वर्षीय बेटी जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है। सोमवार रात उन्होंने ऑक्सीजन के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इससे बाद प्रशासन से मदद मिली। डॉक्टर ने रेमेडेसिविर इंजेक्शन लिख दिया। मंगलवार को वे स्वास्थ विभाग अधिकारियों को फोन मिलाते रहे, किसी का फोन नहीं उठा। बेटी की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में वह ड्रग्स इंस्पेक्टर के घर पहुंच गए। यहां इंजेक्शन तो दूर, जवाब ही नहीं मिला।
भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा व मुंबई से उनके टीवी कलाकार दोस्त गिरीश थापर ने उनकी मदद की। गिरीश थापर ने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की, जबकि शारदा ने डीएम व सीएमओ से बात की। सेठी ने बताया शाम तक दो रेमेडेसिविर का इंतजाम हो पाया। इंजेक्शन प्रशासन द्वारा सीधे न्यूटिमा अस्पताल को दिए गए। सेठी का कहना है कि आम जनता को ऑक्सीजन व इंजेक्शन कैसे मिलेगा। रेमेडेसिविर के लिए कहीं काउंटर नहीं हैं। सभी अस्पतालों में रेमेडेसिविर के कुछ इंजेक्शन तो उपलब्ध रहने ही चाहिए।
व्यापारी नेता शैंकी वर्मा ने भी ऑक्सीजन व रेमेडेसिविर को लेकर मचे हाहाकार पर चिंता जताई। कहा, प्रशासन को जल्द लोगों को सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए।
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मेरठ। ऑक्सीजन की कमी और समय पर उपचार न मिलने के कारण मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। मंगलवार को भी सूरजकुंड श्मशान घाट पर 75 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। शवों का अंतिम संस्कार श्मशान के मुख्य द्वार और गंगा मोटर कमेटी के कार्यक्रम के सामने भी किया जाने लगा है। श्मशान के अंदर बनी सड़क पर भी शवों का अंतिम संस्कार हुआ।
रोडवेज स्थित गंगा मोटर कमेटी के कार्यालय के अनुसार लोग सुबह 6:00 बजे से ही अंतिम संस्कार के लिए सामान लेने पहुंचने लगे थे। मंगलवार को 75 लोगों की मौत हुई। इस बीच नगर आयुक्त के आदेश के बावजूद यहां 27 प्लेटफार्म बनाने का काम और 24 घटे में अस्थियां चुगने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। आचार्य समय न होने की बात कह रहे हैं। आचार्य का कहना 4 से 5 लोगों के लिए 75 शवों का प्रतिदिन अंतिम संस्कार करना परिश्रम भरा कार्य है। इसके बाद अस्थियों को आचार्य नही हटवा सकते।
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उधर, नगर निगम कर्मचारी भी एक दिन सुराजकुंड पर सफाई व्यवस्था की खानापूर्ति कर गायब हो गए हैं। व्यवस्था बनने से पूर्व ही बिगड़ना शुरू हो गई है।
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दो दिन में बढ़ा दिए लकड़ी के रेट
श्मशान घाट पर लकड़ी के दो टाल हैं। एक कुछ दिनों से बंद है। दूसरी ने दोबारा लकड़ी के दाम बढ़ा दिए हैं। एसीएम के निरीक्षण के बाद लकड़ी का भाव 700 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। बावजूद इसके मंगलवार को रेट बढ़ाकर 800 से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया। शहर में लकड़ी का रेट 600 रुपये प्रति क्विंटल है।
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बेटी को आठ अस्पतालों में नहीं मिला इलाज
कंपकपाती आवाज में 80 साल के अंसल कोर्टयार्ड निवासी विजय कुमार शर्मा ने बताया कि रात आठ अस्पतालों में बेटी के इलाज के लिए ले गए थे। कई जगह इनकार के बावजूद मेडिकल कॉेलज में सुबह पता लगा कि उसकी मौत हो गई। 24 घंटे में ही अब श्मशान में है।
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मेडिकल में इलाज नहीं अस्पताल कर रहे इंकार
गंगा कॉलोनी बागपत रोड मधुबाला की चिकित्सा सुविधा के अभाव में मृत्यु हो गई। सूरजकुंड पहुंचे भतीजे अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल में इलाज नहीं है। मरीज ऑक्सूजन सिलिंडर कहाम से लाए। हर तरफ मनमानी और कालाबाजारी चल रही है।
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महामारी में ऑक्सीजन और इंजेक्शन के लिए मारामारी
मेरठ। कोरोना महामारी में शहर के अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट है। ऑक्सीजन मिल जाती है तो जिंदगी बचाने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मारामारी हो रही है। समाजसेवी, रंगकर्मी और दवा विक्रेता प्रह्लाद नगर निवासी अजय सेठी इसी का शिकार हो गए।
गढ़ रोड स्थित न्यूटिमा अस्पताल में भर्ती सेठी की 31 वर्षीय बेटी जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है। सोमवार रात उन्होंने ऑक्सीजन के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट की। इससे बाद प्रशासन से मदद मिली। डॉक्टर ने रेमेडेसिविर इंजेक्शन लिख दिया। मंगलवार को वे स्वास्थ विभाग अधिकारियों को फोन मिलाते रहे, किसी का फोन नहीं उठा। बेटी की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में वह ड्रग्स इंस्पेक्टर के घर पहुंच गए। यहां इंजेक्शन तो दूर, जवाब ही नहीं मिला।
भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा व मुंबई से उनके टीवी कलाकार दोस्त गिरीश थापर ने उनकी मदद की। गिरीश थापर ने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की, जबकि शारदा ने डीएम व सीएमओ से बात की। सेठी ने बताया शाम तक दो रेमेडेसिविर का इंतजाम हो पाया। इंजेक्शन प्रशासन द्वारा सीधे न्यूटिमा अस्पताल को दिए गए। सेठी का कहना है कि आम जनता को ऑक्सीजन व इंजेक्शन कैसे मिलेगा। रेमेडेसिविर के लिए कहीं काउंटर नहीं हैं। सभी अस्पतालों में रेमेडेसिविर के कुछ इंजेक्शन तो उपलब्ध रहने ही चाहिए।
व्यापारी नेता शैंकी वर्मा ने भी ऑक्सीजन व रेमेडेसिविर को लेकर मचे हाहाकार पर चिंता जताई। कहा, प्रशासन को जल्द लोगों को सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए।