{"_id":"5c9fc932bdec2214023357a3","slug":"71553975602-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डिग्री दलाली प्रकरण में गोपनीय विभाग ये जुटाया रिकॉर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डिग्री दलाली प्रकरण में गोपनीय विभाग ये जुटाया रिकॉर्ड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डिग्री दलाली प्रकरण में गोपनीय विभाग से जुटाया रिकॉर्ड
- समिति के सदस्यों ने ली पूरी जानकारी, इमरजेंसी में बनने वाले प्रमाण पत्रों का रखना होगा रिकॉर्ड
मेरठ। सीसीएसयू में डिग्री जारी करने में दलाली उजागर होने के बाद जांच के लिए बनाई गई समिति ने शनिवार को गोपनीय विभाग से रिकॉर्ड जुटाया। समिति के सदस्यों ने सीधे आने वाली डिग्री-मार्कशीट और अन्य प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड रोजाना देने को कहा है। अगर किसी छात्र-छात्रा का इमरजेंसी में अधिकारियों के निर्देश पर भी प्रमाण पत्र बनवाया जाएगा तो उसका भी रिकॉर्ड रखना होगा। समिति केसदस्य पूरी जानकारी जुटाने केबाद कुलपति को अपनी रिपोर्ट सौपेंगे। पूरी प्रक्रिया में कैसे सुधार हो इसको लेकर भी मंथन किया जा रहा है।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा द्वारा पूरे प्रकरण की जांच के लिए बनाई गई समिति की सदस्य सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज की डायरेक्टर प्रो. जयमाला और चीफ प्रॉक्टर प्रो. बीरपाल सिंह ने कर्मचारियों से स्पष्ट किया कि सीधे कोई कार्य नहीं किया जाएगा। फॉर्म छात्र समस्या निवारण केंद्र से ही आने चाहिए। इसकेसाथ ही उन्होंने कर्मचारियों से साफ कहा कि छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए जाने का एक निश्चित समय सुनिश्चित करें ताकि उनको परेशानी न हो। जो डिग्रियां और मार्कशीट पूरे महीने जारी की गई हैं, उनकेसभी के फॉर्मों का रिकॉर्ड भी निकलवाया जा रहा है। प्रो. जयमाला और प्रो. बीरपाल सिंह ने बताया कि गोपनीय विभाग में क्या-क्या खामियां हैं। क्या सुधार हो सकता है। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। किन-किन कर्मचारियों ने डिग्री जारी करने में लापरवाही बरती है, उस सबकी की भी गहनता से जांच की जा रही है।
ये है मामला
25 मार्च को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अमर उजाला ने डिग्री और प्रमाण पत्रों में दलाली का राजफाश किया था। पूरे मामले को कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने गंभीरता से लेते हुए डिग्री और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के तमाम दस्तावेजों की जांच कराते हुए तत्काल प्रभाव से दो स्थायी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। आठ से दस कर्मचारियों के खिलाफ जांच को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति पूरे मामले की जांच कर तथ्य जुटा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
- समिति के सदस्यों ने ली पूरी जानकारी, इमरजेंसी में बनने वाले प्रमाण पत्रों का रखना होगा रिकॉर्ड
मेरठ। सीसीएसयू में डिग्री जारी करने में दलाली उजागर होने के बाद जांच के लिए बनाई गई समिति ने शनिवार को गोपनीय विभाग से रिकॉर्ड जुटाया। समिति के सदस्यों ने सीधे आने वाली डिग्री-मार्कशीट और अन्य प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड रोजाना देने को कहा है। अगर किसी छात्र-छात्रा का इमरजेंसी में अधिकारियों के निर्देश पर भी प्रमाण पत्र बनवाया जाएगा तो उसका भी रिकॉर्ड रखना होगा। समिति केसदस्य पूरी जानकारी जुटाने केबाद कुलपति को अपनी रिपोर्ट सौपेंगे। पूरी प्रक्रिया में कैसे सुधार हो इसको लेकर भी मंथन किया जा रहा है।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा द्वारा पूरे प्रकरण की जांच के लिए बनाई गई समिति की सदस्य सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज की डायरेक्टर प्रो. जयमाला और चीफ प्रॉक्टर प्रो. बीरपाल सिंह ने कर्मचारियों से स्पष्ट किया कि सीधे कोई कार्य नहीं किया जाएगा। फॉर्म छात्र समस्या निवारण केंद्र से ही आने चाहिए। इसकेसाथ ही उन्होंने कर्मचारियों से साफ कहा कि छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए जाने का एक निश्चित समय सुनिश्चित करें ताकि उनको परेशानी न हो। जो डिग्रियां और मार्कशीट पूरे महीने जारी की गई हैं, उनकेसभी के फॉर्मों का रिकॉर्ड भी निकलवाया जा रहा है। प्रो. जयमाला और प्रो. बीरपाल सिंह ने बताया कि गोपनीय विभाग में क्या-क्या खामियां हैं। क्या सुधार हो सकता है। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। किन-किन कर्मचारियों ने डिग्री जारी करने में लापरवाही बरती है, उस सबकी की भी गहनता से जांच की जा रही है।
विज्ञापन
ये है मामला
25 मार्च को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अमर उजाला ने डिग्री और प्रमाण पत्रों में दलाली का राजफाश किया था। पूरे मामले को कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने गंभीरता से लेते हुए डिग्री और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के तमाम दस्तावेजों की जांच कराते हुए तत्काल प्रभाव से दो स्थायी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। आठ से दस कर्मचारियों के खिलाफ जांच को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति पूरे मामले की जांच कर तथ्य जुटा रही है।
विज्ञापन