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भूत और वर्तमान के आईने से दिखाया भविष्य
Updated Tue, 19 Sep 2017 02:35 AM IST
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मेरठ। राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद क्रांतिधरा से पहली रैली का आगाज करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती कई राजनीतिक उम्मीदों का भविष्य दिखा गईं। उन्होंने अपनी पिछली सरकारों के कामों को बार-बार दोहराया। साथ ही वर्तमान में प्रदेश और केन्द्र दोनों ही सरकारों की खामियां गिनाई। जिक्र हर वर्ग का किया पर खास तौर से जनता के सामने यह बताने की कोशिश की सबसे ज्यादा परेशान इस समय दलित और मुस्लिम वर्ग है। हां, पूरे सवा घंटे के भाषण में उन्हाेंने समाजवादी पार्टी का नाम तक नहीं लिया। कांग्रेस पर तेवर कम तीखे रहे। निशाने पर सिर्फ भाजपा ही रही।
रिकार्ड चार बार यूपी की सीएम रह चुकी मायावती को यह पूरी तरह से भान है राजनीतिक नैया पार करने के लिए दलित और मुस्लिमों का गठबंधन होना जरूरी है। ऐसे में उन्होंने बताया कि दलितों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। ठीक 12 बजकर 52 मिनट पर मंच पर पहुंचीं मायावती ने आते ही माइक संभाल लिया और धाराप्रवाह बोलती रहीं। इस दौरान रोेहित वेमुला, गुजरात के ऊना कांड से होते हुए काफी देर तक सहारनपुर के शब्बीरपुर का जिक्र किया। बताया कि महाराणा प्रताप जयंती पर निकाले जा रहे जुलूस में क्षत्रियों और दलितों को जानबूझकर लड़वाया गया। कहा कि इससे ही षड्यंत्र साफ हो गया जब यह सामने आया कि उस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि फूलन देवी की हत्या का आरोपी शेर सिंह राणा था। बोलीं कि भाजपा ने इसके लिए एक दलित संगठन को मैनेज कर उसका इस्तेमाल किया। पोल खुली तो दिखावटी कार्रवाई कर दी। सोचा कि मैं वहां जाकर भड़काऊ भाषण दूंगी पर मैने परिस्थिति देखकर केवल सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की बात की। ऐसे में मेरी हत्या की साजिश भी फेल हो गई।
मायावती ने इसी अंदाज में मुस्लिमों को भी साधा। कहा कि खास तौर पर मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहे हैं। उनकी गुजर बसर मुश्किल हो रही है। गाय को लेकर खरीद फरोख्त दहशतजदा लोगों ने बंद कर दी है और गायों का सरकारी कांजी हाउस में हाल बुरा है।
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मायावती ने अपनी पूरी पार्टी के इतिहास से लोगों को रूबरू कराया। कहा कि जब 1984 में बसपा बनी तो इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष कांशीराम को भी सीआईए का एजेंट कहकर छवि खराब करने की कोशिश की थी। कहा था कि इन्हें दिया गया धन देश के बाहर चला जाएगा। अब मेरी भी छवि इसी तरह से खराब करने की कोशिश की जा रही है कि मुझे पैसा कमाना है। यदि पैसे की भूख होती तो 25 अगस्त 2003 को सीएम पद से त्यागपत्र ही न देती।
पूरे भाषण में खास बात यह रही कि मायावती ने समाजवादी पार्टी पर टारगेट नहीं किया। एक बार भी सपा, मुलायम सिंह यादव या अखिलेश यादव का नाम नहीं लिया। न ही कांग्रेस से राहुल गांधी, सोनिया या किसी अन्य नेता का नाम लिया। बस यह जरूर कहा कि कांग्रेस की गलत कार्यप्रणाली के कारण भाजपा का ईवीएम का खेल नहीं खुल पाया। इसके अलावा कांग्रेस का भी कहीं कोई जिक्र मायावती ने नहीं किया। कार्यकर्ताओं में भी इसे लेकर चर्चा रही कि कहीं यह आने वाले चुनाव के नए समीकरण का इशारा तो नहीं। चूंकि यूपी विधानसभा चुनाव के बाद यह साफ हो चुका है कि बिना दलित मुस्लिम समीकरण के भाजपा का मुकाबला टेढ़ी खीर है। सपा के पास खासी संख्या मुस्लिम वोटों की है तो बसपा के पास दलितों की। यदि दोनों किसी भी सूरत में एक हो जाएं तो बाजी पलटी जा सकती है। हां, यहां मायावती ने पिछड़े वर्ग को साधने के लिए यह बार -बार याद दिलाया कि वीपी सिंह की सरकार को 1989 में समर्थन देने के बदले उन्होंने ही मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने की शर्त रखी थी। उसी का लाभ ओबीसी को मिला और आरक्षण दिया गया, जबकि भाजपा ने लगातार उसका विरोध किया। अब भी लाखों पद आरक्षण के खाली पड़े हैं पर बीजेपी भर नहीं रही है।
