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मेडिकल स्टोरों पर आज से बंद होगी ऑक्सीटोसिन की बिक्री
Updated Sun, 01 Jul 2018 02:44 AM IST
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मेरठ। मेडिकल स्टोरों पर एक जुलाई यानी रविवार से ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन नहीं मिलेगा। जिन मेडिकल स्टोरों पर ऑक्सीटोसिन की बिक्री होती है, उन्हें वह स्टॉक भी उस कंपनी को वापस करना होगा, जिससे उन्होंने लिया था। अगर वह ऐसा नहीं करते और बिक्री करते हैं तो उनके खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। एक अनुमान के मुताबिक मेरठ में लाखों रुपये के ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन मौजूद हैं।
ऑक्सीटोसिन के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने केलिए केंद्र सरकार ने देश भर की निजी फार्मा कंपनियों पर संबंधित इंजेक्शन के निर्माण पर रोक लगाई है। देश में करीब 125 निजी फार्मा कंपनियां ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का निर्माण करती थीं। वहीं, यूपी में छह कंपनियों ने ऑक्सीटोसिन बनाने की अनुमति ले रखी थी। इसके अलावा निजी कंपनी को ऑक्सीटोसिन के निर्माण संबंधी रॉ मैटेरियल सप्लाई पर भी रोक लगा दी गई है। गौरतलब है कि सरकार ने पहले ही इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
अब आज से यह होगा
सरकार के आदेश हैं कि एक जुलाई से मेडिकल स्टोरों पर ऑक्सीटोसिन की बिक्री बंद हो जाएगी। ऑक्सीटोसिन का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम में होगा। यह कंपनी कर्नाटक में स्थापित है। इससे सीधे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में पंजीकृत अस्पतालों एवं क्लीनिकों को की जाएगी। किसी भी रूप में या नाम में ऑक्सीटोसिन को फुटकर केमिस्ट के जरिए बेचने की अनुमति नहीं होगी। यह दवा अब फुटकर केमिस्टों या किसी अन्य निर्माता के पास उपलब्ध नहीं होगी।
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सेहत के लिए घातक
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीटोसिन लगाकर पशुओं से निकाला गया दूध सुरक्षित नहीं होता है। इसके सेवन से मानव सेहत पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। ऑक्सीटोसिन से निकाले गए दूध का अधिक दिन सेवन करने से बच्चियों का कम उम्र में वयस्क होने जैसा शारीरिक विकास, बच्चों में दृष्टि का कमजोर होना और महिलाओं में स्तन कैंसर के खतरे बढ़ जाते हैं। सब्जी का आकार बढ़ाने में भी इसका उपयोग किया जा रहा था। इसके अलावा बिना डॉक्टर के पर्चे पर भी इसकी बिक्री हो रही थी।
स्टॉक को करना होगा वापस
साफ निर्देश दिए गए हैं कि स्टॉक को वापस करना होगा। कोई बिक्री नहीं कर पाएगा। अगर कोई करता मिला तो उसका लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में सभी संबंधित मेडिकल स्टोरों और फर्मों को इसकी जानकारी दे दी गई है। -पवन शाक्य, ड्रग्स इंस्पेक्टर
गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है
गर्भवती महिलाओं के लिए ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। कई बार तो यह बहुत जरूरी हो जाता है। रक्तस्राव होने, बिना ऑपरेशन के डिलीवरी और असहाय दर्द के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे गलत तरीके से इस्तेमाल पर यह सेहत के लिए नुकसानदेह भी है। -डॉ. कीर्ति दूबे, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज
गलत इस्तेमाल से होता है नुकसान
यह अच्छा कदम है। इससे ऑक्सीटोसिन के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी। दरअसल ऑक्सीटोसिन की कई बार कुछ कम जानकार ज्यादा डोज दे देते हैं, जिनसे गर्भवती महिलाओं को खतरा होता है। एक एमएल की डोज को भी पांच हिस्सों में बांटकर और वह भी गर्भवती की लगातार मॉनिटरिंग के बाद ही दिया जाता है। -डॉ. अनुपम सिरोही, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
कालाबाजी शुरू होने का अंदेशा
