{"_id":"5b296e5c4f1c1bf67a8b60ee","slug":"71529441884-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दीवान इंस्टीट्यूट पर कब्जा लेगा प्रशासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दीवान इंस्टीट्यूट पर कब्जा लेगा प्रशासन
Updated Wed, 20 Jun 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दीवान इंस्टीट्यूट पर कब्जा लेगा प्रशासन
मेरठ। शहर के प्रथम मेयर अरुण जैन और उनकी इलेक्ट्रा इंडिया लिमिटेड से सभी परिचित हैं। अरुण जैन की मृत्यु के बाद उनकी सभी कंपनी और प्रोजेक्ट बंद हो गए थे। लेकिन इलेक्ट्रा इंडिया अब एक बार फिर चर्चा में आया है। इसका कारण परतापुर क्षेत्र की तरफ कुंडा में इलेक्ट्रा इंडिया लिमिटेड की संपत्ति का कारपोरेट एक्ट के तहत निस्तारण न करते हुए सीधे बेचने का है। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर शासकीय समापक उत्तर प्रदेश द्वारा जिलाधिकारी को पत्र लिखकर दीवान ग्रुप को दी गयी इलेक्ट्रा इंडिया लिमिटेड की संपत्तियों पर कब्जा लेने का आदेश दिया गया है।
ये है पूरा मामला
पूर्व मेयर अरुण जैन की जीवित रहते ही उनकी इलेक्ट्रा इंडिया कंपनी घाटे में जाना शुरू हो गयी थी। बताया जाता है कि कंपनी के ऊपर औद्योगिक विकास निगम की बड़ी देनदारी भी थी। इस बीच अरुण जैन की मृत्यु हो गयी और उनकी संपत्तियों का निस्तारण कंपनी अधिनियम के तहत न करते हुए सीधे कर दिया गया। इसमें एक व्यक्ति जिसके नाम पॉवर आफ अटार्नी थी, उसके हस्ताक्षर से ही संपत्तियों को बेच दिया गया।
ऐसी ही कुछ संपत्ति जोकि परतापुर क्षेत्र के गांव कुंडा के समीप थी, उन्हें दीवान ग्रुप को बेचा गया। इन्हें वर्ष 2002 में तीन रजिस्ट्री के माध्यम से बेचना दर्शाया गया। इन संपत्तियों में प्लॉट नंबर 160, 165, 130/1, 280, 275, 279 और 290 शामिल हैं। जब यह मामला कारपोरेट कार्य मंत्रालय से जुड़े कार्यालय शासकीय समापक के पास पहुंचा तो उन्होंने इसके लिए हाईकोर्ट इलाहाबाद में रिट दायर की। जिस पर लगातार सुनवाई के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा 21 मई को आदेश जारी करते हुए कहा गया कि इन सभी संपत्तियों पर दीवान दौलत राम एजुकेशन फाउंडेशन का अनाधिकृत कब्जा है। हालांकि इस मामले में दीवान ग्रुप की तरफ से भी जवाब दाखिल करने के साथ साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। लेकिन उन साक्ष्यों को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया और जिलाधिकारी को आदेश दिया कि वह पुलिस की सहायता से शासकीय समापक को उक्त संपत्तियों पर कब्जा दिलाए।
विज्ञापन
शासकीय समापक ने लिखा डीएम को पत्र
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के आदेश की प्रति के साथ शासकीय समापक उत्तर प्रदेश इलाहाबाद वीपी काटकर द्वारा जिलाधिकारी को 31 मई को पत्र लिखा गया। जिसमें हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इलेक्ट्रा इंडिया कंपनी की उन संपत्तियों को जो कि दीवान ग्रुप को बेचना दर्शाया गया है, उन पर कब्जा दिलाने को कहा है। शासकीय समापक द्वारा 24 मई को भी जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया था। लेकिन कोई कार्रवाई न होने के बाद एक बार फिर पत्र भेजा गया है। इस पत्र को जिलाधिकारी कार्यालय से अपर जिलाधिकारी प्रशासन को कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
शासकीय समापक करेगा निस्तारण
विभागीय सूत्रों के अनुसार इन संपत्तियों पर कब्जा लेने के बाद कार्यालय शासकीय समापक स्वयं निस्तारण करेगा। इसमें जो भी सरकारी और गैर सरकारी देनदारियां यदि हैं तो उनको तय करते हुए तब संपत्तियों का निस्तारण होगा।
शीघ्र कार्रवाई तय होगी
ऑफिशियल लिक्विडेटर के पत्र का अभी पूरी तरह अध्ययन नहीं किया है। पत्र और हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कराने के बाद इस मामले में शीघ्र ही कार्रवाई तय की जाएगी। -रामचंद्र, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
खास बातें:
इलेक्ट्रा इंडिया लिमिटेड की परतापुर क्षेत्र स्थित संपत्ति को खरीदा था दीवान ग्रुप ने