- बात सर्व समाज की पर निगाह पूरी तरह से दलित मुस्लिम गठजोड़ पर ही रही
- समाजवादी पार्टी पर निशाना साधना तो दूर एक बार भी नाम तक नहीं लिया
- कांग्रेस को लेकर भी तीखे नहीं रहे तेवर, सीधा निशाना भाजपा पर ही साधा
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रिकार्ड चार बार यूपी की सीएम रह चुकी मायावती को यह पूरी तरह से भान है राजनीतिक नैया पार करने के लिए दलित और मुस्लिमों का गठबंधन होना जरूरी है। ऐसे में उन्होंने बताया कि दलितों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। ठीक 12 बजकर 52 मिनट पर मंच पर पहुंचीं मायावती ने आते ही माइक संभाल लिया और धाराप्रवाह बोलती रहीं। इस दौरान रोेहित वेमुला, गुजरात के ऊना कांड से होते हुए काफी देर तक सहारनपुर के शब्बीरपुर का जिक्र किया। बताया कि महाराणा प्रताप जयंती पर निकाले जा रहे जुलूस में क्षत्रियों और दलितों को जानबूझकर लड़वाया गया। कहा कि इससे ही षड्यंत्र साफ हो गया जब यह सामने आया कि उस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि फूलन देवी की हत्या का आरोपी शेर सिंह राणा था। बोलीं कि भाजपा ने इसके लिए एक दलित संगठन को मैनेज कर उसका इस्तेमाल किया। पोल खुली तो दिखावटी कार्रवाई कर दी। सोचा कि मैं वहां जाकर भड़काऊ भाषण दूंगी पर मैने परिस्थिति देखकर केवल सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की बात की। ऐसे में मेरी हत्या की साजिश भी फेल हो गई।
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मायावती ने इसी अंदाज में मुस्लिमों को भी साधा। कहा कि खास तौर पर मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहे हैं। उनकी गुजर बसर मुश्किल हो रही है। गाय को लेकर खरीद फरोख्त दहशतजदा लोगों ने बंद कर दी है और गायों का सरकारी कांजी हाउस में हाल बुरा है।
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मायावती ने अपनी पूरी पार्टी के इतिहास से लोगों को रूबरू कराया। कहा कि जब 1984 में बसपा बनी तो इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष कांशीराम को भी सीआईए का एजेंट कहकर छवि खराब करने की कोशिश की थी। कहा था कि इन्हें दिया गया धन देश के बाहर चला जाएगा। अब मेरी भी छवि इसी तरह से खराब करने की कोशिश की जा रही है कि मुझे पैसा कमाना है। यदि पैसे की भूख होती तो 25 अगस्त 2003 को सीएम पद से त्यागपत्र ही न देती।
पूरे भाषण में खास बात यह रही कि मायावती ने समाजवादी पार्टी पर टारगेट नहीं किया। एक बार भी सपा, मुलायम सिंह यादव या अखिलेश यादव का नाम नहीं लिया। न ही कांग्रेस से राहुल गांधी, सोनिया या किसी अन्य नेता का नाम लिया। बस यह जरूर कहा कि कांग्रेस की गलत कार्यप्रणाली के कारण भाजपा का ईवीएम का खेल नहीं खुल पाया। इसके अलावा कांग्रेस का भी कहीं कोई जिक्र मायावती ने नहीं किया। कार्यकर्ताओं में भी इसे लेकर चर्चा रही कि कहीं यह आने वाले चुनाव के नए समीकरण का इशारा तो नहीं। चूंकि यूपी विधानसभा चुनाव के बाद यह साफ हो चुका है कि बिना दलित मुस्लिम समीकरण के भाजपा का मुकाबला टेढ़ी खीर है। सपा के पास खासी संख्या मुस्लिम वोटों की है तो बसपा के पास दलितों की। यदि दोनों किसी भी सूरत में एक हो जाएं तो बाजी पलटी जा सकती है। हां, यहां मायावती ने पिछड़े वर्ग को साधने के लिए यह बार -बार याद दिलाया कि वीपी सिंह की सरकार को 1989 में समर्थन देने के बदले उन्होंने ही मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने की शर्त रखी थी। उसी का लाभ ओबीसी को मिला और आरक्षण दिया गया, जबकि भाजपा ने लगातार उसका विरोध किया। अब भी लाखों पद आरक्षण के खाली पड़े हैं पर बीजेपी भर नहीं रही है।
- बात सर्व समाज की पर निगाह पूरी तरह से दलित मुस्लिम गठजोड़ पर ही रही
- समाजवादी पार्टी पर निशाना साधना तो दूर एक बार भी नाम तक नहीं लिया
- कांग्रेस को लेकर भी तीखे नहीं रहे तेवर, सीधा निशाना भाजपा पर ही साधा