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जानीखुर्द और खरखौदा क्षेत्र में ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान
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मवाना/सरधना/किठौर/खरखौदा/माछरा/जानीखुर्द। अप्रैल के अंत में 40 तक पारा पहुंच जाने के कारण गर्मी ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए। बृहस्पतिवार सुबह से ही तेज धूप के चलते लोगों ने गर्मी महसूस की परंतु दोपहर बाद अचानक आसमान में बादल छाने एवं तेज हवा के साथ हल्की बूंदाबांदी होने से मौसम सुहाना हो गया। हालांकि बूंदाबांदी होने से किसानों के चेहरों पर चिंता देखी गई। वहीं, खरखौदा और जानी क्षेत्र में ओलावृष्टि के साथ बारिश होने से फसलों और बागों को काफी नुकसान पहुंचा है।
पिछले एक सप्ताह से तेज गर्मी ने लोगों का बुरा हाल कर रखा था। गेहूं की फसल खेतों में पककर तैयार है और किसान थ्रेसिंग कर रहे हैं। गेहूं क्रय केंद्रों पर भी आवक शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को सुबह तेज धूप निकली, जिस कारण लोगों ने गर्मी महसूस की। दोपहर बाद बादल छाने व हल्की बूंदबांदी होने से मौसम सुहाना हो गया। इससे लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की। वहीं, किसानों के चेहरे लटक गए। कृषि वैज्ञानिक डा. अनंत कुमार ने बताया कि जहां तेज बारिश व ओलावृष्टि हुई है। वहां गेहूं की फसल को नुकसान होगा। हल्की बूंदाबांदी से गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि अधिकतर किसानों के खेतों में गेहूं की कटाई हो चुकी है और गेहूं की फसल कटने के बाद अभी खेतों में ही है, थ्रेसिंग मशीन के माध्यम से गेहूं निकाला जाएगा। ऐसे में तेज बारिश गेहूं को नुकसान पहुंचाएगी।
ओलावृष्टि से भारी नुकसान, मुआवजे की मांग
खरखौदा। पिछले दो दिन से लगातार पारा बढ़ रहा है। इससे बृहस्पतिवार शाम अंधड के साथ जमकर ओलावृष्टि व बरसात हुई। कस्बा समेत गांव कैली, पांची, कबट्टा, खासपुर, कूड़ी, लालपुर, बिजौली सहित पूरे क्षेत्र में लगातार करीब 20 मिनट तक ओलावृष्टि हुई। जिसमें गांव कैली, खासपुर, बिजौली, कबट्टा में करीब छह इंच तक ओले पडे़। ग्रामीणों के अनुसार करीब 150 ग्राम तक का ओला पड़ा है। भारी ओलावृष्टि से खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। गेहूं की बाली टूटकर गिर गई। किसानों ने गेहूं सहित सभी फसलों में भारी नुकसान बताया है। वहीं, ओलावृष्टि से आम के बागों पर भी भारी असर पड़ा है। गांव कैली, पांची, खासपुर, कबट्टा, बिजौली सहित सभी गांवों के किसानों ने शुक्रवार को अधिकारियों से मिलकर ओलावृष्टि में हुई क्षति की भरपाई के लिए आर्थिक मदद की मांग की बात कही है।
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वहीं, जानीखुर्द क्षेत्र के धौलड़ी टिमकिया, रावा, जखेड़ा, रघुनाथनापुर, जानी, नेक टीकरी आदि गांवों में आंधी और ओलों ने जमकर तबाही मचाई। किसान टिमकिया निवासी जबर सिंह, बाफर निवासी नरेंद्र, गांव टीकरी निवासी संजय प्रधान आदि के अनुसार गेहूं की फसल हो आलों से काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। इससे थ्रेसिंग भी प्रभावित हो गई है। गन्ने की बुआई के लिए खेतों में रोका गया उनकी पत्तियां ओलों से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वहीं, आम की फसल को आंधी और ओलों से भारी नुकसान होने की आंशका है। गांव धौलड़ी निवासी बाग मालिक शफीक अहमद के अनुसार इस समय बागों में पेड़ों पर बहुत छोटा आम लगा हुआ है। ओलों से 35-40 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है।
सरधना क्षेत्र में हल्की बूंदाबांदी के साथ कुछ हवा के झोंके भी आए। जिस कारण गेहूं कटाई व थ्रेसिंग कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। हालांकि दो घंटे बाद मौसम फिर साफ हो गया। इस पर किसानों ने राहत की सांस ली।
किठौर, दो दिन से हो रही भीषण गर्मी के बाद बृहस्पतिवार को अचानक हुए मौसम खराब के बाद हुई बारिश से जहां आम बागवानों को फायदा है। वहीं, गेहूं की फसल को भारी नुकसान है। खेताें में पानी भरने से किसानों को भारी नुकसान है।
