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रहें सावधान, डेंगू का वार कर सकता है बीमार
Updated Fri, 10 Aug 2018 02:09 AM IST
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रहें सावधान! डेंगू फिर कर सकता है वार
मेरठ। डेंगू के लिए यह मौसम सबसे ज्यादा मुफीद है। दरअसल, बारिश की वजह से जगह-जगह पानी भरा हुआ है। इसके अलावा कूलर भी बाहर की तरफ लगे रहते हैं, जिनमें बारिश का भी पानी भर जाता है, इसकी नियमित सफाई न होने से डेंगू के लार्वा पनपते हैं। लिहाजा सावधान रहने की जरूरत है और सफाई रखना जरूरी है।
पिछले साल डेंगू ने कोहराम मचाया था। डेंगू के 660 मरीज मिले थे। यह तो वह थे जिनकी पुष्टि मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हुई थी, जबकि हकीकत यह भी है कि इनकी तादाद कहीं ज्यादा थी, क्योंकि बहुत मरीज ऐसे रहते हैं, जो प्राइवेट में इलाज कराते हैं और उसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को भी नहीं मिल पाती है या नहीं दी जाती है। इतना ही नहीं, साल 2016 में चिकनुगिया ने कोहराम मचाया था। चिकनगुनिया के 1105 मरीज मिले थे, जबकि डेंगू के 183 मरीज मिले थे।
स्वास्थ्य विभाग भी तैयार
स्वास्थ्य विभाग ने भी डेंगू से बचाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए ‘हर रविवार मच्छर पर वार’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। बुखार के हर रोगी की स्लाइड बनाकर उनकी जांच कराई जाएगी।
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कांवड़ यात्रा संपन्न, अब चलेगा अभियान
कांवड़ यात्रा संपन्न हो चुकी है। इसमें स्वास्थ्य विभाग और जिला मलेरिया विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई थी। अब डेंगू से बचाव के लिए लगातार जागरूकता अभियान और चेकिंग अभियान चलाए जाएंगे। - योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
ऐसे फैलता है डेंगू
डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है।
यह मच्छर ठहरे हुए पानी में पनपते हैं।
डेंगू कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को आसानी से हो जाता है।
डेंगू की पहचान और लक्षण
लक्षण तीन से 14 दिन बाद दिखते हैं।
तेज ठंड लगकर बुखार आता है।
सिर और आंखों में दर्द होता है।
शरीर और जोड़ों में दर्द होता है।
भूख कम लगती है।
जी मचलाना, उल्टी और दस्त आने लगते हैं।
बचाव के उपाय
घर के अंदर और आस पड़ोस में पानी जमा न होने दें।
किचन और वॉशरूम को सूखा रखें।
कूलर का पानी सुबह-शाम बदलते रहें।
खिड़कियों और दरवाजों में जाली लगवाएं।
शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें।
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मेरठ। डेंगू के लिए यह मौसम सबसे ज्यादा मुफीद है। दरअसल, बारिश की वजह से जगह-जगह पानी भरा हुआ है। इसके अलावा कूलर भी बाहर की तरफ लगे रहते हैं, जिनमें बारिश का भी पानी भर जाता है, इसकी नियमित सफाई न होने से डेंगू के लार्वा पनपते हैं। लिहाजा सावधान रहने की जरूरत है और सफाई रखना जरूरी है।
पिछले साल डेंगू ने कोहराम मचाया था। डेंगू के 660 मरीज मिले थे। यह तो वह थे जिनकी पुष्टि मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हुई थी, जबकि हकीकत यह भी है कि इनकी तादाद कहीं ज्यादा थी, क्योंकि बहुत मरीज ऐसे रहते हैं, जो प्राइवेट में इलाज कराते हैं और उसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को भी नहीं मिल पाती है या नहीं दी जाती है। इतना ही नहीं, साल 2016 में चिकनुगिया ने कोहराम मचाया था। चिकनगुनिया के 1105 मरीज मिले थे, जबकि डेंगू के 183 मरीज मिले थे।
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स्वास्थ्य विभाग भी तैयार
स्वास्थ्य विभाग ने भी डेंगू से बचाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए ‘हर रविवार मच्छर पर वार’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। बुखार के हर रोगी की स्लाइड बनाकर उनकी जांच कराई जाएगी।
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कांवड़ यात्रा संपन्न, अब चलेगा अभियान
कांवड़ यात्रा संपन्न हो चुकी है। इसमें स्वास्थ्य विभाग और जिला मलेरिया विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई थी। अब डेंगू से बचाव के लिए लगातार जागरूकता अभियान और चेकिंग अभियान चलाए जाएंगे। - योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
ऐसे फैलता है डेंगू
डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है।
यह मच्छर ठहरे हुए पानी में पनपते हैं।
डेंगू कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को आसानी से हो जाता है।
डेंगू की पहचान और लक्षण
लक्षण तीन से 14 दिन बाद दिखते हैं।
तेज ठंड लगकर बुखार आता है।
सिर और आंखों में दर्द होता है।
शरीर और जोड़ों में दर्द होता है।
भूख कम लगती है।
जी मचलाना, उल्टी और दस्त आने लगते हैं।
बचाव के उपाय
घर के अंदर और आस पड़ोस में पानी जमा न होने दें।
किचन और वॉशरूम को सूखा रखें।
कूलर का पानी सुबह-शाम बदलते रहें।
खिड़कियों और दरवाजों में जाली लगवाएं।
शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहनें।