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ई-टेंडरिंग के खेल में शामिल अधिकारी व ठेकेदारों में हड़कंप
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- आनन फानन में कार्यों को स्वीकृति देने की चल रही तैयारी
- अधिकारी पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने की तैयारी में जुटे
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। डूडा में ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के खेल में शामिल अधिकारी और ठेकेदारों में दिनभर हड़कंप रहा। अधिकारी जहां आनन-फानन में 15 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को स्वीकृति की तैयारी में जुट गए, वहीं ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया निरस्त होने का डर सता रहा है। हालांकि संबंधित अधिकारी सरकार की मंशा और ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में गोलमाल पर पर्दा डालने में जुट गए हैं।
ई-टेंडरिंग में खेल को अमर उजाला ने सोमवार के अंक में उजागर किया। इसका असर डूडा विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों में देखने को मिला। दिनभर फाइलों को स्वीकृति देने के लिए तैयार किया गया। बता दें कि उप्र सरकार ने 15 करोड़ रुपया शहर की मलिन बस्तियों के विकास के लिए जारी किया था। इसके लिए सरकार ने ई-टेंडरिंग अपनाने के निर्देश दिए। डूडा में उप्र सरकार के आदेश के अनुपालन के तहत ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन ठेकेदारों से साठगांठ करके ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में ही खेल कर दिया। दूसरे जनपद की वेबसाइट पर टेंडर निकालकर कुछ निश्चित ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने का काम किया। इस कारण अन्य ठेकेदार विरोध में आ गए। ठेकेदारों ने ही डूडा अधिकारियों की कार्य प्रणाली की पोल खोलनी शुरू कर दी। कुछ ठेकेदारों ने तो पूरा मामला शासन को भेज दिया है। अब देखना यह है कि क्या कमिश्नर और डीएम इस गड़बड़झाले पर क्या कदम उठाएंगे। यदि टेंडर 20 प्रतिशत बिलो जाते तो 15 करोड़ के विकास कार्यों पर सरकार को लगभग तीन करोड़ रुपये बचते। जिससे शहर का विकास होता।
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- अधिकारी पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने की तैयारी में जुटे
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। डूडा में ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के खेल में शामिल अधिकारी और ठेकेदारों में दिनभर हड़कंप रहा। अधिकारी जहां आनन-फानन में 15 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को स्वीकृति की तैयारी में जुट गए, वहीं ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया निरस्त होने का डर सता रहा है। हालांकि संबंधित अधिकारी सरकार की मंशा और ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में गोलमाल पर पर्दा डालने में जुट गए हैं।
ई-टेंडरिंग में खेल को अमर उजाला ने सोमवार के अंक में उजागर किया। इसका असर डूडा विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों में देखने को मिला। दिनभर फाइलों को स्वीकृति देने के लिए तैयार किया गया। बता दें कि उप्र सरकार ने 15 करोड़ रुपया शहर की मलिन बस्तियों के विकास के लिए जारी किया था। इसके लिए सरकार ने ई-टेंडरिंग अपनाने के निर्देश दिए। डूडा में उप्र सरकार के आदेश के अनुपालन के तहत ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन ठेकेदारों से साठगांठ करके ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में ही खेल कर दिया। दूसरे जनपद की वेबसाइट पर टेंडर निकालकर कुछ निश्चित ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने का काम किया। इस कारण अन्य ठेकेदार विरोध में आ गए। ठेकेदारों ने ही डूडा अधिकारियों की कार्य प्रणाली की पोल खोलनी शुरू कर दी। कुछ ठेकेदारों ने तो पूरा मामला शासन को भेज दिया है। अब देखना यह है कि क्या कमिश्नर और डीएम इस गड़बड़झाले पर क्या कदम उठाएंगे। यदि टेंडर 20 प्रतिशत बिलो जाते तो 15 करोड़ के विकास कार्यों पर सरकार को लगभग तीन करोड़ रुपये बचते। जिससे शहर का विकास होता।
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