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फीस पर लगे लगाम तो बने बात

Wed, 04 Apr 2018 02:28 AM IST
Updated Wed, 04 Apr 2018 02:28 AM IST
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फीस पर लगे लगाम तो बने बात
फीस पर लगे लगाम तो बने बात
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मेरठ। निजी स्कूलों में हर साल फीस बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने और पांच साल से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदले जाने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश-2018 को मंजूरी दे दी है। ऐसे में इसके लागू होने के बाद स्कूलों पर कितनी लगाम लगेगी। अभिभावकों को कितना फायदा होगा अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। मंगलवार को बिल के संबंध में अमर उजाला टीम ने अभिभावकों से उनके विचार जाने। इस दौरान अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की मॉनिटरिंग और बिल पर अमल के बाद ही सारी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। ईमानदार अफसर सही ढंग से स्कूलों पर नजर रखेंगे और अभिभावकों की परेशानी को सुना जाएगा, तभी कुछ स्पष्ट हो पाएगा।
साकेत निवासी संजू का कहना है कि सरकार ने इस बिल के तहत तय किया है कि बीस हजार रुपये से ज्यादा सालाना फीस वसूलने वाले स्कूल इस दायरे में आएंगे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि किसी खास दुकान से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने को बाध्य नहीं किया जाएगा इसकी मॉनीटरिंग कौन करेगा। फिर दुकानदारों और स्कूलों के बीच सेटिंग हो जाएगी। जहां तक फीस वृद्घि का सवाल है तो जो स्कूल डेढ़ लाख रुपये सालाना वसूल रहे हैं उन पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया। इससे कम आय वाले अभिभावकों को कोई फायदा नहीं होगा।
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रुड़की रोड निवासी अभिभावक राहुल सिंह का कहना है कि सरकार को स्कूलों की फीस पर लगाम कसनी चाहिए थी। आज भी मेरठ में फर्स्ट क्लास के बच्चे की सालाना फीस कई स्कूलों में एक लाख से ज्यादा वसूली जा रही है। ऐसे में इन स्कूलों की फीस पर लगाम लगाई जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया है। इन स्कूलों में शुरुआत में ही इतनी फीस है कि आगे नहीं भी बढ़ाई जाए तो क्या फर्क पड़ता है। रही बात ड्रेस की, वो तो हर साल बच्चों की बदली ही जाती है। अभी कुछ नहीं कह सकते हैं।
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शास्त्रीनगर के क्लाउड नाइन निवासी भावना सिंह का कहना कि बिल का जो स्कूल पालन नहीं करेंगे, उनकी शिकायत करने पर कार्रवाई करने के लिए भी ईमानदार अफसरों को तैनात करना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो शिकायत करते हुए अभिभावक डरेंगे कि कहीं उनके बच्चे को किसी बहाने से स्कूल से निकाल न दिया लाए।

सरकार का ये बहुत अच्छा फैसला है। ये बिल पास होना स्कूल और अभिभावक दोनों के लिए अच्छा है। इससे व्यवस्था पारदर्शी होगी हम इसका सम्मान करते हैं। राहुल केसरवानी, सचिव सहोदय एवं मेरठ स्कूल फेडरेशन

खास बातें:
स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय अध्यादेश-2018 को मिली मंजूरी
बोले अभिभावक, अभी कुछ भी कहना होगा जल्दबाजी
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