ऑक्सीटोसिन की बिक्री मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंध होने और सिर्फ एक कंपनी को इसके निर्माण कार्य करने की अनुमति दिए जाने से इसकी कालाबाजारी शुरू होने का अंदेशा है। इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। -रजनीश कौशल, महामंत्री, जिला केमिस्ट एसोसिएशन
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ऑक्सीटोसिन के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने केलिए केंद्र सरकार ने देश भर की निजी फार्मा कंपनियों पर संबंधित इंजेक्शन के निर्माण पर रोक लगाई है। देश में करीब 125 निजी फार्मा कंपनियां ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का निर्माण करती थीं। वहीं, यूपी में छह कंपनियों ने ऑक्सीटोसिन बनाने की अनुमति ले रखी थी। इसके अलावा निजी कंपनी को ऑक्सीटोसिन के निर्माण संबंधी रॉ मैटेरियल सप्लाई पर भी रोक लगा दी गई है। गौरतलब है कि सरकार ने पहले ही इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
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अब आज से यह होगा
सरकार के आदेश हैं कि एक जुलाई से मेडिकल स्टोरों पर ऑक्सीटोसिन की बिक्री बंद हो जाएगी। ऑक्सीटोसिन का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम में होगा। यह कंपनी कर्नाटक में स्थापित है। इससे सीधे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में पंजीकृत अस्पतालों एवं क्लीनिकों को की जाएगी। किसी भी रूप में या नाम में ऑक्सीटोसिन को फुटकर केमिस्ट के जरिए बेचने की अनुमति नहीं होगी। यह दवा अब फुटकर केमिस्टों या किसी अन्य निर्माता के पास उपलब्ध नहीं होगी।
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सेहत के लिए घातक
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीटोसिन लगाकर पशुओं से निकाला गया दूध सुरक्षित नहीं होता है। इसके सेवन से मानव सेहत पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। ऑक्सीटोसिन से निकाले गए दूध का अधिक दिन सेवन करने से बच्चियों का कम उम्र में वयस्क होने जैसा शारीरिक विकास, बच्चों में दृष्टि का कमजोर होना और महिलाओं में स्तन कैंसर के खतरे बढ़ जाते हैं। सब्जी का आकार बढ़ाने में भी इसका उपयोग किया जा रहा था। इसके अलावा बिना डॉक्टर के पर्चे पर भी इसकी बिक्री हो रही थी।
स्टॉक को करना होगा वापस
साफ निर्देश दिए गए हैं कि स्टॉक को वापस करना होगा। कोई बिक्री नहीं कर पाएगा। अगर कोई करता मिला तो उसका लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में सभी संबंधित मेडिकल स्टोरों और फर्मों को इसकी जानकारी दे दी गई है। -पवन शाक्य, ड्रग्स इंस्पेक्टर
गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है
गर्भवती महिलाओं के लिए ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। कई बार तो यह बहुत जरूरी हो जाता है। रक्तस्राव होने, बिना ऑपरेशन के डिलीवरी और असहाय दर्द के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे गलत तरीके से इस्तेमाल पर यह सेहत के लिए नुकसानदेह भी है। -डॉ. कीर्ति दूबे, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज
गलत इस्तेमाल से होता है नुकसान
यह अच्छा कदम है। इससे ऑक्सीटोसिन के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी। दरअसल ऑक्सीटोसिन की कई बार कुछ कम जानकार ज्यादा डोज दे देते हैं, जिनसे गर्भवती महिलाओं को खतरा होता है। एक एमएल की डोज को भी पांच हिस्सों में बांटकर और वह भी गर्भवती की लगातार मॉनिटरिंग के बाद ही दिया जाता है। -डॉ. अनुपम सिरोही, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
कालाबाजी शुरू होने का अंदेशा
ऑक्सीटोसिन की बिक्री मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंध होने और सिर्फ एक कंपनी को इसके निर्माण कार्य करने की अनुमति दिए जाने से इसकी कालाबाजारी शुरू होने का अंदेशा है। इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। -रजनीश कौशल, महामंत्री, जिला केमिस्ट एसोसिएशन