{"_id":"5c5c9402bdec2273742753f4","slug":"41549571074-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गर्माता जा रहा सेंट लुक्स अस्पताल प्रकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्माता जा रहा सेंट लुक्स अस्पताल प्रकरण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो
सेंट लुक्स अस्पताल प्रकरण में दूसरा पक्ष पहुंचा एसएसपी ऑफिस
मेरठ। सेंट लुक्स अस्पताल से जुड़े प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को एसएसपी ऑफिस पहुंचकर धर्मांतरण के दबाव का आरोप झूठा बताकर कार्रवाई की मांग की। एएसपी रामअर्ज ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सेंट लुक्स अस्पताल के निदेशक फादर सहायराज ने बताया कि साल 1988 में साकेत निवासी गुरुबचन सिंह को अस्पताल ने मेडिकल स्टोर खोलने की अनुमति दी थी। अस्पताल अब खुद का मेडिकल स्टोर खोलने जा रहा था तो मई 2018 में प्रबंध समिति ने तीन माह में दुकान खाली करने का समय गुरुबचन सिंह को दे दिया। 1 सितंबर, 2018 को अस्पताल प्रशासन ने अपना मेडिकल स्टोर खोल लिया। दिसंबर, 2018 में गुरुबचन सिंह को दुकान खाली करनी थी, लेकिन वह कोर्ट से स्टे ले आए। वर्तमान में वाद विचाराधीन है, जिस पर जल्द निर्णय आ जाएगा। आरोप लगाया कि दबाव बनाने की नीयत से गुरुबचन सिंह ने उन पर धर्मांतरण के दबाव का झूठा आरोप लगाया है। दो अज्ञात युवकों को उनके कार्यालय भेजकर धमकी दिलवाई थी। कहा कि धर्मांतरण जैसा आरोप सामाजिक एकता के लिए खतरा है। ऐसे में कड़ी कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल में अखिल कौशिक, रविंद्र सिंह, राजेश मार्टिन, रविंद्रनाथ उर्फ गोलू भाई, सुनील दास, संजय जेक्सन, संजय कटारिया मौजूद रहे।
विज्ञापन
सेंट लुक्स अस्पताल प्रकरण में दूसरा पक्ष पहुंचा एसएसपी ऑफिस
मेरठ। सेंट लुक्स अस्पताल से जुड़े प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को एसएसपी ऑफिस पहुंचकर धर्मांतरण के दबाव का आरोप झूठा बताकर कार्रवाई की मांग की। एएसपी रामअर्ज ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सेंट लुक्स अस्पताल के निदेशक फादर सहायराज ने बताया कि साल 1988 में साकेत निवासी गुरुबचन सिंह को अस्पताल ने मेडिकल स्टोर खोलने की अनुमति दी थी। अस्पताल अब खुद का मेडिकल स्टोर खोलने जा रहा था तो मई 2018 में प्रबंध समिति ने तीन माह में दुकान खाली करने का समय गुरुबचन सिंह को दे दिया। 1 सितंबर, 2018 को अस्पताल प्रशासन ने अपना मेडिकल स्टोर खोल लिया। दिसंबर, 2018 में गुरुबचन सिंह को दुकान खाली करनी थी, लेकिन वह कोर्ट से स्टे ले आए। वर्तमान में वाद विचाराधीन है, जिस पर जल्द निर्णय आ जाएगा। आरोप लगाया कि दबाव बनाने की नीयत से गुरुबचन सिंह ने उन पर धर्मांतरण के दबाव का झूठा आरोप लगाया है। दो अज्ञात युवकों को उनके कार्यालय भेजकर धमकी दिलवाई थी। कहा कि धर्मांतरण जैसा आरोप सामाजिक एकता के लिए खतरा है। ऐसे में कड़ी कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल में अखिल कौशिक, रविंद्र सिंह, राजेश मार्टिन, रविंद्रनाथ उर्फ गोलू भाई, सुनील दास, संजय जेक्सन, संजय कटारिया मौजूद रहे।
विज्ञापन