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भूख प्यास से दो गायों की मौत
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भूख प्यास से दो गायों की मौत
बहसूमा। रामराज में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के यहां भूख प्यास से परेशानी 18 गायों में से दो की मौत हो गई। मोहल्ले में बदबू फैलने के बाद लोगों की सूचना पर पुलिस पहुंची। इसके बाद जैसे तैसे गायों को ले जाकर जंगल में दफनाया। बची गायों को हस्तिनापुर भद्रकाली स्थित गौरक्षा केंद्र पर छोड़ा।
रामराज के मोहल्ला आशारामपुरी में व्यक्ति ने 18 गायें पाल रखी थी। इन गायों को वह जंगल में चराने ले जाता था। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन से व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसलिए वह पांच दिन से गायों को भी जंगल में नहीं ले गया। भूख प्यास के कारण दो गायों की मौत हो गई। बदबू फैलने पर लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मृतक गायों को प्रधान पति जितेंद्र की मदद से जंगल में ले जाकर दफनाया। वहीं बची हुई गायों को गाड़ी में लादकर रामराज खादर क्षेत्र और हस्तिनापुर स्थित गौशाला में ले गए, लेकिन दोनों ही जगह गायों को लेने से मना कर दिया गया। इसके बाद भद्रकाली पर अस्थाई रूप से बनाए गए गौरक्षा केंद्र पर बीडीओ हस्तिनापुर की मदद से छुड़वाया गया। वहीं चिकित्सक डॉ. पवन गोयल का कहना है कि इस प्रकार के व्यक्ति को साइक्रटिस बीमारी के लक्षण होने की संभावना बढ़ जाती है।
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बहसूमा। रामराज में मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के यहां भूख प्यास से परेशानी 18 गायों में से दो की मौत हो गई। मोहल्ले में बदबू फैलने के बाद लोगों की सूचना पर पुलिस पहुंची। इसके बाद जैसे तैसे गायों को ले जाकर जंगल में दफनाया। बची गायों को हस्तिनापुर भद्रकाली स्थित गौरक्षा केंद्र पर छोड़ा।
रामराज के मोहल्ला आशारामपुरी में व्यक्ति ने 18 गायें पाल रखी थी। इन गायों को वह जंगल में चराने ले जाता था। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन से व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसलिए वह पांच दिन से गायों को भी जंगल में नहीं ले गया। भूख प्यास के कारण दो गायों की मौत हो गई। बदबू फैलने पर लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मृतक गायों को प्रधान पति जितेंद्र की मदद से जंगल में ले जाकर दफनाया। वहीं बची हुई गायों को गाड़ी में लादकर रामराज खादर क्षेत्र और हस्तिनापुर स्थित गौशाला में ले गए, लेकिन दोनों ही जगह गायों को लेने से मना कर दिया गया। इसके बाद भद्रकाली पर अस्थाई रूप से बनाए गए गौरक्षा केंद्र पर बीडीओ हस्तिनापुर की मदद से छुड़वाया गया। वहीं चिकित्सक डॉ. पवन गोयल का कहना है कि इस प्रकार के व्यक्ति को साइक्रटिस बीमारी के लक्षण होने की संभावना बढ़ जाती है।
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