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आरटीओ के संरक्षण में दौड़ रहे खटारा वाहन
Updated Mon, 27 Nov 2017 02:22 AM IST
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मेरठ। आरटीओ प्रवर्तन के पास पूरा अमला होने के बाद भी शहर और बाहरी हिस्सों में खटारा वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं। यहां तक कि स्कूलों में भी 20 से 25 साल पुराने वाहन मासूम बच्चों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। एनजीटी के आदेश के बावजूद 10 साल से ज्यादा पुराने वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
शहर में नियम-कानूनों को धता बताकर दौड़ने वाले ओवरलोड, डग्गामार व खटारा वाहनों की बढ़ती संख्या से आरटीओ के प्रवर्तन विभाग की कार्यप्रणाली हमेशा से विवादों में रही है। लेकिन अब राजधानी के साथ ही एनसीआर में दस साल पुराने डीजल वाहनों के प्रतिबंधित किए जाने से मामला और भी पेचीदा हो गया है। अप्रैल 2015 में आए आदेश का आज तक सख्ती से अनुपालन नहीं हुआ है। 10 साल पुराने डीजल व 15 साल पुराने पेट्रोल चालित करीब 44 हजार वाहन आज भी जिले में दौड़ रहे हैं। इसके अलावा पड़ोसी जिलों व राज्यों के पुराने व खटारा वाहन भी सड़कों को चल रहे हैं। आरटीओ प्रवर्तन के पास पूरी टीम होने के बाद भी इन पर सख्ती से शिकंजा नहीं कसा जा रहा है। तीन दिन पहले ही खरखौदा में पलटने वाली बस 25 साल पुरानी थी।
15 से 20 वाहन सीज करके इतिश्री
प्रवर्तन टीम रोजाना 15 से 20 वाहन सीज करके इतिश्री कर लेती है। अगर सही तरीके से अभियान चलाया जाए तो इससे ज्यादा बसें तो स्कूलों की ही पकड़ में आ जाएंगी। इसके अलावा दस साल पुराने डीजल वाहन भी रोजाना सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। इन्हें भी पकड़ा जाए तो यह संख्या काफी बढ़ सकती है।
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मंडलायुक्त की सख्ती से चला अभियान
पिछले दिनों मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार की सख्ती के बाद आरटीओ प्रवर्तन ने पुराने वाहनों को पकड़ने का अभियान तेज किया था। एक सप्ताह अभियान चलने के बाद धीमा हो गया। अभियान के तहत 300 से ज्यादा वाहनों को पकड़ा गया।
एनजीटी द्वारा प्रतिबंधित किए गए डीजल व पेट्रोल चालित वाहनों के अलावा डग्गामार वाहनों पर शिकंजा कसा जा रहा है। रोजाना टीम अभियान चलाकर ऐसे वाहन सीज कर रही है। अभिभावकों को भी पुराने स्कूल वाहनों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ
खास बात
प्रवर्तन दल की भारी फौज होने के बाद भी नहीं लग पा रही रोक
20 से 25 साल पुराने वाहनों पर नहीं हो पा रही है कोई कार्रवाई
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शहर में नियम-कानूनों को धता बताकर दौड़ने वाले ओवरलोड, डग्गामार व खटारा वाहनों की बढ़ती संख्या से आरटीओ के प्रवर्तन विभाग की कार्यप्रणाली हमेशा से विवादों में रही है। लेकिन अब राजधानी के साथ ही एनसीआर में दस साल पुराने डीजल वाहनों के प्रतिबंधित किए जाने से मामला और भी पेचीदा हो गया है। अप्रैल 2015 में आए आदेश का आज तक सख्ती से अनुपालन नहीं हुआ है। 10 साल पुराने डीजल व 15 साल पुराने पेट्रोल चालित करीब 44 हजार वाहन आज भी जिले में दौड़ रहे हैं। इसके अलावा पड़ोसी जिलों व राज्यों के पुराने व खटारा वाहन भी सड़कों को चल रहे हैं। आरटीओ प्रवर्तन के पास पूरी टीम होने के बाद भी इन पर सख्ती से शिकंजा नहीं कसा जा रहा है। तीन दिन पहले ही खरखौदा में पलटने वाली बस 25 साल पुरानी थी।
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15 से 20 वाहन सीज करके इतिश्री
प्रवर्तन टीम रोजाना 15 से 20 वाहन सीज करके इतिश्री कर लेती है। अगर सही तरीके से अभियान चलाया जाए तो इससे ज्यादा बसें तो स्कूलों की ही पकड़ में आ जाएंगी। इसके अलावा दस साल पुराने डीजल वाहन भी रोजाना सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। इन्हें भी पकड़ा जाए तो यह संख्या काफी बढ़ सकती है।
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मंडलायुक्त की सख्ती से चला अभियान
पिछले दिनों मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार की सख्ती के बाद आरटीओ प्रवर्तन ने पुराने वाहनों को पकड़ने का अभियान तेज किया था। एक सप्ताह अभियान चलने के बाद धीमा हो गया। अभियान के तहत 300 से ज्यादा वाहनों को पकड़ा गया।
एनजीटी द्वारा प्रतिबंधित किए गए डीजल व पेट्रोल चालित वाहनों के अलावा डग्गामार वाहनों पर शिकंजा कसा जा रहा है। रोजाना टीम अभियान चलाकर ऐसे वाहन सीज कर रही है। अभिभावकों को भी पुराने स्कूल वाहनों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ
खास बात
प्रवर्तन दल की भारी फौज होने के बाद भी नहीं लग पा रही रोक
20 से 25 साल पुराने वाहनों पर नहीं हो पा रही है कोई कार्रवाई