माछरा/मुंडाली। क्षेत्र मे आंधी व हल्की बूंदाबांदी से गेहूं की कटाई एवं गहाई प्रभावित हुई। वहीं, भूसा भी हवा के साथ उड़ गया। वहीं, आम का बोर टूट गया। कृषक प्रमोद कुुमार, जितेन्द्र, राकेश, आदि का कहना है कि फसल कटाई व गहाई के साथ आंधी तूफान अक्सर आता है। खेतों की कटी पूली हवा से दूसरे के खेतों में चली गईं।
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पिछले एक सप्ताह से तेज गर्मी ने लोगों का बुरा हाल कर रखा था। गेहूं की फसल खेतों में पककर तैयार है और किसान थ्रेसिंग कर रहे हैं। गेहूं क्रय केंद्रों पर भी आवक शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को सुबह तेज धूप निकली, जिस कारण लोगों ने गर्मी महसूस की। दोपहर बाद बादल छाने व हल्की बूंदबांदी होने से मौसम सुहाना हो गया। इससे लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की। वहीं, किसानों के चेहरे लटक गए। कृषि वैज्ञानिक डा. अनंत कुमार ने बताया कि जहां तेज बारिश व ओलावृष्टि हुई है। वहां गेहूं की फसल को नुकसान होगा। हल्की बूंदाबांदी से गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि अधिकतर किसानों के खेतों में गेहूं की कटाई हो चुकी है और गेहूं की फसल कटने के बाद अभी खेतों में ही है, थ्रेसिंग मशीन के माध्यम से गेहूं निकाला जाएगा। ऐसे में तेज बारिश गेहूं को नुकसान पहुंचाएगी।
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ओलावृष्टि से भारी नुकसान, मुआवजे की मांग
खरखौदा। पिछले दो दिन से लगातार पारा बढ़ रहा है। इससे बृहस्पतिवार शाम अंधड के साथ जमकर ओलावृष्टि व बरसात हुई। कस्बा समेत गांव कैली, पांची, कबट्टा, खासपुर, कूड़ी, लालपुर, बिजौली सहित पूरे क्षेत्र में लगातार करीब 20 मिनट तक ओलावृष्टि हुई। जिसमें गांव कैली, खासपुर, बिजौली, कबट्टा में करीब छह इंच तक ओले पडे़। ग्रामीणों के अनुसार करीब 150 ग्राम तक का ओला पड़ा है। भारी ओलावृष्टि से खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। गेहूं की बाली टूटकर गिर गई। किसानों ने गेहूं सहित सभी फसलों में भारी नुकसान बताया है। वहीं, ओलावृष्टि से आम के बागों पर भी भारी असर पड़ा है। गांव कैली, पांची, खासपुर, कबट्टा, बिजौली सहित सभी गांवों के किसानों ने शुक्रवार को अधिकारियों से मिलकर ओलावृष्टि में हुई क्षति की भरपाई के लिए आर्थिक मदद की मांग की बात कही है।
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वहीं, जानीखुर्द क्षेत्र के धौलड़ी टिमकिया, रावा, जखेड़ा, रघुनाथनापुर, जानी, नेक टीकरी आदि गांवों में आंधी और ओलों ने जमकर तबाही मचाई। किसान टिमकिया निवासी जबर सिंह, बाफर निवासी नरेंद्र, गांव टीकरी निवासी संजय प्रधान आदि के अनुसार गेहूं की फसल हो आलों से काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। इससे थ्रेसिंग भी प्रभावित हो गई है। गन्ने की बुआई के लिए खेतों में रोका गया उनकी पत्तियां ओलों से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वहीं, आम की फसल को आंधी और ओलों से भारी नुकसान होने की आंशका है। गांव धौलड़ी निवासी बाग मालिक शफीक अहमद के अनुसार इस समय बागों में पेड़ों पर बहुत छोटा आम लगा हुआ है। ओलों से 35-40 प्रतिशत फसल को नुकसान हुआ है।
सरधना क्षेत्र में हल्की बूंदाबांदी के साथ कुछ हवा के झोंके भी आए। जिस कारण गेहूं कटाई व थ्रेसिंग कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। हालांकि दो घंटे बाद मौसम फिर साफ हो गया। इस पर किसानों ने राहत की सांस ली।
किठौर, दो दिन से हो रही भीषण गर्मी के बाद बृहस्पतिवार को अचानक हुए मौसम खराब के बाद हुई बारिश से जहां आम बागवानों को फायदा है। वहीं, गेहूं की फसल को भारी नुकसान है। खेताें में पानी भरने से किसानों को भारी नुकसान है।
माछरा/मुंडाली। क्षेत्र मे आंधी व हल्की बूंदाबांदी से गेहूं की कटाई एवं गहाई प्रभावित हुई। वहीं, भूसा भी हवा के साथ उड़ गया। वहीं, आम का बोर टूट गया। कृषक प्रमोद कुुमार, जितेन्द्र, राकेश, आदि का कहना है कि फसल कटाई व गहाई के साथ आंधी तूफान अक्सर आता है। खेतों की कटी पूली हवा से दूसरे के खेतों में चली गईं।