{"_id":"5aff404e4f1c1b5a798b4e67","slug":"51526677582-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अतिक्रमण वाले नालों की सफाई का कोई प्लान नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अतिक्रमण वाले नालों की सफाई का कोई प्लान नहीं
Updated Sat, 19 May 2018 02:36 AM IST
विज्ञापन
नालों पर अतिक्रमण, कैसे होगी सफाई
मेरठ। नगर निगम भले ही मानसून आने से पहले सभी नालों को तली झाड़ साफ करने का दावा कर रहा हो, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। शहर में काफी नाले ऐसे हैं जिनकी पटरियों पर अतिक्रमण है। जहां पर फासी मशीन, पोर्कलेन और कूड़ा गाड़ी पहुंच ही नहीं सकती है। अगर ऐसे नालों की सफाई मैनुअल करने का भी निर्णय लिया जाए तो भी सभी नाले साफ नहीं हो पाएंगे।
शहर के अधिकतर नालों की पटरियों और नालों के ऊपर स्थाई अतिक्रमण है। इस कारण नालों की सफाई तलीझाड़ किया जाना संभव नहीं है। नगर निगम ने अभी तक अतिक्रमण वाले नालों की सफाई का कोई प्लान नहीं बनाया है। जबकि दूसरे नालों की बजाय इन नालों में सबसे अधिक सिल्ट जमा है। जो हर वर्ष बारिश के दौरान पानी के साथ बहकर सड़कों पर आ जाती है। मंगलपांडे नगर, पुरानी मोहनपुरी, थापरनगर, ओडियन नाला और आबूनाला की पटरी पर अतिक्रमण किया हुआ है। वहीं इंदिरा चौक से मोहनपुरी होकर गुजरने वाले नालों की सफाई अतिक्रमण के कारण नहीं हो पाती है। वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुवरसेन ने कहा कि जिन नालों की पटरियों पर अतिक्रमण है। उसको हटाए जाने की तैयारी है। इसमें पुलिस की मदद भी ली जाएगी। नालों की सफाई मशीनों से ही संभव है।
सफाई के लिए मशीनें हैं कम
शहर में 300 से अधिक नाले हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन दावा कर रहे हैं कि सभी नालों की सफाई चल रही है। लेकिन अगर नगर निगम की छोटी बड़ी पोर्कलेन और सिल्ट उठाने वाली ट्रैक्टर ट्राली की संख्या पर गौर करें वे काफी कम हैं। नगर निगम एक सप्ताह से ओडियन नाले की सफाई कर रहा है। यहां दो पोर्कलेन, फासी मशीन और ट्रैक्टर ट्राली लगी है। लेकिन अभी तक दो किलोमीटर नाले की सफाई भी नहीं हो सकी है। इसके अलावा आबू नाला प्रथम, द्वितीय, मोहनपुरी आदि बड़े नालों पर मशीनें भी नहीं लगाई हैं। ऐसी स्थिति में मानसून के पहले नालों की सफाई होना मुश्किल है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। नगर निगम भले ही मानसून आने से पहले सभी नालों को तली झाड़ साफ करने का दावा कर रहा हो, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। शहर में काफी नाले ऐसे हैं जिनकी पटरियों पर अतिक्रमण है। जहां पर फासी मशीन, पोर्कलेन और कूड़ा गाड़ी पहुंच ही नहीं सकती है। अगर ऐसे नालों की सफाई मैनुअल करने का भी निर्णय लिया जाए तो भी सभी नाले साफ नहीं हो पाएंगे।
शहर के अधिकतर नालों की पटरियों और नालों के ऊपर स्थाई अतिक्रमण है। इस कारण नालों की सफाई तलीझाड़ किया जाना संभव नहीं है। नगर निगम ने अभी तक अतिक्रमण वाले नालों की सफाई का कोई प्लान नहीं बनाया है। जबकि दूसरे नालों की बजाय इन नालों में सबसे अधिक सिल्ट जमा है। जो हर वर्ष बारिश के दौरान पानी के साथ बहकर सड़कों पर आ जाती है। मंगलपांडे नगर, पुरानी मोहनपुरी, थापरनगर, ओडियन नाला और आबूनाला की पटरी पर अतिक्रमण किया हुआ है। वहीं इंदिरा चौक से मोहनपुरी होकर गुजरने वाले नालों की सफाई अतिक्रमण के कारण नहीं हो पाती है। वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुवरसेन ने कहा कि जिन नालों की पटरियों पर अतिक्रमण है। उसको हटाए जाने की तैयारी है। इसमें पुलिस की मदद भी ली जाएगी। नालों की सफाई मशीनों से ही संभव है।
विज्ञापन
सफाई के लिए मशीनें हैं कम
शहर में 300 से अधिक नाले हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन दावा कर रहे हैं कि सभी नालों की सफाई चल रही है। लेकिन अगर नगर निगम की छोटी बड़ी पोर्कलेन और सिल्ट उठाने वाली ट्रैक्टर ट्राली की संख्या पर गौर करें वे काफी कम हैं। नगर निगम एक सप्ताह से ओडियन नाले की सफाई कर रहा है। यहां दो पोर्कलेन, फासी मशीन और ट्रैक्टर ट्राली लगी है। लेकिन अभी तक दो किलोमीटर नाले की सफाई भी नहीं हो सकी है। इसके अलावा आबू नाला प्रथम, द्वितीय, मोहनपुरी आदि बड़े नालों पर मशीनें भी नहीं लगाई हैं। ऐसी स्थिति में मानसून के पहले नालों की सफाई होना मुश्किल है।
विज्ञापन