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200 सफाई कर्मी इधर से उधर, विरोध शुरू
Updated Tue, 24 Jul 2018 02:40 AM IST
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200 स्थायी सफाई कर्मी इधर से उधर, विरोध शुरू
मेरठ। काफी समय से कुछ चुनिंदा वार्डों में जमे स्थायी सफाई कर्मियों को नगर निगम प्रशासन ने इधर से उधर कर दिया है। निगम प्रशासन ने यह निर्णय पार्षदों की शिकायत और शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए लिया है। उधर सफाई कर्मचारियों ने निगम प्रशासन के इस निर्णय का विरोध करना शुरू कर दिया है।
नगर निगम में 973 स्थायी सफाई कर्मचारी हैं। पार्षदों का लगातार आरोप है कि स्थायी सफाई कर्मचारी काम पर जाते ही नहीं हैं। आरोपों की सत्यता जांचने के लिए नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने हाल ही में कुछ वार्डों का औचक निरीक्षण करके स्थिति का जायजा लिया। पार्षदों की शिकायतें सही पाई गयी। जिसके आधार पर नगरायुक्त ने ऐसे सभी स्थायी सफाई कर्मचारियों को दूसरे वार्डों में भेजने का निर्णय लिया। पिछले सप्ताह नगरायुक्त ने नगर स्वास्थ्य विभाग में बैठकर स्वयं ही स्थायी सफाई कर्मचारियों की सूची तैयार की। जिस वार्ड में अधिक स्थायी सफाई कर्मचारी पाए गए। उनमें से कुछ को नए वार्डों में भेज दिया गया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन के आदेश पर सफाई कर्मचारियों ने संबंधित वार्ड में जाना गंवारा नहीं समझा है। नगर निगम में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सूचना पाकर नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम नहीं पहुंचे।
शास्त्रीनगर की जनता पी रही है गंदा पानी
मेरठ। शहर की जनता को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है। शास्त्रीनगर की जनता गंदा पानी पी रही है। अनेकों बार शिकायतों के बाद भी जलकल विभाग ने कोई सुध नहीं ली है। अब जनता अधिकारियों को घेरने की तैयारी कर रही है।
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शास्त्रीनगर सेक्टर चार के मकान संख्या 229 निवासी सुशील कुमार चौहान का कहना है कि पिछले छह माह से सेक्टर में पाइप लाइन से गंदा पानी आ रहा है। कभी-कभी तो पाइप लाइन से गंदगी के साथ कीड़े आ रहे हैं। अनेक बार वार्ड पार्षद और जलकल विभाग में शिकायत की, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा है। गंदा पानी पीने से बीमारी फैलने की स्थिति बनी हुई है।
खास बातें:
- सफाई व्यवस्था सुधार को उठाया कदम
- स्थायी सफाई कर्मचारियों पर काम नहीं करने के आरोप
- वार्ड में अधिक संख्या में तैनात कर्मचारियों को नए वार्डों में भेजा
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मेरठ। काफी समय से कुछ चुनिंदा वार्डों में जमे स्थायी सफाई कर्मियों को नगर निगम प्रशासन ने इधर से उधर कर दिया है। निगम प्रशासन ने यह निर्णय पार्षदों की शिकायत और शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए लिया है। उधर सफाई कर्मचारियों ने निगम प्रशासन के इस निर्णय का विरोध करना शुरू कर दिया है।
नगर निगम में 973 स्थायी सफाई कर्मचारी हैं। पार्षदों का लगातार आरोप है कि स्थायी सफाई कर्मचारी काम पर जाते ही नहीं हैं। आरोपों की सत्यता जांचने के लिए नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने हाल ही में कुछ वार्डों का औचक निरीक्षण करके स्थिति का जायजा लिया। पार्षदों की शिकायतें सही पाई गयी। जिसके आधार पर नगरायुक्त ने ऐसे सभी स्थायी सफाई कर्मचारियों को दूसरे वार्डों में भेजने का निर्णय लिया। पिछले सप्ताह नगरायुक्त ने नगर स्वास्थ्य विभाग में बैठकर स्वयं ही स्थायी सफाई कर्मचारियों की सूची तैयार की। जिस वार्ड में अधिक स्थायी सफाई कर्मचारी पाए गए। उनमें से कुछ को नए वार्डों में भेज दिया गया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन के आदेश पर सफाई कर्मचारियों ने संबंधित वार्ड में जाना गंवारा नहीं समझा है। नगर निगम में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सूचना पाकर नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम नहीं पहुंचे।
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शास्त्रीनगर की जनता पी रही है गंदा पानी
मेरठ। शहर की जनता को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है। शास्त्रीनगर की जनता गंदा पानी पी रही है। अनेकों बार शिकायतों के बाद भी जलकल विभाग ने कोई सुध नहीं ली है। अब जनता अधिकारियों को घेरने की तैयारी कर रही है।
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शास्त्रीनगर सेक्टर चार के मकान संख्या 229 निवासी सुशील कुमार चौहान का कहना है कि पिछले छह माह से सेक्टर में पाइप लाइन से गंदा पानी आ रहा है। कभी-कभी तो पाइप लाइन से गंदगी के साथ कीड़े आ रहे हैं। अनेक बार वार्ड पार्षद और जलकल विभाग में शिकायत की, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा है। गंदा पानी पीने से बीमारी फैलने की स्थिति बनी हुई है।
खास बातें:
- सफाई व्यवस्था सुधार को उठाया कदम
- स्थायी सफाई कर्मचारियों पर काम नहीं करने के आरोप
- वार्ड में अधिक संख्या में तैनात कर्मचारियों को नए वार्डों में भेजा