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बिल्डिंग की लिफ्ट में फंसे बच्चे, अफरातफरी मची
Updated Thu, 16 Nov 2017 02:38 AM IST
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मेरठ/कंकरखेड़ा। एनएच-58 पर श्रद्धापुरी फेज-2 स्थित एआरके सिटी रेजिडेंसी की लिफ्ट में बुधवार को छह बच्चे फंस गए। बच्चों की चीख पुकार मचते ही कॉलोनी के लोगों मेें अफरातफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला, जिसके बाद बच्चे बाहर निकल पाए।
एआरके सिटी रेजिडेंसी के फ्लैटों में काफी परिवार रहते हैं। दोपहर को अक्सर बच्चे खेलने के लिए बिल्डिंग की छत पर चले जाते हैं। दोपहर करीब तीन बजे छह बच्चे लिफ्ट से सबसे ऊपरी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर आ रहे थे। लिफ्ट थोड़ी चली और झटके के साथ बंद हो गई। बच्चों ने लिफ्ट में लगा इमरजेंसी बटन दबाने के साथ ही शोर मचाना शुरू कर दिया। जिसके बाद फ्लैटों में रहने वालों की वहां भीड़ लग गई। बाद में कंकरखेड़ा थाने से पहुंची फैंटम पुलिस ने गेट खोला।
लिफ्ट खुलते ही भागे बच्चे
लिफ्ट का गेट खुलते ही बच्चे बाहर खड़े अपने परिजनों से लिपट गए। पुलिस और मीडिया ने बच्चों से बात करने की कोशिश की तो डरे सहमे बच्चों ने वहां से अपने घरों के लिए दौड़ लगा दी। सोसायटी ऑफिस में बैठी महिला ने इस बारे में कहा कि जब लिफ्ट खराब थी तो बच्चों को उससे नीचे आने की क्या जरूरत थी।
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लिफ्ट में बैठते लगता है डर
रेजिडेंसी में रहने वाले लोगों का कहना है कि लिफ्ट में बैठते से अब डर लगने लगा है। बुधवार को यह पहली बार बंद नहीं हुई। इससे पहले भी वह कई बार बंद हो चुकी है। जिसमें लोग फंस चुके है। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी कोई सुनने को तैयार नहीं है।
बच्चे ये सावधानियां बरतें
- जब लिफ्टमैन या गार्ड हो तो तभी बच्चों को लिफ्ट में जाना चाहिए।
- लिफ्ट बंद है, खराब है या काम चल रहा है की सूचना लिखी है तो तो ऐसी लिफ्ट में न जाएं।
- लिफ्ट के बंद होते ही संबंधित अलार्म स्विच दबाएं। यदि किसी के पास मोबाइल हो तो तुरंत परिजनों को सूचना दें।
- लिफ्ट में चढ़ते समय देख लें कि क्षमता से अधिक लोग तो नहीं हैं।
- बच्चे अकेले लिफ्ट में जाने से परहेज करें, परिजनों या बड़ों के साथ ही लिफ्ट का प्रयोग करें।
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एआरके सिटी रेजिडेंसी के फ्लैटों में काफी परिवार रहते हैं। दोपहर को अक्सर बच्चे खेलने के लिए बिल्डिंग की छत पर चले जाते हैं। दोपहर करीब तीन बजे छह बच्चे लिफ्ट से सबसे ऊपरी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर आ रहे थे। लिफ्ट थोड़ी चली और झटके के साथ बंद हो गई। बच्चों ने लिफ्ट में लगा इमरजेंसी बटन दबाने के साथ ही शोर मचाना शुरू कर दिया। जिसके बाद फ्लैटों में रहने वालों की वहां भीड़ लग गई। बाद में कंकरखेड़ा थाने से पहुंची फैंटम पुलिस ने गेट खोला।
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लिफ्ट खुलते ही भागे बच्चे
लिफ्ट का गेट खुलते ही बच्चे बाहर खड़े अपने परिजनों से लिपट गए। पुलिस और मीडिया ने बच्चों से बात करने की कोशिश की तो डरे सहमे बच्चों ने वहां से अपने घरों के लिए दौड़ लगा दी। सोसायटी ऑफिस में बैठी महिला ने इस बारे में कहा कि जब लिफ्ट खराब थी तो बच्चों को उससे नीचे आने की क्या जरूरत थी।
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लिफ्ट में बैठते लगता है डर
रेजिडेंसी में रहने वाले लोगों का कहना है कि लिफ्ट में बैठते से अब डर लगने लगा है। बुधवार को यह पहली बार बंद नहीं हुई। इससे पहले भी वह कई बार बंद हो चुकी है। जिसमें लोग फंस चुके है। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी कोई सुनने को तैयार नहीं है।
बच्चे ये सावधानियां बरतें
- जब लिफ्टमैन या गार्ड हो तो तभी बच्चों को लिफ्ट में जाना चाहिए।
- लिफ्ट बंद है, खराब है या काम चल रहा है की सूचना लिखी है तो तो ऐसी लिफ्ट में न जाएं।
- लिफ्ट के बंद होते ही संबंधित अलार्म स्विच दबाएं। यदि किसी के पास मोबाइल हो तो तुरंत परिजनों को सूचना दें।
- लिफ्ट में चढ़ते समय देख लें कि क्षमता से अधिक लोग तो नहीं हैं।
- बच्चे अकेले लिफ्ट में जाने से परहेज करें, परिजनों या बड़ों के साथ ही लिफ्ट का प्रयोग करें।