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सीएम के आदेश की नहीं अफसरों को परवाह, मेरठ में पानी के लिए तरस रहे लोग

Wed, 17 May 2017 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Wed, 17 May 2017 02:29 AM IST
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3300 hand pump are not in working condition
महानगर में दस हजार हैंडपंप खराब

मेरठ में पारा 40 के पार तक पहुंच रहा है, लेकिन मेरठ के लोगों को पानी के लिए भी भागदौड़ करनी पड़ रही है। शहर के 1500 और देहात के 1800 हैंडपंप खराब हैं। सीएम का हैंडपंप ठीक कराने का आदेश है, लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने अभी तक इनका संज्ञान नहीं लिया है। भीषण गर्मी में लोगों को पानी की किल्लत हो रही है। अगर किसी कारण से 8-10 घंटे बिजली चली जाए तो समस्या और भी बड़ी हो सकती है। 

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों में लगे सभी हैंडपंप ठीक कराए जाएं, ताकी गर्मी में पानी की दिक्कत न हो। योगी के आदेश के बाद जिला प्रशासन से लेकर नगर निगम प्रशासन में हैंडपंपों को लेकर हलचल मची थी। खराब हैंडपंपों का सत्यापन भी कराया गया था। लेकिन उसके बाद नगर निगम जलकल विभाग हैंडपंप ठीक कराने ही भूल गया। बाकी कसर ठेकेदारों ने पूरी कर दी। ठेकेदारों ने पुराने पेमेंट न मिलने की बात कहकर कार्य करने से हाथ खड़े कर दिए। सीएम योगी के मेरठ दौरे के दौरान विभाग ने वहां के हैंडपंप तो ठीक करा दिये जहां सीएम को जाना था, बाकि शहर को अफसर भूल गए। सीएम के जाने के बाद न तो जलकल अधिकारियों ने ही खराब हैंडपंपों की सुध ली और न ही जिला प्रशासन ने रिपोर्ट मांगी। 
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महानगर में दस हजार हैंडपंप 
महानगर में लगभग 10 हजार हैंडपंप लगे हैं। इनको ठीक कराने की जिम्मेदारी नगर निगम के जलकल विभाग की है। उप्र सरकार ने डेढ़ माह पहले सभी हैंडपंपों को ठीक कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभी तक शहर में खराब पड़े 1500 से अधिक हैंडपंपों को ठीक नहीं किया गया है। ठेकेदारों की मानें तो पिछले छह माह से नगर निगम हैंडपंप रिपेयर और रिबोर का पेमेंट नहीं कर रहा है।
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क्या कागजों में ठीक हो गए हैंडपंप
जिम्मेदार अफसरों की बात करें तो उनका कहना है कि सभी हैंडपंप ठीक करा दिए गए थे। ये पता नहीं कि हैंडपंप कागजों में ठीक कराए गए यो कहीं और, लेकिन पार्षदों का दावा है कि उनके इलाके में एक भी हैंडपंप ठीक नहीं हुआ। नगरायुक्त देवेंद्र कुमार कुशवाहा का कहना है कि जलकल विभाग की तरफ से मिली रिपोर्ट में सीएम दौरे के दौरान अधिकतर हैंडपंप ठीक करा दिए गए थे। गर्मी के चलते हो सकता है हैंडपंप खराब हो गए हों। विभागाध्यक्ष से पूरी जानकारी ली जाएगी। अगर कहीं लापरवाही है तो कार्रवाई की जाएगी। जलकल के अधिशासी अभियंता सुनील सिंघल का दावा है कि गंगाजल आने से शहर में पानी की दिक्कत नहीं है। उनका भी कहना है कि हैंडपंप ठीक कराए जा रहे हैं। हो सकता है दोबारा से हैंडपंप खराब हो गए हों। दिखवाया जाएगा। इसके अलावा पार्षद विनोद उपाध्याय, शाहिद अब्बासी, प्रमोद खड़ौली, नरेश डाबका, दिनेश चौधरी ने अफसरों के दावे को गलत बताया। उनका कहना है कि काफी समय से हैंडपंप खराब पड़े हैं। अनेकों बार शिकायत कर ली, लेकिन कोई सुनता ही नहीं है। 

रिबोर न होने से बिगड़ी देहात की पेयजल व्यवस्था

3300 hand pump are not in working condition
दस हजार हैंडपंप पड़े ठप

भीषण गर्मी में गांवों की पेयजल व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। नियमों के झोल में फंसी हैंडपंप व्यवस्था के कारण जनपद की 450 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में करीब 1800 हैंडपंपों का रिबोर नहीं हो रहा है। पानी न मिलने के कारण लोग परेशान हैं। ग्राम पंचायतों में पेयजल के लिए इंडिया मार्क 2 हैंडपंप लगे हैं, लेकिन अधिकांश हैंडपंप पुराने हो चुके हैं। ये बात अलग है कि पिछले साल प्रत्येक विधायक को सपा सरकार ने चुनावी माहौल को देखते हुए 100-100 हैंडपंप और रिबोर का फंड दिया था। लेकिन एक विधानसभा में ये फंड बहुत कम साबित हुआ।  

ये है रिबोर का नियम
शासन ने ग्राम पंचायतों को सिर्फ हैंडपंप मरम्मत का अधिकार दिया हुआ है। ऐसे में हैंडपंप में आने वाली छोटी मोटी खराबी को ही ग्राम प्रधान ठीक करा सकते हैं। लेकिन नया हैंडपंप और रिबोर सिर्फ विधायक की संस्तुति पर ही हो सकता है। नए हैंडपंप पर 50 हजार और रिबोर में करीब 40 हजार का खर्च आता है। ऐसे में रिबोर के लिए तमाम हैंडपंप विधायकों की संस्तुति के अभाव में फंसे हुए है। दो दिन पूर्व ही योगी सरकार ने रिबोर का नियम बदल दिया है। ग्राम प्रधान अब मरम्मत के साथ ही 13वें व 14वें वित्त आयोग के धन से स्वयं हैंडपंप रिबोर करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें जल निगम के इंजीनियर से तकनीकी मुआयना कराना होगा। यह आदेश सीडीओ कार्यालय से सभी ब्लाकों को जारी किया जा रहा है।

इन पर है देहात की जिम्मेदारी
ग्राम पंचायतों में हैंडपंप लगाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से जल निगम की है। परीक्षितगढ़ ब्लाक में यूपी एग्रो द्वारा हैंडपंप लगाए जाते हैं। ऐसे में हस्तिनापुर, मवाना, सरधना, सरूरपुर, जानी, खरखौदा, माछरा, मेरठ, रजपुरा, फलावदा और दौराला ब्लाक में हैंडपंप जल निगम द्वारा लगाए जाते हैं।

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