कारपोरेट एक्ट के तहत पंजीकृत इलेक्ट्रा का बंदी के समय नहीं हुआ नियमानुसार निस्तारण
हाईकोर्ट से अब आया आदेश, दीवान ग्रुप से प्रशासन लेगा संपत्ति पर कब्जा
विज्ञापन
मेरठ। शहर के प्रथम मेयर अरुण जैन और उनकी इलेक्ट्रा इंडिया लिमिटेड से सभी परिचित हैं। अरुण जैन की मृत्यु के बाद उनकी सभी कंपनी और प्रोजेक्ट बंद हो गए थे। लेकिन इलेक्ट्रा इंडिया अब एक बार फिर चर्चा में आया है। इसका कारण परतापुर क्षेत्र की तरफ कुंडा में इलेक्ट्रा इंडिया लिमिटेड की संपत्ति का कारपोरेट एक्ट के तहत निस्तारण न करते हुए सीधे बेचने का है। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर शासकीय समापक उत्तर प्रदेश द्वारा जिलाधिकारी को पत्र लिखकर दीवान ग्रुप को दी गयी इलेक्ट्रा इंडिया लिमिटेड की संपत्तियों पर कब्जा लेने का आदेश दिया गया है।
ये है पूरा मामला
पूर्व मेयर अरुण जैन की जीवित रहते ही उनकी इलेक्ट्रा इंडिया कंपनी घाटे में जाना शुरू हो गयी थी। बताया जाता है कि कंपनी के ऊपर औद्योगिक विकास निगम की बड़ी देनदारी भी थी। इस बीच अरुण जैन की मृत्यु हो गयी और उनकी संपत्तियों का निस्तारण कंपनी अधिनियम के तहत न करते हुए सीधे कर दिया गया। इसमें एक व्यक्ति जिसके नाम पॉवर आफ अटार्नी थी, उसके हस्ताक्षर से ही संपत्तियों को बेच दिया गया।
विज्ञापन
ऐसी ही कुछ संपत्ति जोकि परतापुर क्षेत्र के गांव कुंडा के समीप थी, उन्हें दीवान ग्रुप को बेचा गया। इन्हें वर्ष 2002 में तीन रजिस्ट्री के माध्यम से बेचना दर्शाया गया। इन संपत्तियों में प्लॉट नंबर 160, 165, 130/1, 280, 275, 279 और 290 शामिल हैं। जब यह मामला कारपोरेट कार्य मंत्रालय से जुड़े कार्यालय शासकीय समापक के पास पहुंचा तो उन्होंने इसके लिए हाईकोर्ट इलाहाबाद में रिट दायर की। जिस पर लगातार सुनवाई के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा 21 मई को आदेश जारी करते हुए कहा गया कि इन सभी संपत्तियों पर दीवान दौलत राम एजुकेशन फाउंडेशन का अनाधिकृत कब्जा है। हालांकि इस मामले में दीवान ग्रुप की तरफ से भी जवाब दाखिल करने के साथ साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। लेकिन उन साक्ष्यों को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया और जिलाधिकारी को आदेश दिया कि वह पुलिस की सहायता से शासकीय समापक को उक्त संपत्तियों पर कब्जा दिलाए।
विज्ञापन
शासकीय समापक ने लिखा डीएम को पत्र
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के आदेश की प्रति के साथ शासकीय समापक उत्तर प्रदेश इलाहाबाद वीपी काटकर द्वारा जिलाधिकारी को 31 मई को पत्र लिखा गया। जिसमें हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इलेक्ट्रा इंडिया कंपनी की उन संपत्तियों को जो कि दीवान ग्रुप को बेचना दर्शाया गया है, उन पर कब्जा दिलाने को कहा है। शासकीय समापक द्वारा 24 मई को भी जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया था। लेकिन कोई कार्रवाई न होने के बाद एक बार फिर पत्र भेजा गया है। इस पत्र को जिलाधिकारी कार्यालय से अपर जिलाधिकारी प्रशासन को कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
शासकीय समापक करेगा निस्तारण
विभागीय सूत्रों के अनुसार इन संपत्तियों पर कब्जा लेने के बाद कार्यालय शासकीय समापक स्वयं निस्तारण करेगा। इसमें जो भी सरकारी और गैर सरकारी देनदारियां यदि हैं तो उनको तय करते हुए तब संपत्तियों का निस्तारण होगा।
शीघ्र कार्रवाई तय होगी
ऑफिशियल लिक्विडेटर के पत्र का अभी पूरी तरह अध्ययन नहीं किया है। पत्र और हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कराने के बाद इस मामले में शीघ्र ही कार्रवाई तय की जाएगी। -रामचंद्र, अपर जिलाधिकारी प्रशासन
खास बातें:
इलेक्ट्रा इंडिया लिमिटेड की परतापुर क्षेत्र स्थित संपत्ति को खरीदा था दीवान ग्रुप ने
कारपोरेट एक्ट के तहत पंजीकृत इलेक्ट्रा का बंदी के समय नहीं हुआ नियमानुसार निस्तारण
हाईकोर्ट से अब आया आदेश, दीवान ग्रुप से प्रशासन लेगा संपत्ति पर कब्जा